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भोजपुरी, मैथिली से लेकर अवधी तक, जानें Hindi की कितनी बोलियां हैं? UPSC की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए जानना जरूरी

हिंदी भारत की आधिकारिक भाषाओं में से एक है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी कितनी बोलियां है। मैथली, भोजपुरी और अवधि के अलावा भी हिंदी की कई बोलियां है, जिसके बारे में आपको मालूम होना चाहिए।

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Hindi की कितनी बोलियां हैं (Photo - AI)

भारतीय संघ की आधिकारिक भाषा में से एक हिंदी (Hindi) बहुविध (Diverse Form) भाषाई विविधता का एक विशाल प्रतीक मानी जाती है। पश्चिम में हरियाणा और राजस्थान से लेकर पूर्व में बिहार और झारखंड तक, हिंदी पट्टी में कई बोलियों का संगम देखने को मिलता है। UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विशेष रूप से मुख्य परीक्षा के भारतीय भाषा और 'हिंदी साहित्य' की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए हिंदी के उद्भव, विकास और इसकी विभिन्न बोलियों का वर्गीकरण समझना अति आवश्यक है। इसमें उन्हें हिंदी भाषा में बोली जाने वाली बोलियों के बारे में जानना भी जरूरी है। क्योंकि भोजपुरी, मैथिली, ब्रज और अवधी जैसी समृद्ध बोलियों से मिलकर बनी हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की विशाल सांस्कृतिक धरोहर है। आइए आज जानते हैं कि हिंदी में कितनी बोलियां हैं।

भाषा और बोली में अंतर

यहां भाषा और बोली सुनकर आपके मन में यह सवाल जरूरी आया होगा कि यह दोनों एक ही तो होती है, लेकिन नहीं भाषा और बोली एक नहीं होती है। इसलिए हिंदी की बोलियों के बारे में जानने से पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि इन दोनों के बीच अंतर क्या है? भाषाविज्ञान के अनुसार, जब एक बड़े भौगोलिक क्षेत्र में बोली जाने वाली उप-भाषा में व्याकरणिक स्थिरता (Grammatical stability), समृद्ध साहित्य और लिखित रूप आ जाता है, तो वह 'भाषा' कहलाती है। वहीं, 'बोली' (Dialect) किसी विशिष्ट क्षेत्रीय या सीमित दायरे में मौखिक रूप से बोली जाती है।

हिंदी में कितनी बोलियां हैं?

भाषा और बोलियों के बीच अंतर को समझने के बात आपको बता दें कि हिंदी को भाषाविदों ने 5 उप-भाषाओं और उनके अंतर्गत आने वाली 17 मुख्य बोलियों में विभाजित किया है।

हिंदी की 5 उप-भाषाएं और 17 मुख्य बोलियां

भाषाई वर्गीकरण के आधार पर हिंदी की उप-भाषाओं और उनकी प्रमुख बोलियों इस प्रकार है -

उप-भाषा (Sub-language)उद्भव/अपभ्रंश (Origin)प्रमुख बोलियां (Main Dialects)
1. पश्चिमी हिंदीशौरसेनी अपभ्रंशखड़ी बोली (कौरवी), ब्रजभाषा, हरियाणवी (बांगरू), बुंदेली, कन्नौजी
2. पूर्वी हिंदीअर्धमागधी अपभ्रंशअवधी, बघेली, छत्तीसगढ़ी
3. बिहारी हिंदीमागधी अपभ्रंशभोजपुरी, मैथिली, मगही
4. राजस्थानी हिंदीशौरसेनी/गुर्जरी अपभ्रंशमारवाड़ी, जयपुरी (ढूंढाड़ी), मेवाती, मालवी
5. पहाड़ी हिंदीखस/शौरसेनी अपभ्रंशगढ़वाली, कुमाऊंनी, हिमाचली (मंडियाली आदि)

प्रमुख बोलियों का ऐतिहासिक व साहित्यिक महत्व

अवधी: भक्ति काल में संत तुलसीदास ने 'रामचरितमानस' और मलिक मोहम्मद जायसी ने 'पद्मावत' की रचना अवधी में ही की थी। यह बोली मुख्य रूप से मध्य उत्तर प्रदेश अयोध्या, लखनऊ में अधिक बोली जाती है।

ब्रजभाषा: सूरदास, रसखान और मीराबाई के पदों का आधार ब्रजभाषा है। मथुरा, आगरा और अलीगढ़ क्षेत्र में बोली जाने वाली यह बोली मध्यकाल में काव्य भाषा का मुख्य स्तंभ थी।

भोजपुरी व मैथिली: भोजपुरी दुनिया भर में बोली जाने वाली विशाल लोक-संस्कृति की प्रतीक है। वहीं विद्यापति की रचनाओं से अलंकृत 'मैथिली' इतनी समृद्ध है कि इसे संविधान की 8वीं अनुसूची में अलग भाषा का दर्जा प्राप्त है।

खड़ी बोली: आधुनिक समय में हम जिस मानक हिंदी (Standard Hindi) का पठन-पाठन और आधिकारिक तौर पर उपयोग करते हैं, उसका विकास मेरठ और दिल्ली के आसपास बोली जाने वाली 'कौरवी' या 'खड़ी बोली' से हुआ है।

UPSC परीक्षा के लिए क्यों है बोलियों के बारे में जानना

GS Paper 1 (भारतीय संस्कृति) की तैयारी के लिए भारत की भाषाई विविधता और क्षेत्रीय संस्कृतियों के विकास को समझने के लिए बोलियों का ज्ञान आवश्यक है। वहीं हिंदी साहित्य (ऑप्शनल पेपर) पेपर-1 का पहले खंड में हिंदी की बोलियों के व्याकरणिक तथा साहित्यिक विकास पर आधारित प्रश्न आते हैं।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहाauthor

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूज रूम में तेजी, सटीकता और गहराई के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत संपादकीय पहचान बनाई है। वर्षा की विशेषज्ञता हाइपर-लोकल खबरों, इवेंट कवरेज और स्टेट पॉलिटिक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी है। अब तक वर्षा कुशवाहा 8,000 से अधिक खबरें लिख चुकी हैं, जिनमें कई अहम लोकल रिपोर्ट्स, एजुकेशन और करियर की खबरें तथा फीचर-आधारित स्टोरीज शामिल हैं।

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