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बिहार की सियासत में बाहुबल और परिवारवाद का ‘मेल’; 22 बाहुबली प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतरे, कई जगह आमने-सामने की टक्कर

बिहार चुनाव 2025 में एक बार फिर यह साफ दिख रहा है कि राज्य की राजनीति से बाहुबली और परिवारवाद का असर खत्म नहीं हुआ है। जहां एक ओर बाहुबली नेता खुद मैदान में हैं, वहीं कई जगहों पर उनकी पत्नियां, बेटियां और बेटे भी सत्ता की दौड़ में शामिल हैं। आइए देखते हैं इस बार कौन-कौन से बाहुबली और उनके परिजन चुनावी रण का हिस्सा है।

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चुनावी रण में उतरे 22 बाहुबली और उनके परिजन (तस्वीर साभार: PTI)

Photo : PTI

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का रंग चढ़ चुका है, दोनों चरणों में नामांकन दाखिल करने की प्रकिया पूरी हो चुकी है। 6 और 11 नवंबर को होने वाली वोटिंग होनी है और 14 नवंबर को नतीजे आने वाले हैं। दिलचस्प बात यह है कि राज्य के 22 बाहुबली खुद या उनके परिवार के कोई सदस्य चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। आंकड़ें देखें तो इनमें से 9 RJD, 7 JDU, 4 BJP और 2 LJP (रामविलास) के टिकट पर उतरे हैं। जिन सीटों पर ये चुनावी रण होने वाला है, वहां केवल पार्टी की साख दांव पर नहीं है। राजनीतिक दलों से इतर ये लड़ाई दबंग छवि और पारिवारिक विरासत की साख की भी है। आइए एक नजर डालते हैं ऐसे बाहुबली चेहरों पर जो चुनावी रण में उतर चुके हैं।

मोकामा सीट पर अनंत सिंह बनाम सूरजभान की पत्नी

बिहार की राजनीति में “छोटे सरकार” के नाम से मशहूर अनंत सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। 2022 में सजा के चलते विधायक पद खोने के बाद अब वे JDU के टिकट पर मोकामा से चुनाव लड़ रहे हैं। बता दें कि JDU का टिकट मिलने की औपचारिक सूचना से पहले ही इन्होंने नामांकन भरने के लिए पोस्टर सोशल मीडिया पर चस्पा कर दिया था। 2020 में उनकी पत्नी नीलम देवी ने RJD के टिकट पर उपचुनाव जीता था। अब हाईकोर्ट से बरी होने के बाद अनंत खुद मैदान में हैं और उनके सामने हैं, बाहुबली सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी, जो इस बार RJD की प्रत्याशी हैं। यह मुकाबला मोकामा की राजनीति में पुराने बाहुबलियों की वापसी माना जा रहा है।

नवीनगर सीट से आनंद मोहन के बेटे चेतन का नया दांव

बाहुबली नेता आनंद मोहन सिंह के बेटे चेतन आनंद 2020 में RJD की टिकट पर शिवहर से विधायक बने थे लेकिन अब वे JDU में शामिल होकर नवीनगर से टिकट पर मैदान में हैं। राजपूत बहुल सीट नवीनगर में चेतन का मुकाबला काफी दिलचस्प माना जा रहा है। जेल से बाहर आने के बाद आनंद मोहन ने अपने परिवार को फिर से सक्रिय राजनीति में उतारा है।

एकमा में धूमल सिंह की वापसी

सारण के एकमा सीट से बाहुबली मनोरंजन उर्फ धूमल सिंह फिर से JDU के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। 2020 में उनकी पत्नी सीता देवी ने इसी सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गईं। धूमल सिंह का राजनीति में पुराना अनुभव और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से करीबी संबंध उनके लिए बड़ा सहारा है।

भोजपुर से पांडेय परिवार का दोहरा मुकाबला

भोजपुर जिले की तरारी और ब्रह्मपुर सीटें इस बार पांडेय परिवार के कब्जे में हैं। तरारी से सुनील पांडेय के बेटे विशाल प्रशांत BJP के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, ब्रह्मपुर से सुनील पांडेय के भाई हुलास पांडेय LJP (रामविलास) के प्रत्याशी हैं। भोजपुर की राजनीति में पांडेय परिवार की मजबूत पकड़ के चलते यह मुकाबला भी चर्चाओं में है।

