मानहानि मामलों को लेकर लॉ कमीशन ने एक बड़ी सिफारिश की है। लॉ कमीशन ने कहा है कि आपराधिक मानहानि को एक अपराध के रूप में आपराधिक कानूनों तो बरकरार रखा जाना चाहिए।
क्या कहा विधि आयोग ने
विधि आयोग ने सिफारिश की है कि आपराधिक मानहानि को भारत में एक अपराध के रूप में आपराधिक कानूनों में बरकरार रखा जाना चाहिए। आपराधिक मानहानि कानून पर अपनी रिपोर्ट में, आयोग ने कहा कि इस बात को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है कि प्रतिष्ठा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आता है, और जीवन तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का एक पहलू होने के नाते, इसे मानहानिकारक भाषण और आरोपों के खिलाफ ‘‘पर्याप्त रूप से संरक्षित’’ करने की आवश्यकता है।
'प्रतिष्ठा सेकंड में हो जाती है नष्ट'
लॉ कमीशन ने आगे कहा कि प्रतिष्ठा एक ऐसी चीज है, जिसे देखा नहीं जा सकता, केवल अर्जित किया जा सकता है। यह एक ऐसी संपत्ति है, जो पूरे जीवनकाल में बनती है और कुछ सेकंड में नष्ट हो जाती है। विधि आयोग ने कहा- "आपराधिक मानहानि कानून से संबंधित संपूर्ण न्यायदर्शन का सार किसी की प्रतिष्ठा और उसके पहलुओं की रक्षा करना है।"
एक और सिफारिश की संभावना
एक अन्य मुद्दे पर विधि आयोग द्वारा यह सिफारिश किए जाने की संभावना है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों को तभी जमानत मिले, जब वे उनके द्वारा किए नुकसान के बराबर धनराशि जमा करा दें। ऐसा पता चला है कि विधि आयोग ‘लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम’ में बदलाव की सिफारिश करते हुए सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों के लिए कड़े जमानत प्रावधानों का प्रस्ताव रख सकता है।
