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Choice Filling और Choice Locking में क्या है अंतर? एडमिशन से पहले समझ लें

हर साल NEET UG, JEE, CUET, JoSAA, CSAB, राज्य मेडिकल काउंसलिंग और कई विश्वविद्यालयों की एडमिशन प्रक्रिया के दौरान छात्रों को दो शब्द सबसे ज्यादा सुनने को मिलते हैं- Choice Filling और Choice Locking। आइए दोनों को समझते हैं।

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Choice Filling और Choice Locking में क्या है अंतर (Image - ChatGPT)

हर साल NEET UG, JEE, CUET, JoSAA, CSAB, राज्य मेडिकल काउंसलिंग और कई विश्वविद्यालयों की एडमिशन प्रक्रिया के दौरान छात्रों को दो शब्द सबसे ज्यादा सुनने को मिलते हैं - Choice Filling और Choice Locking। कई छात्र पहली बार काउंसलिंग में हिस्सा लेते हैं, इसलिए उन्हें इन दोनों प्रक्रियाओं को लेकर काफी उलझन रहती है। कई बार इसी भ्रम की वजह से छात्र अपनी पसंद का कॉलेज या कोर्स भी गंवा देते हैं। अगर आप भी किसी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में दाखिले की तैयारी कर रहे हैं, तो Choice Filling और Choice Locking के बीच का अंतर समझना बहुत जरूरी है।

च्वॉइस फिलिंग क्या है? What is Choice Filling

Choice Filling का मतलब है कि छात्र अपनी पसंद के कॉलेज और कोर्स का चयन करता है। काउंसलिंग पोर्टल पर लॉगिन करने के बाद उम्मीदवार अपनी रैंक, पसंद और उपलब्ध सीटों के अनुसार जितने चाहें उतने कॉलेज और कोर्स चुन सकता है। इस दौरान छात्र अपनी पसंद की सूची में बदलाव भी कर सकता है। यानी किसी कॉलेज को ऊपर या नीचे कर सकता है, नया कॉलेज जोड़ सकता है या किसी विकल्प को हटा भी सकता है। जब तक Choice Filling की समय सीमा खत्म नहीं होती, तब तक इसमें बदलाव करना संभव होता है।

सरल शब्दों में कहें तो Choice Filling आपकी पसंद की सूची तैयार करने की प्रक्रिया है।

च्वॉइस लॉकिंग क्या है? What is Choice Locking

Choice Locking वह प्रक्रिया है, जिसमें छात्र अपनी भरी हुई पसंद को अंतिम रूप देता है। जैसे ही उम्मीदवार अपनी चॉइस लॉक करता है, उसके बाद उसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। Choice Lock करने के बाद सिस्टम उसी सूची को फाइनल मानता है और सीट आवंटन (Seat Allotment) भी उसी के आधार पर किया जाता है। अगर किसी काउंसलिंग में Choice Locking अनिवार्य है और छात्र समय रहते अपनी चॉइस लॉक नहीं करता, तो कुछ संस्थाएं उसकी भरी हुई चॉइस को अपने आप लॉक कर देती हैं, जबकि कुछ मामलों में आवेदन अमान्य भी हो सकता है। इसलिए हर काउंसलिंग के नियमों को ध्यान से पढ़ना जरूरी है।

दोनों में सबसे बड़ा अंतर क्या है? Choice Filling and Choice Locking Difference

Choice Filling में आप अपनी पसंद के कॉलेज और कोर्स चुनते हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें बदल भी सकते हैं। वहीं Choice Locking में उन्हीं विकल्पों को अंतिम मंजूरी दी जाती है। एक तरह से Choice Filling ड्राफ्ट तैयार करने जैसा है, जबकि Choice Locking उस ड्राफ्ट को फाइनल करने जैसा होता है।

सीट अलॉटमेंट पर कैसे पड़ता है असर?

सीट अलॉटमेंट पूरी तरह आपकी रैंक, आरक्षण नियम, सीटों की उपलब्धता और आपके द्वारा लॉक की गई पसंद पर निर्भर करता है। अगर आपने अपनी पसंद सोच-समझकर नहीं भरी या गलती से किसी कॉलेज को गलत क्रम में रख दिया, तो सीट भी उसी हिसाब से मिल सकती है। इसलिए हमेशा सबसे पसंदीदा कॉलेज और कोर्स को सबसे ऊपर रखें और पूरी सूची को अच्छी तरह जांचने के बाद ही लॉक करें।

काउंसलिंग के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

काउंसलिंग शुरू होने से पहले अपने पसंदीदा कॉलेजों और कोर्स की सूची तैयार कर लें। सीटों की संख्या, पिछले वर्षों की कटऑफ और अपनी रैंक का भी ध्यान रखें। Choice Lock करने से पहले पूरी सूची एक बार फिर जरूर जांच लें, क्योंकि लॉक होने के बाद उसमें बदलाव का मौका नहीं मिलता।

ये भी जानें

Choice Filling और Choice Locking दोनों ही एडमिशन काउंसलिंग की सबसे अहम प्रक्रियाएं हैं। एक में आप अपनी पसंद दर्ज करते हैं, जबकि दूसरी में उसी पसंद को अंतिम रूप देते हैं। अगर इन दोनों चरणों को सही तरीके से पूरा किया जाए, तो मनचाहा कॉलेज और कोर्स मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसलिए जल्दबाजी करने के बजाय हर विकल्प को ध्यान से समझें और उसके बाद ही अपनी चॉइस फाइनल करें।

Neelaksh Singh
नीलाक्ष सिंहauthor

नीलाक्ष सिंह 2021 से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल से जुड़े हैं और एजुकेशन सेक्शन के लिए कंटेंट लिखते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रिंट मीडिया में इंटर्नशिप की, जहां फील्ड रिपोर्टिंग, स्टूडेंट-इश्यू बेस्ड ग्राउंड स्टोरीज और सटीक न्यूजराइटिंग की बुनियादी समझ हासिल की। प्रिंट के बाद डिजिटल मीडिया में भी वह एजुकेशन बीट पर ही लगातार काम करते रहे हैं। पत्रकारिता में 10 सालों से सक्रिय नीलाक्ष सिंह 12 हजार से अधिक खबरें लिख चुके हैं। वह एग्जाम अपडेट्स, एडमिशन प्रोसेस, करियर गाइडेंस, स्टूडेंट वेलफेयर, बोर्ड रिजल्ट्स और नीतिगत बदलावों पर गहन और बेहद उपयोगी कंटेंट तैयार करते हैं।

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