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भारत का सबसे निचला हिस्सा कौन सा है?, समुद्र तल से इतने मीटर नीचे बसा

Bharat ka sabse nichla Hissa- lowest place in India: भारत अपनी प्राकृतिक विविधता के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां ऊंचे पहाड़, घने जंगल, नदियां, झीलें, रेगिस्तान और समुद्र—सब कुछ एक ही देश में देखने को मिलता है। जहां एक ओर हिमालय की ऊंचाइयों पर स्थित कंचनजंगा भारत का सबसे ऊंचा स्थान है, वहीं दूसरी ओर एक ऐसा क्षेत्र भी है जो समुद्र तल से नीचे बसा हुआ है—और यही इसे बेहद खास बनाता है।

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भारत का सबसे निचला हिस्सा कौन सा है?

Bharat ka sabse nichla Hissa- lowest place in India: भारत अपनी प्राकृतिक विविधता के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां ऊंचे पहाड़, घने जंगल, नदियां, झीलें, रेगिस्तान और समुद्र—सब कुछ एक ही देश में देखने को मिलता है। जहां एक ओर हिमालय की ऊंचाइयों पर स्थित कंचनजंगा भारत का सबसे ऊंचा स्थान है, वहीं दूसरी ओर एक ऐसा क्षेत्र भी है जो समुद्र तल से नीचे बसा हुआ है-और यही इसे बेहद खास बनाता है।

भारत का सबसे निचला स्थान: कुट्टनाड

कुट्टनाड भारत का सबसे निचला क्षेत्र माना जाता है। यह केरल राज्य में स्थित एक अनोखा इलाका है, जहां बड़े-बड़े धान के खेत समुद्र तल से लगभग 1 से 3 मीटर नीचे तक फैले हुए हैं। दुनिया में बहुत कम जगहें हैं जहां इतनी बड़ी मात्रा में समुद्र तल से नीचे खेती की जाती है।

चार नदियों का वरदान

कुट्टनाड एक नदी डेल्टा क्षेत्र है, जिसे चार प्रमुख नदियां-पंबा, मीनाचिल, अचनकोविल और मणिमाला-पानी देती हैं। ये सभी नदियां मिलकर वेम्बनाड झील में जाकर गिरती हैं। यही कारण है कि यह क्षेत्र बेहद उपजाऊ और हरा-भरा रहता है।

“केरल का चावल का कटोरा”

कुट्टनाड को “Rice Bowl of Kerala” यानी “केरल का चावल का कटोरा” कहा जाता है। यहां की खेती इतनी समृद्ध है कि यह पूरे राज्य के लिए अनाज का बड़ा स्रोत है।

भारत का “नीदरलैंड”

अपनी भौगोलिक बनावट और जल प्रबंधन प्रणाली के कारण कुट्टनाड को “भारत का नीदरलैंड” भी कहा जाता है। जैसे नीदरलैंड में समुद्र तल से नीचे जमीन को बचाने के लिए बांध और नहरें बनाई जाती हैं, वैसे ही यहां भी पानी को नियंत्रित करने के लिए खास सिस्टम विकसित किया गया है।

समुद्र तल से नीचे खेती-एक अनोखी उपलब्धि

कुट्टनाड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां खेती समुद्र तल से नीचे होती है। यह एक दुर्लभ उदाहरण है, जिसे Food and Agriculture Organization (FAO) द्वारा भी मान्यता दी गई है। यहां के किसान “बायोसेलाइन खेती” तकनीक अपनाते हैं, जिससे खारे पानी और मिट्टी को नियंत्रित करके फसल उगाई जाती है।

क्यों है कुट्टनाड खास?

यहां समुद्र तल से नीचे खेती की जाती है, यहां अनोखा जल प्रबंधन सिस्टम है, यहां चार नदियों से सिंचित उपजाऊ भूमि देखने को मिलती है और प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली में भी ये बहुत आगे है।

Neelaksh Singh
नीलाक्ष सिंहauthor

नीलाक्ष सिंह 2021 से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल से जुड़े हैं और एजुकेशन सेक्शन के लिए कंटेंट लिखते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रिंट मीडिया में इंटर्नशिप की, जहां फील्ड रिपोर्टिंग, स्टूडेंट-इश्यू बेस्ड ग्राउंड स्टोरीज और सटीक न्यूजराइटिंग की बुनियादी समझ हासिल की। प्रिंट के बाद डिजिटल मीडिया में भी वह एजुकेशन बीट पर ही लगातार काम करते रहे हैं। पत्रकारिता में 10 सालों से सक्रिय नीलाक्ष सिंह 12 हजार से अधिक खबरें लिख चुके हैं। वह एग्जाम अपडेट्स, एडमिशन प्रोसेस, करियर गाइडेंस, स्टूडेंट वेलफेयर, बोर्ड रिजल्ट्स और नीतिगत बदलावों पर गहन और बेहद उपयोगी कंटेंट तैयार करते हैं।

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