देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET के पेपर लीक विवादों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों खर्च करने तैयार की गई हाई-सिक्योरिटी पर सेंध लगने से इसे तकनीक को और अधिक अभेद्य बनाने की जरूरत महसूस होने लगी है। हालिया परिस्थितियों को देखते हुए, NTA अब एक ऐसे "डिजिटल किले" के निर्माण की ओर बढ़ रहा है। टेक्नोलॉजी में बदलाव करने की तैयारी की जा रही है, जहां इंसान की जगह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बायोमेट्रिक पहरेदारी करेंगे। आइए जानते हैं NEET Paper Leak और एग्जाम कैंसिल होने के बाद सुरक्षा और कड़ी करने और परीक्षा को पूरी तरह से लीक प्रूफ करने के लिए किया जा सकता है।
बायोमेट्रिक्स से डमी कैंडिडेट्स की एंट्री होगी बैन
पेपर लीक का एक बड़ा हिस्सा 'इम्पर्सनेशन' (दूसरे की जगह परीक्षा देना) से जुड़ा होता है। इसे आसान भाषा में डमी कैंडिडेट्स भी कहा जाता है। इसे रोकने के लिए बायोमेट्रिक्स सबसे अचूक हथियार है। इसके साथ ही आधार-लिंक्ड ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल आज भी किया जाता है। लेकिन इसे तकनीकी रूप से और दुरुस्त किया जाएगा। एग्जाम सेंटर पर एंट्री के वक्त केवल एडमिट कार्ड काफी नहीं रहेगा। छात्र के फिंगरप्रिंट और आईरिस (आंखों की पुतली) का मिलान सीधे आधार डेटाबेस से किया जा सकता है।
इसमें फेशियल रिकग्निशन (Facial Recognition) को जोड़ा जाएगा। यह तकनीक छात्र के चेहरे के आकार, आंखों के बीच की दूरी और नाक के नक्शे का डिजिटल मैप बनाती है। यदि रजिस्ट्रेशन के समय दी गई फोटो और सेंटर पर मौजूद छात्र के चेहरे में 1% का भी अंतर हुआ, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी कर देगा। इस तकनीक से लीक प्रूफ परीक्षा का आयोजन किया जाएगा।
AI बनेगा एनटीए की की तीसरी आंख
अब तक सीसीटीवी कैमरे केवल रिकॉर्डिंग के लिए थे, लेकिन अब AI-पावर्ड कैमरे 'लाइव प्रॉक्टोरिंग' करेंगे। संदिग्ध व्यवहार की पहचान होगी। एआई एल्गोरिदम छात्रों के बैठने के तरीके, उनके सिर हिलाने की फ्रीक्वेंसी और आंखों के मूवमेंट को ट्रैक करेगा। यदि कोई छात्र बार-बार पीछे मुड़ता है या किसी और की कॉपी की तरफ देखता है, तो AI बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के कंट्रोल रूम को सिग्नल भेज देगा। इसके साथ ही ऑटोमेटेड फ्रिस्किंग (Frisking) का प्रयोग किया जा सकता है। इसमें आधुनिक स्कैनर AI की मदद से कपड़ों के नीचे छिपे ब्लूटूथ डिवाइस या माइक्रो-चिप्स को पहचान सकेंगे, जिन्हें अक्सर साधारण मेटल डिटेक्टर नहीं पकड़ पाते।
डिजिटल लॉक्स
पेपर लीक अक्सर ट्रांसपोर्टेशन या सेंटर पर पेपर पहुंचने के बाद होता है। इसे रोकने के लिए NTA 'हाइब्रिड मॉडल' और 'स्मार्ट लॉक्स' का सहारा ले सकता है। ओटीपी-आधारित स्मार्ट ट्रंक में पेपर ले जाने वाले बॉक्स होंगे, जो पहले ही डिजिटल लॉक से सुरक्षित होंगे। ये बॉक्स केवल परीक्षा शुरू होने से 15-30 मिनट पहले ही खुलेंगे, और वो भी तब जब अधिकृत अधिकारी के पास आया यूनिक ओटीपी दर्ज किया जाएगा।
5G जैमर्स का उपयोग
क्योंकि अब हाई-स्पीड इंटरनेट के जमाना है, इसलिए परीक्षा केंद्रों पर 5G जैमर्स लगाए जा रहे हैं ताकि कोई भी छात्र या कर्मचारी इंटरनेट के जरिए पेपर की फोटो बाहर न भेज सके। इससे पेपर लीक को रोका जा सकता है।
इनक्रिप्टेड प्रश्न पत्र का होगा उपयोग
पेपर लीक को रोकने के लिए 'क्वेश्चन पेपर डिलीवरी' के तरीके में आमूलचूल बदलाव की तैयारी है। जस्ट-इन-टाइम प्रिंटिंग प्रक्रिया का प्रयोग किया जा सकता है। पेपर को हफ्तों पहले छापकर स्टोर करने के बजाय, उसे परीक्षा के दिन ही 'एनक्रिप्टेड डिजिटल फाइल' के रूप में भेजा जाएगा। सेंटर पर ही हाई-स्पीड प्रिंटर्स के जरिए इसे आखिरी मिनट पर प्रिंट किया जाएगा। इससे भी पेपर लीक को रोका जा सकता है।
ब्लॉकचेन नेटवर्क के माध्यम से पेपर की हलचल का रिकॉर्ड
यदि पेपर को ब्लॉकचेन नेटवर्क पर रखा जाए, तो उसकी हर एक हलचल का रिकॉर्ड रहेगा। इसे बिना अनुमति के न तो खोला जा सकेगा और न ही इसमें कोई बदलाव संभव होगा। यदि कोई फाइल को एक्सेस करने की कोशिश करेगा, तो उसका 'डिजिटल फुटप्रिंट' तुरंत पकड़ में आ जाएगा।
अडैप्टिव टेस्टिंग से हर छात्र का पेपर होगा अलग
भविष्य में NTA 'कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट' (CBT) को और अधिक सुरक्षित बना सकता है। इसमें AI की मदद से हर छात्र को अलग सेट दिया जा सकता है। सवाल वही होंगे, लेकिन उनका क्रम और विकल्प इतने रैंडम होंगे कि बराबर में बैठे दो छात्र एक-दूसरे से मदद नहीं ले पाएंगे।
