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सीलमपुर मर्डर केस: 'लेडी डॉन' जिकरा से पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा; जानिए क्यों हुई कुणाल की हत्या

Crime News: सीलमपुर हत्याकांड में 'लेडी डॉन' जिकरा को पुलिस ने एक दिन पहले ही गिरफ्तार किया, साथ ही तीन को हिरासत में लिया गया। अब इस मर्डर केस में बड़ा खुलासा हुआ है। लेडी डॉन ने पुलिसिया पूछताछ में बताया है कि आखिर इस हत्याकांड को क्यों अंजाम दिया गया। आपको सारा विवाद बताते हैं।

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'लेडी डॉन' जिकरा से पूछताछ में सामने आई बड़ी बातें।

Seelampur Murder Case: सीलमपुर मर्डर केस में बड़ा अपडेट सामने आया है। लेडी डॉन जिकरा से पुलिस की पूछताछ में कई खुलासे हुए हैं। कुणाल हत्याकांड में अभी एक ही गिरफ्तारी हुई है और वो लेडी डॉन जिकरा है। जिकरा के कजन मौसी के लड़के साहिल और दिलशाद जिन्होंने चाकुओं से हमला किया, उनकी तलाश जारी है। जिकरा मौके पर आसपास ही मौजूद थी।

कुणाल हत्याकांड को क्यों दिया गया अंजाम, जानिए वजह

हत्याकांड के पीछे की वजह जिकरा ने बताई कि पिछले साल नवंबर में इसके कजन साहिल पर जानलेवा हमला हुआ था, जिसमें लाला और शंभु नाम के लड़के शामिल थे जो कुणाल के दोस्त थे। जिकरा के मुताबिक इस हमले में कुणाल भी मौजूद था, लेकिन उंस समय वो नाबालिग था और उसका नाम एफआईआर में नहीं आया था। कुणाल की हत्या उसी हमले का रिवेंज है।

लेडी डॉन का कहना है कि साहिल पर जब हमला हुआ था उसमे वो बच गया था हत्या की कोशिश का केस दर्ज हुआ था। जिकरा और साहिल को लगता है वो हमला कुणाल ने कराया था उसी का बदला लेने के लिए कुणाल की हत्या की गई। साहिल और दिलशाद की तलाश की जा रही है।

एक दिन पहले ही गिरफ्तारी हुई थी 'लेडी डॉन' जिकरा

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सीलमपुर इलाके में 17 वर्षीय एक लड़के की चाकू घोंपकर हत्या किए जाने की घटना के बाद पुलिस ने इस मामले में एक महिला को गिरफ्तार किया है और तीन लोगों को हिरासत में लिया है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि उक्त महिला जेल में बंद गैंगस्टर हाशिम बाबा की पत्नी के लिए बाउंसर के रूप में काम करती थी। पुलिस ने बताया कि न्यू सीलमपुर में बृहस्पतिवार शाम साढ़े सात बजे कुणाल की उसके घर से कुछ ही मीटर की दूरी पर हत्या कर दी गई थी। कुणाल पर उस समय हमला किया गया था जब वह अपने बीमार पिता के लिए चाय बनाने के वास्ते दूध खरीदने के लिए जा रहा था।

अधिकारियों ने बताया कि कुणाल को निकट स्थित जेपीसी अस्पताल ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। कुणाल की हत्या की खबर फैलते ही इलाके में तनाव व्याप्त हो गया और सैकड़ों स्थानीय लोगों तथा हिंदू संगठनों के कई सदस्यों ने शुक्रवार को प्रदर्शन किया तथा इस वारदात में शामिल अपराधियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मृतक के परिजनों ने दावा किया कि जिस वक्त कुणाल की हत्या की गई, उस समय वहां पर जिकरा नामक महिला मौजूद थी, जिसे इलाके में ‘लेडी डॉन’ के रूप में जाना जाता है।

पूछताछ के लिए हिरासत में साहिल खान और रिहान मिर्जा

पुलिस ने एक दिन पहले ही बताया कि जिकरा को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि उसके चचेरे भाई साहिल खान और रिहान मिर्जा को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने हिरासत में लिए गए तीसरे व्यक्ति की पहचान साझा नहीं की है। जिकरा को सोशल मीडिया मंच पर पिस्तौल के साथ वीडियो साझा करने के बाद शस्त्र अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था। जिकरा जमानत पर बाहर आने के बाद कुणाल के घर के पास किराए के मकान में रह रही थी। संयुक्त पुलिस आयुक्त (पूर्वी क्षेत्र) पुष्पेन्द्र कुमार ने कहा, 'मामले को सुलझाने के लिए दस टीम बनाई गई हैं और वे सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही हैं। हमने पूछताछ के लिए कुछ लोगों को हिरासत में लिया है। जल्द ही मामले को सुलझा लिया जाएगा।'

