Gaana’s Mid-Year Magicians: साल 2025 अपने आधे पड़ाव को खत्म कर चुका है। इस साल देखा गया है कि कैसे म्यूजिक को पसंद किया जा रहा है। इंडिया म्यूजिक की पसंद में लोगों के अंदर एक बड़ा बदलाव भी देखने को मिला है। ऐसे में अब गाना के मिड-ईयर मैजिशियन कैंपेन में इस बदलाव को पूरी तरह दिखाया गया है। बॉलीवुड के पोपुलर कल्चर ने भी एक अच्छी पकड़ बनाई है। इस प्लेटफॉर्म के आंकड़े अब रीजनल भाषा, कई अलग-अलग शैलियों पर किए गए एक्सपेरिमेंट्स और इमोशनल तौर पर प्रभावित करने वाली रचाओं की ओर बढ़ती रुचि को दिखाते हैं। इस कैंपेन की रिपोर्ट में दिखाया गया है कि यह बदलाव केवल प्लेलिस्ट ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक विकास को भी दर्शाता है। इस समय सभी महानगरों और टियर-2 शहरों के लोग भी अलग-अलग भाषाओं के साथ म्यूजिक ट्रेडिशंस को दर्शाने वाली धुनों को सुन रहे हैं।
साल 2025 में देखा गया है कि कलाकर केवल फिल्म म्यूजिक इंडस्ट्री तक ही सिमित नहीं रहे हैं बल्कि उन्होंने देश के हर कोने में अपने टैलेंट को प्रूफ किया है। वे सभी विशिष्ट लोकल साउंड्स को राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में ला रहे हैं। महाराष्ट्र, हरियाणा, तमिलनाडु और बिहार की आवाज भी इस लिस्ट में टॉप रही हैं। अब लोगों ने इन भाषाओं के गानों को भी खूब सुना है।
मराठी आर्टिस्ट संजू राठोड़ के 'शैकी' और 'गुलाबी साड़ी' जैसे ट्रैक्ट्स जबरदस्त हिट साबित हुए। ये ट्रैक्स कई राज्यों में स्ट्रीमिंग नंबरों पर छा गए। इन ट्रैक्स की लोकप्रियता से एक बात जो पता चलती है वो यह है कि अब रीजनल म्यूजिक विशिष्ट नहीं रहा। यह सभी के द्वारा पसंद किया जा रहा है। इसी तरह हरयाणवी सिंगर मासूम शर्मा का "लोफर" गाना भी नेशनल लेवल पर काफी पसंद किया गया। इसने हरियाणवी लोक संगीत की जड़ों को ग्रामीण और शहरी, दोनों तरह के युवाओं के साथ जोड़ा।
भोजपुरी सिनेमा की फेमस सिंगर शिल्पी राज के गाने भी आज देशभर में धूम मचा रहे हैं। शिल्पी राज ने भी 2025 में अपनी बुलंदियों को छुआ। शिल्पी राज द्वारा गाया गया 'बन्दूक' गाना भी उन लोगों के बीच खूब फेमस हुआ, जो बेबाक ऊर्जा के प्रति आकर्षित होते हैं। तमिल के फेमस सिंगर साई अभ्यंकर के सिथिरा पुथिरी, आसा कूड़ा और विझी वीकुरा ने भी लोगों को खूब एंटरटेन किया।

Gaana’s Mid-Year Magicians.
हिंदी म्यूजिक के लोकप्रिय सिंगर अरिजीत सिंह के इमोशनल गाने 'जमाना लगे' को काफी पसंद किया गया। इसके अलावा उनका बंगाली ट्रैक 'तोमाके चाय बोलेछिलेम' भी लोकप्रिय हुआ। श्रेया घोषाल ने हिंदी, तेलुगु और तमिल गीतों के लिए अपनी मधुर आवाज देकर शानदार प्रदर्शन किया और अपनी विशिष्ट कुशलता से प्रत्येक रचना को सूक्ष्मता से उभारा। अनिरुद्ध रविचंदर ने 'सवदीका', 'हृदयम लोपाला' और 'धीमा' जैसे गाने गाए और इससे उनकी लोकप्रियता पैन-इंडिया लेवल पर बढ़ती जा रही है।
दिग्गज कंपोजर प्रीतम चक्रवर्ती ने फिल्म 'मेट्रो...इन दिनों' के लिए म्यूजिक देकर अपने टैलेंटे को साबित किया और लोगों के बीच एक मजबूत पकड़ बनाई। 'मेट्रो...इन दिनों' के गानों को इस साल के अब तक के सबसे बेहतरीन एल्बमों में से एक माना जाता है। इस बीच एस. पी. बालासुब्रमण्यम के क्लासिक गानों की इस मंच पर वापसी ने पुराने दौर की यादें ताजा कीं। लोग उनकी धुनों से इमोशनली कनेक्ट भी हुए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एड शीरन और अरिजीत सिंह का साथ मिलकर गाया हुआ गाना "सफायर" भी इंडियन प्लेलिस्ट में सबसे ज्यादा सुना गया।
इंडियन म्यूजिक को अब तेजी से पसंद किया जा रहा है, जिसमें रीजनल आर्टिस्ट और उनके एक्सपेरिमेंट अहम भूमिका निभा रहे हैं। गाना का मिड-ईयर राउंडअप केवल यह नहीं दर्शाता है कि भारत क्या सुन रहा है बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे आइडेंटिटी, इमोशन और एक्सप्रेशन, भाषा और साउंड के साथ तेजी से बढ़ रही है। जैसे-जैसे साल आगे बढ़ रहा है, उसके साथ-साथ इन ट्रेंड्स के और भी बढ़ने की संभावना है। आने वाले महीनों में लोकल वॉइसेस और भी सुर्खियों में आएंगी। 2025 में हिटमेकर होकर ये इसे नए सिरे से परिभाषित करेंगी।
