भारत में 28 राज्य व 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं, इनमें से कोई पूर्व में, तो कोई पश्चिम में, कोई उत्तर में तो कोई दक्षिण दिशा की तरफ हैं। जो राज्य जिस दिशा में है, उसे वैसी ही भूगौलिक पहचान मिली है। लेकिन केवल एक ऐसा प्रदेश है, जो पूर्व में होकर भी पश्चिम बंगाल कहलाता है।
भारत के पूर्व में स्थित राज्यों को पूर्वोत्तर राज्य कहा जाता है, भारत के पूर्वी हिस्से में "पश्चिम बंगाल" भी आता है। लेकिन ऐसा क्या कारण है जो इसे दिशा के विपरीत नाम मिला? आइये जानें
पश्चिम बंगाल को पश्चिम बंगाल कहने के पीछे का कारण भूगोलिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और राजनीतिक है। यह नाम ब्रिटिश शासन के अंत में बंगाल के विभाजन से जुड़ा है।
पश्चिम बंगाल नाम के पीछे 1947 के विभाजन का बड़ा महत्व है। ब्रिटिश भारत के बंगाल प्रांत को धार्मिक आधार पर दो हिस्सों में बांटा गया: पूर्वी हिस्सा और पश्चिमी हिस्सा।
इस क्षेत्र में मुस्लिम बहुल लोग थे, यानी मुस्लिमों की संख्या ज्यादा थी, और ये पूर्वी पाकिस्तान में शामिल हो गया, जो 1971 में बांग्लादेश नाम से एक अलग और स्वतंत्र देश बना।
इस क्षेत्र का एक हिस्सा हिंदू बहुल था, यानी इधर हिंदू धर्म को मानने वाले लोगों की संख्या ज्यादा थी, इसलिए ये भारत का हिस्सा बना रहा। अब चूंकि एक क्षेत्र को दो भागों (पूर्वी बंगाल और पश्चिम बंगाल) में बाटा गया, ऐसे में एक को पूर्वी बंगाल जाना गया, और दूसरे को पश्चिम बंगाल।
लेकिन 1971 में भारत पाक युद्ध के दौरान भारत ने 'पूर्वी पाकिस्तान' को पाकिस्तान से आजाद कराया, जिसके बाद पूर्वी पाकिस्तान बन गया बांग्लादेश।
बंगाल का जो हिस्सा भारत में शामिल हुआ वो कहलाया पश्चिमी बंगाल। बता दें ये देश का चौथा सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य है और यहां हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी तक अलग-अलग तरह का भूगोल देखने को मिलता है। Also Read: पूर्व में होकर भी क्यों इसे कहते हैं पश्चिम बंगाल, पढ़ें दिलचस्प किस्सा