गैंगस्टर हाशिम बाबा की पत्नी जोया की बाउंसर थी लेडी डॉन

जिकरा जेल में बंद गैंगस्टर हाशिम बाबा की पत्नी जोया के लिए बाउंसर के रूप में काम करती थी। सूत्रों ने बताया कि वह (जिकरा) जोया के जेल जाने से पहले कथित तौर पर उसके साथ रह रही थी। ऐसा माना जा रहा है कि जोया की गिरफ्तारी के बाद जिकरा अपना गिरोह बनाने की कोशिश कर रही थी। मृतक के परिजनों ने दावा किया कि कुछ समय पहले कुणाल के समुदाय के कुछ सदस्यों ने जिकरा के चचेरे भाई साहिल पर कथित तौर पर हमला किया था, जिसके बाद पुलिस ने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया था।

पहले ही सूत्रों ने बताया था कि साहिल पर हुए हमले का बदला लेने के लिए ही कुणाल की हत्या की गई हो। पुलिस के सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने शाम के समय कुणाल की हत्या करने से पहले बृहस्पतिवार सुबह उसे चेतावनी दी थी। इस संबंध में एक सूत्र ने कहा, 'आरोपियों ने क्षेत्र स्थित शिव-पार्वती मंदिर के सामने कुणाल को पकड़ लिया। दो लोगों ने उस पर चाकू से वार किया, जबकि दो अन्य लोग देख रहे थे।' उन्होंने बताया कि कुणाल किसी तरह घटनास्थल से चंद कदम की दूरी पर स्थित एक क्लिनिक में पहुंचा, जहां चिकित्सक ने उसके घाव पर रुई लगाकर उसकी जान बचाने की कोशिश की। सूत्र ने कहा, 'इसके बाद चिकित्सक ने उसे ई-रिक्शा से नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया था।'

अपना खुद का गिरोह बनाना चाहती थी 'लेडी डॉन' जिकरा

कुणाल के पिता राजदीप सिंह ने संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहा, 'मैं पिछले तीन महीनों से बीमार था और हाल ही में मेरी सर्जरी हुई थी। मैं कल ही अस्पताल से घर आया था और मैंने अपने बेटे से चाय बनाने के लिए दूध लाने को कहा था, लेकिन अपराधियों ने मेरे बेटे को सड़क पर ही मार डाला।' उन्होंने कहा, 'मैं अपने बेटे के लिए न्याय चाहता हूं। पुलिस हमें सिर्फ आश्वासन दे रही है, लेकिन अभी तक कुछ नहीं किया गया है।' मृतक की मां परवीन ने पत्रकारों से कहा, 'जिकरा इलाके में पिस्तौल लेकर घूमती रहती थी। उसके चचेरे भाई साहिल के साथ एक घटना हुई थी, लेकिन मेरा बेटा इसमें शामिल नहीं था। फिर भी उन्होंने उसे मार डाला। उन्होंने उस पर कई बार बेरहमी से चाकू से वार किया।'

सूत्र ने कहा, 'जिकरा अपना खुद का गिरोह बनाना चाहती थी। वह जोया के जरिए हाशिम बाबा के करीब जाना चाहती थी और उसके मादक पदार्थ के धंधे में भी शामिल होना चाहती थी। हालांकि, जोया को गिरफ्तार किए जाने के बाद उसे झटका लगा।' जिकरा ने सोशल मीडिया पर ऐसे बहुत सारे वीडियो साझा किए हैं, जिसमें वह हथियार लहराती हुई नजर आ रही है। उसके सोशल मीडिया पर 15,000 से ज़्यादा ‘फ़ॉलोअर्स’ हैं। सूत्र ने बताया कि जिकरा कथित तौर पर एक गिरोह का नेतृत्व करती थी, जिसमें 10-12 युवक शामिल हैं और अब कुणाल की हत्या के सिलसिले में इनमें से कुछ की भूमिका का पता चल रहा है।

इस बीच, स्थानीय लोगों और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) सहित कुछ हिंदू संगठनों ने इस घटना के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिसके बाद इलाके में स्थानीय पुलिस और त्वरित कार्य बल (आरएएफ) को तैनात कर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। इलाके में 'हिंदू पलायन कर रहे हैं' और 'कृपया मदद करें, योगी जी' लिखे पोस्टर चस्पा किए गए। हालांकि, पुलिस ने बाद में इन्हें हटा दिया।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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