NEET UG Re Exam 2026 : पहले पेपर लीक होने की गंभीर चिंताओं के बाद, सरकार ने 21 जून को होने वाले NEET-UG 2026 री-एग्जाम के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। एक बड़े कदम के तहत, प्रश्न पत्रों को दिल्ली से मदुरै एयरलिफ्ट किया जाएगा और फिर भारतीय सेना के हेलीकॉप्टर से तिरुनेलवेली आर्म्ड रिजर्व ग्राउंड ले जाया जाएगा। हाल ही में वहां पेपर्स की आवाजाही और सुरक्षा की जांच के लिए एक 'ड्राई रन' किया गया था। यह नई योजना दिखाती है कि अधिकारी इस री-एग्जाम को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं; यह परीक्षा देश भर के बड़ी संख्या में छात्रों को प्रभावित करने वाले विवाद के बाद लोगों की कड़ी नजर के बीच आयोजित की जा रही है।
Re-NEET 2026 के लिए मजबूत सुरक्षा उपाय
परीक्षा की प्रक्रिया को और सुरक्षित बनाने के लिए अधिकारियों ने निगरानी और जांच के कई स्तर लागू किए हैं। इनमें AI सर्विलांस के साथ चार-स्तरीय CCTV कवरेज, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, एंट्री से पहले फेशियल रिकग्निशन, कई बार तलाशी और अलग-अलग स्तरों पर कड़ी निगरानी शामिल है। बताया जा रहा है कि पूरी प्रक्रिया पर बहुत सख्ती से नजर रखी जा रही है ताकि उन समस्याओं को दोबारा होने से रोका जा सके जिन्होंने पहले परीक्षा पर भरोसे को कम किया था।
कूरियर की जगह हवाई मार्ग से भेजे जाएंगे पेपर्स
पारंपरिक कूरियर सिस्टम के बजाय हवाई मार्ग से प्रश्न पत्र भेजने का फैसला भी इस बेहतर योजना का हिस्सा है। अधिकारियों का मानना है कि इन उपायों से जोखिम कम होगा और समय की बचत होगी। सरकार के अनुसार, इन कदमों का मकसद ये पक्का करना है कि परीक्षा सुचारू रूप से, सुरक्षित रूप से और बिना किसी छेड़छाड़ की संभावना के आयोजित हो। चूंकि लाखों मेडिकल एस्पिरेंट्स निष्पक्ष परीक्षा पर निर्भर हैं, इसलिए प्रशासन साफ और सख्त कार्रवाई के जरिए भरोसा बहाल करने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि कई लोग इन उपायों को जरूरी मानते हैं, लेकिन विपक्ष के नेताओं ने सवाल उठाया है कि एंट्रेंस एग्जाम के लिए इतने कड़े इंतज़ामों की क्या जरूरत है। आलोचकों का कहना है कि सुरक्षा का ये भारी-भरकम इंतजाम दिखाता है कि पहले एग्जाम सिस्टम की सुरक्षा में चूक हुई थी। कुछ लोगों ने ये भी कहा है कि एक्स्ट्रा स्क्रीनिंग, तलाशी की लंबी प्रक्रिया और एग्जाम का समय 180 मिनट से बढ़ाकर 195 मिनट करने से उन स्टूडेंट्स पर और ज्यादा तनाव बढ़ सकता है जो पहले से ही दबाव में हैं।
क्या बोले शिक्षा मंत्री ?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इन इंतजामों का बचाव करते हुए कहा कि जब मकसद स्टूडेंट्स के हितों की रक्षा करना हो, तो एडवांस्ड सुरक्षा तरीकों का इस्तेमाल करने में कुछ भी असामान्य नहीं है। उन्होंने कहा कि आज की टेक्नोलॉजी वाली दुनिया में कई तरफ से जोखिम हो सकते हैं, इसलिए ज्यादा मजबूत सुरक्षा उपाय सही हैं। सरकार के मुताबिक, उनका ध्यान दिखावे पर नहीं, बल्कि इस बात पर है कि दोबारा होने वाला एग्जाम निष्पक्ष, सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के हो।