वारिसलीगंज में दो बाहुबली आमने-सामने

नवादा की वारिसलीगंज सीट पर अखिलेश सिंह सरदार की पत्नी अरुणा देवी (BJP) और उनके प्रतिद्वंद्वी अशोक महतो की पत्नी अनीता देवी (RJD) के बीच सीधा टकराव है। दोनों बाहुबली नेताओं के बीच वर्षों पुरानी दुश्मनी अब चुनावी रण में बदल गई है। अशोक महतो 2001 में हुए नवादा जेल ब्रेक कांड में 17 साल की जेल की सजा काट चुके हैं। 2023 में जेल से बाहर आए थे। नियमों के अनुसार, दो साल से अधिक की सजा पाया व्यक्ति जेल से निकलने के छह साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता। साल 2024 में इन्होंने अनीता देवी से शादी की है, जिसे तब सियासी शादी कहा जा रहा था।

कुचायकोट में अमरेंद्र पांडेय की बादशाहत

गोपालगंज जिले के बाहुबली विधायक अमरेंद्र उर्फ पप्पू पांडेय लगातार पांच बार चुनाव जीत चुके हैं। अब वे छठी बार JDU के टिकट पर मैदान में हैं। पांडेय 2005 में बसपा से राजनीति में आए और तब से कुचायकोट में लगातार प्रभाव बनाए हुए हैं।

रघुनाथपुर से शहाबुद्दीन की विरासत लेकर मैदान में ओसामा

RJD ने इस बार अपने दिवंगत बाहुबली नेता शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब को सिवान के रघुनाथपुर से टिकट दिया है। ओसामा का यह पहला चुनाव है और इसे शहाबुद्दीन परिवार की सियासी विरासत की परीक्षा माना जा रहा है।

संदेश में बालू माफियाओं की सीधी भिड़ंत

भोजपुर की संदेश सीट पर इस बार दो बालू माफिया आमने-सामने हैं। RJD ने अरुण यादव के बेटे दीपू राणावत को टिकट दिया है, जबकि JDU ने राधा चरण साह को उम्मीदवार बनाया है। यह सीट पिछले दस साल से RJD के कब्जे में है, लेकिन इस बार मुकाबला कड़ा माना जा रहा है।

लालगंज में मुन्ना शुक्ला की विरासत संभाल रही बेटी

बाहुबली मुन्ना शुक्ला की बेटी शिवानी शुक्ला को RJD ने लालगंज से टिकट दिया है। मुन्ना शुक्ला उम्रकैद की सजा काट रहे हैं और अब उनकी बेटी उनके राजनीतिक वारिस के रूप में मैदान में हैं। लालगंज सीट पर फिलहाल BJP का कब्जा है।

दानापुर-नवादा में भी बाहुबलियों के परिजन

RJD के बाहुबली विधायक रीतलाल यादव फिलहाल जेल में हैं, लेकिन पार्टी ने उन्हें दानापुर से दोबारा टिकट दिया है। रीतलाल लालू यादव के करीबी माने जाते हैं और 2020 में उन्होंने इसी सीट से जीत दर्ज की थी। उधर नवादा में नाबालिग से दुष्कर्म केस में बरी होने के बाद बाहुबली राजबल्लभ यादव अब राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं। उनकी पत्नी विभा देवी ने RJD छोड़कर JDU का दामन थाम लिया है और नवादा से उम्मीदवार हैं।

मांझी-बनियापुर सीटों पर प्रभुनाथ सिंह परिवार की दोहरी एंट्री

उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह के बेटे रंधीर सिंह को JDU ने मांझी से टिकट दिया है, जबकि उनके भाई केदारनाथ सिंह BJP के उम्मीदवार हैं। उनके सामने RJD ने अशोक सिंह की पत्नी चांदनी सिंह को मैदान में उतारा है। यह सीट 90 के दशक की बाहुबली राजनीति की यादें ताजा कर रही है।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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