What is Stenography: आज के डिजिटल युग में भले ही कंप्यूटर और वॉयस टाइपिंग का जमाना हो, लेकिन प्रशासनिक और अदालती कामकाज में 'स्टेनोग्राफी' (Stenography) की भूमिका आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी पहले हुए करती थी। किसी वक्ता द्वारा बोले जा रहे लंबे-चौड़े भाषण या कोर्ट में हो रही बहस को पलक झपकाते ही कागज पर उतार देना किसी कला से कम नहीं है। स्टेनोग्राफी एक ऐसी ही विशेष लेखन शैली है, जिसकी मदद से कोई व्यक्ति सामान्य भाषा की तुलना में लगभग तीन से चार गुना तेजी से इसे लिख सकता है। इतना ही नहीं, इस भाषा को सिखने का कभी नुकसान नहीं है, क्योंकि सरकारी नौकरियों और निजी क्षेत्र में स्टेनोग्राफर के पद की हमेशा भारी मांग रहती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शब्दों को तेजी से कैद करने वाली इस विद्या का इतिहास कितना पुराना है? इसकी शुरुआत किसने की है और आधुनिक समय में इसका महत्व क्या है?
क्या है स्टेनोग्राफी?
सरल शब्दों में कहें तो स्टेनोग्राफी तेज गति से लिखने की एक कला या सांकेतिक प्रणाली (Shorthand Writing) है। स्टेनोग्राफी को हिंदी में 'आशुलिपि' कहा जाता है। इसमें सामान्य भाषा के लंबे-लंबे शब्दों, वाक्यों और ध्वनियों को छोटे-छोटे संकेतों को रेखाओं, बिंदुओं और कोणों में बदल दिया जाता है। इसमें एक सामान्य इंसान एक मिनट में औसतन 25 से 30 शब्द लिख पाता है, जबकि एक स्किल्ड स्टेनोग्राफर 80 से 120 शब्द या इससे भी अधिक लिख सकता है। बता दें कि स्टेनोग्राफर पहले बोले गए विचारों को शॉर्टहैंड सिंबल्स में नोट करता है और फिर बाद में उसे सामान्य भाषा में टाइप करके एक विस्तृत रिपोर्ट के तौर पर तैयार करता है।
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कहां से और कैसे हुई थी स्टेनोग्राफी की शुरुआत?
स्टेनोग्राफी का इतिहास कोई नया नहीं है, बल्कि इसका इतिहास हजारों साल पुराना है। इसकी शुरुआत प्राचीन सभ्यताओं से मानी जाती है। जानकारी के अनुसार, स्टेनोग्राफी का सबसे पहला प्रमाण प्राचीन यूनान (ग्रीस) और रोम में मिलता है। इतिहासकार बताते हैं कि इसा पूर्व चौथी शताब्दी में प्रसिद्ध दार्शनिक जेनोफोन ने सुकरात के विचारों को तेजी से नोट करने के लिए एक विशेष सांकेतिक लिपि का इस्तेमाल किया था।
किसने की थी स्टेनोग्राफी की शुरुआत
स्टेनोग्राफी की शुरुआत रोमन साम्राज्य के दौरान मार्क्स तुलियस तिरो (Marcus Tullius Tiro), जो प्रसिद्ध रोमन राजनीतिज्ञ सिसेरो के निजी सचिव थे, ने वर्ष 63 ईसा पूर्व में एक शॉर्टहैंड प्रणाली विकसित की थी और इसे 'टिरोनियन नोट्स' कहा गया था। इस प्रणाली का इस्तेमाल रोमन सीनेट (संसद) के भाषणों और अदालती कार्यवाहियों को तुरंत और तेजी से बिना कुछ छोड़े दर्ज करने के लिए किया जाता था। यह प्रणाली सदियों तक यूरोप में लोकप्रिय रही।
आधुनिक युग और आइजैक पिटमैन की क्रांति
16वीं से 18वीं शताब्दी के दौरान इंग्लैंड में शॉर्टहैंड की कई नई प्रणालियां विकसित हुईं। लेकिन इस क्षेत्र में असली क्रांति सर आइज़ैक पिटमैन (Sir Isaac Pitman) लेकर आए। आइज़ैक पिटमैन ने वर्ष 1837 में 'ध्वन्यात्मक' (Phonetic) आधार पर आधारित शॉर्टहैंड सिस्टम बनाया। इसमें शब्दों की स्पेलिंग की बजाय उनके उच्चारण (Sound) पर ध्यान दिया गया। उनके बाद वर्ष 1888 में जॉन रॉबर्ट ग्रेग ने एक और लोकप्रिय प्रणाली पेश की, जो ज्यामितीय रेखाओं की जगह बहती हुई लिखावट (Cursive Writing) पर आधारित थी।
आधुनिक समय में क्या है स्टेनोग्राफी का महत्व
आज के समय में स्टेनोग्राफी केवल एक लेखन कला नहीं, बल्कि करियर का एक शानदार जरिया भी बन चुका है। सरकारी क्षेत्र के साथ-साथ निजी क्षेत्रों में भी इसकी मांग बढ़ती जा रही है। अधिकांश लोग आकर्षक सैलरी और एक अच्छे करियर के लिए स्टेनोग्राफी कोर्स कर रहे हैं और ताकि एक बेहतरीन नौकरी प्राप्त कर सकें।
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कहां है स्टेनोग्राफर की मांग
एसएससी स्टेनोग्राफर, उच्च न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court), संसद और विभिन्न मंत्रालयों में हर साल स्टेनोग्राफर के पदों पर भर्तियां निकालते हैं। सबसे अधिक जिस नौकरी के बारे में सुना जाता है वह है कोर्ट में स्टेनोग्राफर की नौकरी। कोर्ट रूम में न्यायाधीशों द्वारा दिए जाने वाले मौखिक आदेशों और गवाहों के बयानों को तत्काल दर्ज करने के लिए स्टेनोग्राफर बेहद अहम होते हैं।
स्टेनोग्राफर को कितनी मिलती है सैलरी
सरकारी क्षेत्र में ग्रेड सी के लिए लगभग 51,000 से 60,000 रुपये और ग्रेड डी के लिए 36,000 से 43,000 रुपये प्रति माह की सैलरी प्रदान की जाती है। जबकि निजी क्षेत्रों की बात करें तो यहां शुरुआत में 15,000 से 25000 रुपये प्रतिमाह सैलरी प्रदान की जाती है, जबकि अनुभवी उम्मीदवार को 30 हजार से 50 हजार और सीनियर पदों पर 60 हजार से 1 लाख रुपये तक सैलरी प्रदान की जाती है।
