नई दिल्ली: इंडियन प्रीमियर लीग की सबसे सफल टीमों में से एक चेन्नई सुपर किंग्स का एक स्वर्णिम अध्याय टीम के हेड कोच स्टीफन फ्लेमिंग के साथ आपसी सहमति से अलग होने के फैसले के साथ समाप्त हो गया। फ्लेमिंग टीम के साथ साल 2008 में बतौर खिलाड़ी जुड़े थे लेकिन एक साल बाद उन्होंने संन्यास का ऐलान किया और सीएसके के साथ उन्होंने बतौर हेड कोच जुड़े और साल 2026 तक टीम के साथ रहे। इस सफर के दौरान उनकी टीम के कप्तान एमएस धोनी के साथ अच्छी बॉन्डिंग हुई। साल 2016 और 2017 के सीजन के लिए वो पुणे सुपर जायंट्स के कोच रहे। धोनी भी इस टीम से जुड़े थे। सीएसके की टीम के पहले हेड कोच कैपलर वेसल्स थे। वेसल्स पहले सीजन के बाद ही टीम से अलग हो गए थे और फ्लेमिंग ने उनकी जगह संभाली थी।
नए हेड कोच की तलाश में है चेन्नई सुपर किंग्स
ऐसे में 17 साल बाद सीएसके को टीम के लिए एक नए हेड कोच की तलाश है। ऐसे में क्या वेसल्स सीएसके के साथ दोबारा बतौर हेड कोच जुड़ने के इच्छुक हैं? इस सवाल का जवाब वेसल्स ने टाइम्स नाउ न्यूज के साथ बातचीत में किया। उन्होंने टीम के साथ अच्छा वक्त गुजारा लेकिन दो टूक अंदाज में आईपीएल में वापसी से इनकार कर दिया। वेसल्स ने 'स्पोर्ट्स नाउ' से कहा,'सीएसके के साथ बिताया समय अच्छा था, लेकिन वो दिन बीत चुके हैं, इसलिए मेरी तरफ से कोई दिलचस्पी नहीं है। मैं ऑस्ट्रेलिया में अपने मैच रेफरी करियर और बॉक्सिंग व फिटनेस बिजनेस से खुश हूं।'
ऐसा रहा वेसल्स का करियर
दक्षिण अफ़्रीका में जन्मे वेसल्स ने 1982 में ऑस्ट्रेलिया के लिए अपना इंटरनेशनल क्रिकेट डेब्यू किया था। ऑस्ट्रेलिया के लिए तीन साल खेलने के बाद, वेसल्स ने 1985 में इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले लिया। रंगभेद के खत्म होने के बाद दक्षिण अफ्रीका की इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी हुई और वेसल्स की टीम में जगह मिली। साल 1992 में आयोजित वनडे वर्ल्ड कप दक्षिण अफ्रीकी टीम की कप्तानी की और टीम को सेमीफाइनल तक पहुंचाया, जो डकवर्थ लुईस नियम की वजह से विवादित अंदाज में खत्म हुआ और टीम फाइनल में पहुंचने से चूक गई। वेसल्स 1994 तक दक्षिण अफ्रीका के लिए खेलते रहे। उन्होंने 1999 में 42 साल की उम्र में संन्यास ले लिया। क्रिकेट करियर खत्म करने के बाद उन्होंने कोचिंग और कमेंट्री की। संन्यास के कई साल बाद वेसल्स ने लॉन बॉल्स खेला और दक्षिण अफ्रीकी नेशनल चैंपियनशिप में रनर-अप रहे।
