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IIT पैनल का दावा- OSM पोर्टल की सुरक्षा में थी चूक, बिना जांच और टेस्टिंग के CBSE ने किया लॉन्च

CBSE ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम की तकीनिकी जांच कर रही आईआईटी मद्रास और आईआईटी कानपुर के एक्सपर्ट की टीम ने खुलासा किया है कि इस सिस्टम का पूरी तरह से परीक्षण किए लॉन्च कर किया गया था।

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IIT पैनल का दावा- OSM पोर्टल की सुरक्षा में थी चूक (Photo - AI)

CBSE ओएसएम यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को लेकर एक बड़ा खुलासा किया गया है। एक उच्च स्तरीय आईआईटी (IIT) पैनल के सदस्य द्वारा किए गए इस खुलासा ने सबको हैरान कर दिया है। उन्होंने बताया कि 'ओएसएम पोर्टल' (OSM Portal) को जनता या संबंधित यूजर्स के लिए लॉन्च करने से पहले उसके कार्य करने की तरीके और सुरक्षा खतरों की जांच जिस प्रकार होनी चाहिए थी वैसी नहीं हुई है। यही कारण है कि इसमें इतनी टेक्निकल दिक्कते आई और यह लगातार विवादों के घेरे में बना रहा। एक्सपर्ट के इस बयान ने पोर्टल की विश्वसनीयता और डेटा सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े किए हैं।

बिना तैयारी के जल्दबाजी में उठाया कदम

आईआईटी पैनल ने बताया कि जब भी किसी बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म या सरकारी/अर्ध-सरकारी पोर्टल को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए लाया जाता है, तब कई कड़े टेस्ट किए जाते हैं, ताकि जांच की जा सके की इसमें किसी प्रकार की कोई दिक्कत तो नहीं है या फिर बाद में कोई परेशानी न हो, लेकिन सीबीएसई ओएसएम (ऑन-स्क्रीन मार्किंग) पोर्टल के मामले में ऐसा नहीं हुआ। आईआईटी पैनल के सदस्य के अनुसार, इस पोर्टल को लाइव करने से पहले इसके फंक्शनल और सिक्योरिटी सिस्टम को गहराई से एनालाइजर नहीं किया गया। इसका सीधा मतलब यह है कि सिस्टम में मौजूद तकनीकी कमियों और सुरक्षा से जुड़े खतरों को नजरअंदाज करते हुए इसे इस्तेमाल करे लिए तैनात कर दिया गया था।

फंक्शनलिटी और सुरक्षा जांच का अर्थ क्या है?

बता दें कि जब भी किसी पोर्टल की 'फंक्शनलिटी' की बात कि जाती है, वहां यह देखा जाता है कि क्या पोर्टल बिना किसी रुकावट या क्रैश के सही तरीके से काम कर रहा है या नहीं। वहीं, 'सुरक्षा जांच' में देखा गया जाता है कि हैकर या बाहरी तत्व पोर्टल के डेटा में सेंध न लगा सके। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन दोनों ही मोर्चों पर पोर्टल की टेस्टिंग में भारी लापरवाही देखी गई है।

एक्सपर्ट्स पैनल की चिंता

आईआईटी पैनल के सदस्य का यह खुलासा इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि इसमें टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स की राय शामिल है। पैनल का मानना है कि साइबर हमलों और डेटा लीक के बढ़ते दौर में बिना 'सर्टिफाइड सिक्योरिटी ऑडिट' के किसी भी पोर्टल को चालू करना एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है। यदि समय रहते इन तकनीकी खामियों को दूर नहीं किया गया, तो भविष्य में इसका भारी नुकसान हो सकता है।

आगे का रास्ता और सुधार की जरूरत

आईआईटी पैनल के इस खुलासे के बाद अब यह बेहद जरूरी हो गया है कि ओएसएम पोर्टल के पूरे सिस्टम की समीक्षा नए सिले से की जाए। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि पोर्टल को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए तुरंत 'थ्रेट असेसमेंट' और बग-फिक्सिंग प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहाauthor

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूज रूम में तेजी, सटीकता और गहराई के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत संपादकीय पहचान बनाई है। वर्षा की विशेषज्ञता हाइपर-लोकल खबरों, इवेंट कवरेज और स्टेट पॉलिटिक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी है। अब तक वर्षा कुशवाहा 8,000 से अधिक खबरें लिख चुकी हैं, जिनमें कई अहम लोकल रिपोर्ट्स, एजुकेशन और करियर की खबरें तथा फीचर-आधारित स्टोरीज शामिल हैं।

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