PM Internship: भारत सरकार युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान करने और उन्हें उद्योग की जरूरतों के अनुसार तैयार करने के लिए 'प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना' को लगातार विस्तार दे रही है। हाल ही में इस योजना में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है, जो छात्रों की राह आसान करेगा। इस बदलाव के तहत अब कंपनियां सीधे कॉलेज कैंपस में जाकर इंटर्न का चयन कर सकेंगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य कॉर्पोरेट जगत की भागीदारी बढ़ाना और युवाओं को सीधे उनके शैक्षणिक संस्थानों से पेशेवर दुनिया से जोड़ना है। आइए आपको इसके बारे में विस्तार से बताएं।
कैंपस हायरिंग का नया 'कैंप मोड'
पहले इस योजना के तहत सभी भर्तियां एक केंद्रीकृत पोर्टल के माध्यम से की जाती थी। लेकिन अब इसमें बदलाव करते हुए "कैंप मोड" (Camp Mode) ऑप्शन शुरू किया गया है। इसके जरिए भर्ती करने वाली कंपनियां सीधे विभिन्न संस्थानों का दौरा कर सकती हैं, वहां अपनी कंपनी और इंटर्नशिप की भूमिकाओं के बारे में जानकारी दे सकती हैं और मौके पर ही योग्य उम्मीदवारों का चुनाव किया जा सकता है। इससे न केवल भर्ती प्रक्रिया में तेजी आएगी बल्कि कंपनियों को अपनी जरूरत के अनुसार सही प्रतिभा खोजने में भी आसानी होगी। यह छात्रों और कंपनियों दोने के लिए एक Win-Win स्थिति है।
स्टाइपेंड में भारी बढ़ोतरी
युवाओं को आर्थिक रूप से प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने इंटर्नशिप के स्टाइपेंड में भी बड़ा बदलाव किया है। इस साल मार्च से मासिक स्टाइपेंड को 5,000 रुपये से बढ़ाकर 9,000 कर दिया गया है। इसमें सरकार का बड़ा योगदान है, जहां लगभग 90% राशि सरकारी कोष से दी जाती है और शेष कंपनी द्वारा कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से वहन की जाती है। कुछ सरकारी कंपनियां तो 19,000 प्रति माह तक का स्टाइपेंड भी दे रही हैं। इसके अलावा, शामिल होने पर 6,000 की एकमुश्त सहायता भी प्रदान की जाएगी।
PMIS में कौन हो सकता है शामिल?
PM Internship Scheme की यह योजना मुख्य रूप से उन युवाओं के लिए है जो 18 से 25 वर्ष के हैं और जिनके परिवार की वार्षिक आय 12 लाख से रुपये से कम है। इसमें 10वीं, 12वीं, आईटीआई, डिप्लोमा और स्नातक यानी बीए पास छात्र आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, आईआईटी, आईआईएम जैसे प्रीमियम संस्थानों के स्नातक या सीए जैसे पेशेवर डिग्री धारकों को इस स्पेशल योजना से बाहर रखा गया है ताकि उन युवाओं को अधिक मौका मिले जिन्हें वास्तव में इसकी आवश्यकता है।
योजना का मुख्य लक्ष्य
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में लगभग एक करोड़ युवाओं को भारत की टॉप 2000 कंपनियों में वास्तविक कार्य अनुभव प्रदान करना है। इंटर्नशिप की अवधि 12 महीने की होती है, जिसमें कम से कम 50% समय ऑन-ग्राउंड प्रशिक्षण (On-ground Training) पर केंद्रित होता है। इस नई कैंपस हायरिंग पहल से न केवल कंपनियों को अपनी 'टैलेंट पाइपलाइन' मजबूत करने में मदद मिलेगी, बल्कि युवाओं के लिए भी शिक्षा और रोजगार के बीच का अंतर कम होगा। सरकार की यह कोशिश उद्योग और शिक्षा जगत को एक मंच पर लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
