UP Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी संगठन ने राज्य में चुनावी समीकरणों का आकलन शुरू कर दिया है और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जल्द ही प्रदेश के छहों क्षेत्रों का दौरा कर चुनावी अभियान की रूपरेखा को गति देंगे। शुरुआत ब्रज क्षेत्र से होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, इस बार बीजेपी उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने जा रही है। पार्टी का फोकस केवल अनुभव या वरिष्ठता पर नहीं होगा, बल्कि इस बात पर होगा कि कौन उम्मीदवार संबंधित सीट पर जीत दिलाने की सबसे अधिक क्षमता रखता है। इसी आधार पर टिकट वितरण की रणनीति तैयार की जा रही है।
2022 के प्रदर्शन की हो रही सीटवार समीक्षा
बीजेपी ने 2022 विधानसभा चुनाव के नतीजों का विस्तृत विश्लेषण शुरू किया है। उस चुनाव में पार्टी ने 376 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और 255 सीटों पर जीत दर्ज की थी। यानी 121 सीटें पार्टी के हाथ से निकल गई थीं। अब संगठन इन सभी सीटों की अलग-अलग समीक्षा कर रहा है। खास तौर पर उन सीटों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, जहां हार का अंतर बेहद कम रहा था। ऐसी करीब 49 सीटें चिन्हित की गई हैं, जहां जीत और हार के बीच पांच हजार से भी कम वोटों का अंतर था। पार्टी का मानना है कि बेहतर संगठन, मजबूत बूथ प्रबंधन और प्रभावी उम्मीदवार के जरिए इन सीटों को दोबारा जीता जा सकता है।
लखनऊ स्थित राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर एक कार्यक्रम के दौरान बीएल संतोष, केशव प्रसाद मौर्य, नितिन नवीन, योगी आदित्यनाथ, पंकज चौधरी और ब्रजेश पाठक (फोटो- BJP4UP)
हर तरह की सीट के लिए अलग चुनावी रणनीति
बीजेपी ने विधानसभा क्षेत्रों को उनकी राजनीतिक स्थिति के आधार पर चार वर्गों में बांटा है। पहली श्रेणी में वे सीटें हैं जहां पार्टी लगातार चुनाव जीतती रही है। दूसरी श्रेणी में वे सीटें हैं जहां जीत तो मिली, लेकिन अंतर कम रहा। तीसरी श्रेणी में वे सीटें रखी गई हैं जहां पार्टी लगातार दो चुनाव से मामूली अंतर से हार रही है। चौथी श्रेणी में वे विधानसभा क्षेत्र शामिल किए गए हैं जिन्हें समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता है। पार्टी का मानना है कि हर सीट की राजनीतिक परिस्थिति अलग है, इसलिए प्रत्येक श्रेणी के लिए अलग चुनावी रणनीति और अलग संगठनात्मक योजना बनाई जाएगी।
61 सीटों पर विशेष अभियान
बीजेपी की रणनीति में 61 विधानसभा सीटों को सबसे अधिक महत्व दिया गया है। ये वे सीटें हैं जहां पार्टी पिछले तीन विधानसभा चुनावों—2012, 2017 और 2022- में जीत हासिल नहीं कर सकी। इन क्षेत्रों में नए सिरे से संगठन को सक्रिय करने, बूथ नेटवर्क मजबूत करने, सामाजिक समीकरणों का अध्ययन करने और संभावित उम्मीदवारों का फीडबैक जुटाने का अभियान चलाया जाएगा।
टिकट से पहले नेताओं का होगा रिपोर्ट कार्ड
सूत्रों का कहना है कि इस बार टिकट वितरण से पहले कई नेताओं का चुनावी रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जा रहा है। खास तौर पर उन नेताओं के प्रदर्शन का मूल्यांकन होगा जो लगातार कई चुनाव लड़ चुके हैं। उनकी पिछली जीत या हार का अंतर, बूथ स्तर पर प्रदर्शन, स्थानीय संगठन में प्रभाव और जनता के बीच स्वीकार्यता जैसे सभी पहलुओं को परखा जाएगा। यदि किसी मौजूदा चेहरे की जीत की संभावना कमजोर पाई गई तो उसका टिकट बदला भी जा सकता है।
गृहमंत्री अमित शाह और सीएम योगी आदित्यनाथ (फोटो- MYogiAdityanath)
राम मंदिर विवाद भी बना राजनीतिक चुनौती
बीजेपी के सामने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितता के आरोप भी एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दे के रूप में सामने आए हैं। मामले में जांच जारी है और मंदिर ट्रस्ट के भीतर प्रशासनिक बदलावों की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। पार्टी इस मुद्दे के संभावित राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए सतर्क है, क्योंकि राम मंदिर उसके वैचारिक और राजनीतिक एजेंडे का महत्वपूर्ण आधार रहा है।
विपक्ष भी चुनावी तैयारी में सक्रिय
समाजवादी पार्टी भी 2027 के चुनावी अभियान की तैयारी में जुट चुकी है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव रथ यात्रा के माध्यम से प्रदेशभर में जनसंपर्क अभियान शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी PDA समीकरण के सहारे चुनावी माहौल बनाने की कोशिश करेगी और राम मंदिर चढ़ावा विवाद को भी राजनीतिक मुद्दा बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। वहीं कांग्रेस भी संगठन को सक्रिय करने और प्रदेश में अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने के प्रयासों में जुटी हुई है।
मिशन 2027 पर पूरी ताकत
बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि उत्तर प्रदेश की सत्ता बरकरार रखने के लिए अभी से सूक्ष्म स्तर पर तैयारी जरूरी है। यही वजह है कि सीटवार समीक्षा, संगठन की मजबूती और उम्मीदवारों के प्रदर्शन के आकलन को प्राथमिकता दी जा रही है। पार्टी का स्पष्ट संदेश है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट किसी की वरिष्ठता या पुराने राजनीतिक कद के आधार पर नहीं, बल्कि चुनाव जीतने की वास्तविक संभावना को देखते हुए तय किया जाएगा।
