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How Metal Detector Work: मेटल डिटेक्टर आखिर कैसे जमीन की गहराई में दबी चीजों को करता है पता, यहां समझें Physics

How Metal Detector Work: मेटल डिटेक्टर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन के सिद्धांतों पर काम करता है। ये एक ट्रांसमीटर कॉइल का इस्तेमाल करता है ताकि एक अल्टरनेटिंग मैग्नेटिक फील्ड बनाया जा सके, फिर एक रिसीवर कॉइल के इस्तेमाल से ये मेटल की चीजो में पैदा होने वाले फील्ड का पता लगाता है।

How Metal Detector Works

मेटल डिटेक्टर कैसे काम करता है

Metal Detector How it Works in Hindi: मेटल डिटेक्टर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन के सिद्धांतों पर काम करता है। ये एक ट्रांसमीटर कॉइल का इस्तेमाल करता है ताकि एक अल्टरनेटिंग मैग्नेटिक फील्ड बनाया जा सके, फिर एक रिसीवर कॉइल के इस्तेमाल से ये मेटल की चीजो में पैदा होने वाले फील्ड का पता लगाता है। इसमें फिजिक्स यह है कि एक मेटैलिक चीज के अंदर EDDY Current पैदा होता है, जो फिर अपना खुद का मैग्नेटिक फील्ड बनाता है जो डिटेक्टर की कॉइल को संदेश भेजता है।

मेटल-डिटेक्टर एक मशीन है, ये एक टेक्नोलॉजी है, जो हमारी जिंदगी का एक बहुत बड़ा हिस्सा बन चुकी है। इसका इस्तेमाल आराम से लेकर काम और सुरक्षा तक कई कामों में किया जाता है।

कहां और क्यों है जरूरत, How Metal Detector Detect

एयरपोर्ट, ऑफिस की बिल्डिंग, स्कूल, सरकारी एजेंसियों और जेलों में लगे डिटेक्टर यह पक्का करने में मदद करते हैं कि कोई भी परिसर में हथियार न लाए। ये डिटेक्टर अलग अलग होते हैं, जैसे बारूद या हथियार का पता लगाने के लिए अलग, जमीन में दबे मेटल का पता लगाने के लिए अलग, सोने या दूसरी धातु का पता लगाने के लिए अलग अलग तरह से इन्हें डिजाइन किया जाता है। हालांकि इस लेख में हम मेटल डिटेक्टर की बात कर रहे हैं।

मेटल डिटेक्टर काम कैसे करता है? How Metal Detector Works Physics

मेटल डिटेक्टर विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) के सिद्धांत पर कार्य करता है। इनमें लगी कॉइल (कुंडली आकार की) जमीन या वस्तु की ओर एक मैग्नेटिक फील्ड या वेव या तरंग भेजती है। ये तंरग जमीन में दबी धातु की एनर्जी से टकराती है, और वापस डिटेक्टर को संदेश मिलता है, जिससे कंफर्म हो जाता है कि वहां मेटल है।

आसान भाषा में

मेटल डिटेक्टर में एक खास कॉइल लगा होता है। ये करंट प्रवाहित कर एक चुंबकीय क्षेत्र बनाता है। जब कोई धातु इस क्षेत्र में आती है, तो वह अपने चुंबकीय क्षेत्र के साथ प्रतिक्रिया करती है, जिससे डिटेक्टर में लगे रिसीवर को सिग्नल मिलता है और बीप होता है।

बीप या विज़ुअल संकेत, Metal Detector Machine

जब वापस मेटल डिटेक्टर को संदेश मिलता है, तो ये बीप की आवाज में सुनाई देती है। अलग अलग चीजों को डिटेक्ट करने के लिए अलग अलग तकनीकी का इस्तेमाल किया जाता है।

नीलाक्ष सिंह
नीलाक्ष सिंह author

नीलाक्ष सिंह 2021 से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल से जुड़े हैं और एजुकेशन सेक्शन के लिए कंटेंट लिखते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई क... और देखें

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