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Study in France: अमेरिका इंग्लैंड की जगह फ्रांस में पढ़ाई करना क्यों पसंद करते हैं भारतीय, जानें खासियत

Study in France: विकसित देशों में पढ़ाई बहुत से छात्रों की इच्छा होती है। क्या आप जानते हैं कि भारतीय छात्र अमेरिका, इंग्लैंड से ज्यादा फ्रांस में पढ़ना पसंद करते हैं, लेकिन इसके पीछे कारण क्या है, फ्रांस की यूनिवर्सिटी में भारतीय छात्रों की एडमिशन का आंकड़ा क्यों बढ़ रहा है, चलिए जानें

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फ्रांस में एडमिशन

Why Study in France for Indian students: पिछले कुछ सालों में, फ्रांस अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए विदेश में अध्ययन करने के लिए पसंदीदा जगहों में से एक बन गया है। अगर पिछले 10 सालों की बात करें तो फ्रांस में इंटरनेशनल स्टूडेंट्स की संख्या में सबसे ज्यादा इजाफा हुआ है। स्टैटिस्टा की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में फ्रांस के विश्वविद्यालयों में 2.9 मिलियन छात्र नामांकित थे। केवल भारतीय छात्रों की बात करें, तो फ्रांस में 2025 में इंडियन स्टूडेंट्स की संख्या 20,000 तक पहुंच सकती है। लेकिन इसके पीछे कारण क्या है? आइये जानते हैं

क्या कहता है डेटा

जिस तरह से भारतीय स्टूडेंट्स फ्रांस में पढ़ाई के लिए दिलचस्पी दिखाने लगे हैं, पिछले एक साल में इन आंकड़ों में 12% का इजाफा हुआ है। यहां के हायर एजुकेशन में 14% विदेशी छात्र हैं। पिछले साल यहां 430,466 इंटरनेशनल स्टूडेंट्स ने दाखिला लिया था, जो कि 4.5% का इजाफा दिखाता है। भारत के अलावा इस देश में चाइना, इटली, मोरक्को, अल्जीरिया से छात्र भी एडमिशन में दिलचस्पी दिखाते हैं।

फ्रांस में पढ़ने क्यों जा रहे हैं भारतीय छात्र?

पिछले साल फ्रांस ने फैसला लिया है कि वो भारत के स्टूडेंट्स के लिए अपने हायर एजुकेशन इंस्टिट्यूट के दरवाजे खुलकर खोलेगा। फ्रांस ने भारत सरकार के साथ मिलकर 2030 तक 30,000 भारतीय स्टूडेंट्स को फ्रांस लाने का गोल तय किया है।

भारत में फ्रेंच है लोकप्रिय

भारत में स्कूल लेवल पर स्टूडेंट्स के बीच फ्रेंच पॉपुलर विदेशी भाषा का सब्जेक्ट है। ऐसे में फ्रेंच यूनिवर्सिटी में भारतीय छात्रों को आसानी से एडमिशन मिल जाता है। फ्रांस के संस्थानों में फ्रेंच और इंग्लिश में पढ़ाई होती है।

फ्रेंच यूनिवर्सिटीज में एडमिशन

फ्रांस में भारतीय छात्रों के लिए 'क्लासेज इंटरनेशनल्स' नाम की स्कीम चल रही है, जिसके तहत आप एडमिशन के लिए अप्लाई कर सकते हैं, आवेदन की अंतिम तिथि 31 मार्च है। अगर आपको फ्रेंच बिल्कुल नहीं आती है, तब भी इस स्कीम के जरिये एडमिशन का मौका मिल सकता है। हालांकि उन्हें पहले साल लैंग्वेज पढ़ना होगा, साथ-साथ देश के कल्चरल इवेंट्स में शामिल होने का मौका मिलेगा और फिर तीन साल की डिग्री प्रोग्राम पूरी कर सकेंगे।

किन कोर्सों के लिए जाते हैं स्टूडेंट्स?

भारत में की तरह फ्रांस में भी सरकारी इंस्टिट्यूट मौजूद हैं, जहां की फीस प्राइवेट के मुकाबले बहुत कम होती है। बता दें, यहां सबसे ज्यादा बिजनेस स्कूल्स में एडमिशन बढ़ रहे हैं। पिछले पांच साल में इन स्कूलों में विदेशी स्टूडेंट्स की संख्या में 80% तक बढ़ चुकी है। पिछले एक साल की बात करें, तो बिजनेस स्कूलों में 17% स्टूडेंट्स बढ़े हैं, वहीं इंजीनियरिंग स्कूलों में 9% छात्रों का इजाफा हुआ है।

फ्रांस में फैशन, हॉस्पिटैलिटी, डेटा एनालिटिक्स जैसे कोर्सों की काफी डिमांड है। अब फ्रांस एडमिनिस्ट्रेशन, फाइनेंस, लॉ, अर्बन स्टडीज पर भी फोकस कर रहा है, जहां विदेशी स्टूडेंट्स कम पहुंचते हैं।

फ्रांस के टॉप इंस्टिट्यूट कैसे पता करें

फ्रांस में 75 से ज्यादा प्रतिष्ठित इंस्टिट्यूट हैं, जिनकी लिस्ट में से कुछ के नाम ये रहे

  • यूनिवर्सिटी पीएसएल
  • पेरिस यूनिवर्सिटी
  • पैंथियन सोरबोन
  • यूनिवर्सिटी पेरिस-सैकले
  • टेलिकॉम पेरिस
  • इकोले डेस पोंट्स पेरिसटे

जॉब के साथ कमाई भी

फ्रांस में पढ़ाई के साथ-साथ पार्ट-टाइम जॉब के भी अवसर मिल जाते हैं, यही कारण है छात्रों को अपना छोटा मोटा खर्चा निकालने के लिए खास परेशान नहीं होना पड़ता है।

Neelaksh Singh
नीलाक्ष सिंहauthor

नीलाक्ष सिंह 2021 से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल से जुड़े हैं और एजुकेशन सेक्शन के लिए कंटेंट लिखते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रिंट मीडिया में इंटर्नशिप की, जहां फील्ड रिपोर्टिंग, स्टूडेंट-इश्यू बेस्ड ग्राउंड स्टोरीज और सटीक न्यूजराइटिंग की बुनियादी समझ हासिल की। प्रिंट के बाद डिजिटल मीडिया में भी वह एजुकेशन बीट पर ही लगातार काम करते रहे हैं। पत्रकारिता में 10 सालों से सक्रिय नीलाक्ष सिंह 12 हजार से अधिक खबरें लिख चुके हैं। वह एग्जाम अपडेट्स, एडमिशन प्रोसेस, करियर गाइडेंस, स्टूडेंट वेलफेयर, बोर्ड रिजल्ट्स और नीतिगत बदलावों पर गहन और बेहद उपयोगी कंटेंट तैयार करते हैं।

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