मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने मास्टर ऑफ डेंटल सर्जरी (NEET MDS) के लिए नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट का इंफॉर्मेशन बुलेटिन और काउंसलिंग स्कीम जारी कर दी है। जो उम्मीदवार एंट्रेंस टेस्ट पास कर चुके हैं, वे एमसीसी की आधिकारिक वेबसाइट mcc.nic.in से काउंसलिंग के नियमों, योग्यता की शर्तों और सीट अलॉटमेंट की प्रक्रिया की जानकारी देख सकते हैं। AIQ काउंसलिंग के चार राउंड होंगे: राउंड 1, राउंड 2, राउंड 3 और AIQ स्ट्रे वैकेंसी राउंड। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBE) द्वारा आयोजित NEET MDS में अपनी रैंक के आधार पर ऑल इंडिया कोटा सीटों के लिए क्वालिफाई करने वाले सभी उम्मीदवार काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल होने के योग्य होंगे।
काउंसलिंग की चरण-दर-चरण प्रक्रिया इस प्रकार होगी:
- काउंसलिंग की शुरुआत ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और फीस जमा करने से होगी। इसके बाद उम्मीदवारों को अपनी पसंद के कॉलेज और कोर्स भरने होंगे। उम्मीदवारों की ओर से भरी गई च्वाइस के आधार पर सीट अलॉटमेंट किया जाएगा।
- सीट मिलने के बाद जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करने होंगे।
- MCC ने इस साल डॉक्यूमेंट अपलोड करने की व्यवस्था को भी आसान किया है। उम्मीदवारों को सभी राउंड के लिए एक बार ही जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे, हालांकि नियमों के अनुसार आगे अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।
- इसके बाद जिस उम्मीदवार को सीट आवंटित होगी, उसके लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रिपोर्टिंग या ऑनलाइन डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन करना होगा।
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खास बात यह है कि कोई ऑफलाइन एडमिशन या ऑफलाइन सीट रिजाइन नहीं होगा - सभी एडमिशन और सीट रिजाइन (अगर दिए जाएं) ऑनलाइन मोड से होंगे। ब्रोशर में कहा गया है, "ऑफलाइन मोड में लिया गया कोई भी एडमिशन या रिजाइन स्वीकार नहीं किया जाएगा।"
इस साल क्या बदलाव किए गए हैं?
पिछले साल तक काउंसलिंग के कई चरणों में उम्मीदवारों को सीट मिलने के बाद कॉलेज जाकर एडमिशन की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी। अगर कोई उम्मीदवार अगले राउंड में सीट अपग्रेड कराना चाहता था, तो उसे भी संबंधित संस्थान में जाकर जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होती थीं। इस बार MCC ने सीट अपग्रेडेशन को लेकर प्रक्रिया में बदलाव किया है। अब उम्मीदवारों को उनकी अपग्रेडेशन की इच्छा के आधार पर दो कैटेगरी में रखा जाएगा। इन्हें Freeze और Float कहा गया है।
फ्रीज कैंडिडेट्स (Freeze Candidates) – कोई अपग्रेडेशन नहीं
जो उम्मीदवार अपनी अलॉट की गई सीटों से संतुष्ट हैं और अगले राउंड (यानी राउंड 1 से राउंड 2 या राउंड 2 से राउंड 3) में अपग्रेड नहीं करना चाहते हैं, वे इस कैटेगरी में आएंगे। जिन लोगों को सीट मिली है और वे उसे स्वीकार करके जॉइन करना चाहते हैं, उन्हें जॉइनिंग के लिए उस संस्थान (institute) में खुद जाकर रिपोर्ट करना होगा।
फ्लोट (Float) कैंडिडेट्स – जो अपग्रेड करना चाहते हैं
वे कैंडिडेट्स जिन्हें सीट तो मिल गई है, लेकिन वे अगले राउंड (जैसे राउंड 1 से राउंड 2 या राउंड 2 से राउंड 3) में अपग्रेड करना चाहते हैं, वे इस कैटेगरी में आएंगे। उन्हें अपग्रेडेशन के लिए अपनी सहमति देनी होगी और अलॉटेड संस्थान द्वारा ऑनलाइन डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करने होंगे। (अलॉटेड संस्थान में खुद जाने की जरूरत नहीं है)
उम्मीदवारों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
NEET MDS Counselling में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को MCC की वेबसाइट पर जारी नियमों को ध्यान से पढ़ना चाहिए। खासकर Freeze और Float का विकल्प चुनते समय अपनी पसंद और आगे की योजना को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।
च्वाइस फिलिंग करते समय कॉलेज और कोर्स की पसंद सावधानी से भरें। साथ ही सभी जरूरी दस्तावेज सही तरीके से तैयार रखें, क्योंकि डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन काउंसलिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सबसे जरूरी बात यह है कि उम्मीदवार किसी भी तरह की एडमिशन या रिजाइन प्रक्रिया ऑफलाइन करने से बचें। MCC के अनुसार काउंसलिंग से जुड़ी निर्धारित प्रक्रियाएं ऑनलाइन माध्यम से ही पूरी करनी होंगी।
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