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Fake Job Scam: फर्जी सरकारी नौकरी घोटाले पर ED की बड़ी कार्रवाई, 12 शहरों में 16 ठिकानों पर छापेमारी

Fake Government Job Scam: ED की छापेमारी के दौरान जमीन की रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेज, बैंक खातों का ब्योरा, हाथ से लिखे नोट्स, चेक, लोन एग्रीमेंट, निवेश से जुड़े कागजात, फर्जी नौकरी के विज्ञापन और डिजिटल सबूत बरामद किए गए हैं।

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प्रतीकात्मक फोटो (istock)

Fake Government Job Scam: फर्जी सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे बड़े घोटाले के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED के पटना ज़ोनल ऑफिस ने 08 जनवरी 2026 को देश के अलग-अलग हिस्सों में 16 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई।

यह छापेमारी मुजफ्फरपुर, मोतिहारी, कोलकाता, एर्नाकुलम, पंडालम, अडूर, कोडूर, चेन्नई, राजकोट, गोरखपुर, प्रयागराज और लखनऊ में की गई। कार्रवाई एक फर्जी सरकारी नौकरी रैकेट से जुड़े मामले में हुई, जो युवाओं को नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे पैसे ठग रहा था।

ED की छापेमारी के दौरान जमीन की रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेज, बैंक खातों का ब्योरा, हाथ से लिखे नोट्स, चेक, लोन एग्रीमेंट, निवेश से जुड़े कागजात, फर्जी नौकरी के विज्ञापन और डिजिटल सबूत बरामद किए गए हैं। इन सभी को जांच के लिए जब्त कर लिया गया है।

सोनपुर जीआरपी थाना में दर्ज एक FIR के आधार पर शुरू की थी

ED ने यह जांच सोनपुर जीआरपी थाना में दर्ज एक FIR के आधार पर शुरू की थी। FIR BNS 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत दीपक कुमार तिवारी और सक्षम श्रीवास्तव के खिलाफ दर्ज की गई थी। दोनों आरोपी बिहार के सोनपुर रेलवे स्टेशन पर नौकरी की तलाश में आए युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने का दावा कर रहे थे।

'दोनों आरोपी एक संगठित गिरोह का हिस्सा थे'

जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी एक संगठित गिरोह का हिस्सा थे, जो खास तौर पर भारतीय रेलवे और अन्य सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों को निशाना बनाता था। गिरोह RPF, TTE और टेक्नीशियन जैसे पदों के लिए फर्जी जॉइनिंग लेटर जारी करता था।आरोपियों ने नौकरी को असली दिखाने के लिए फर्जी ट्रेनिंग सेंटर, नकली पहचान पत्र और सरकारी ई-मेल जैसी दिखने वाली फर्जी ई-मेल आईडी भी बनाई थीं। ये ई-मेल आईडी मंत्रालय से जुड़ी होने का भ्रम पैदा करती थीं, जैसे—gm.eer.rail.net.gov.in@gmail.com।

गिरोह उम्मीदवारों का भरोसा जीतने के लिए 2 से 3 महीने तक सैलरी भी भेजता था

इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह उम्मीदवारों का भरोसा जीतने के लिए 2 से 3 महीने तक सैलरी भी भेजता था। यह पैसा “M/s Treasury Office RO”, “M/s FCI RO”, “RRB” और “By Salary” जैसे सरकारी नामों से मिलते-जुलते फर्जी खातों के जरिए दिया जाता था। ED के मुताबिक, इस पूरे मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से भी जांच की जा रही है और घोटाले से जुड़े अन्य आरोपियों व संपत्तियों की तलाश जारी है।

Anuj Mishra
अनुज मिश्राauthor

अनुज मिश्रा भारत के अग्रणी क्राइम और इन्वेस्टिगेटिव पत्रकारों में से एक हैं। वह वर्तमान में टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। पिछले करीब दो दशकों से अनुज मिश्रा ने अपराध, आंतरिक सुरक्षा और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की गहन रिपोर्टिंग और संपादकीय नेतृत्व किया है। उन्होंने सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग, एनआईए और खुफिया एजेंसियों से संबंधित बड़ी और संवेदनशील खबरों को नज़दीकी से कवर किया है। अनुज मिश्रा की सबसे बड़ी ताक़त उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग है। हर बड़ी और अहम खबर में वह ग्राउंड ज़ीरो पर मौजूद रहकर घटनाओं की प्रत्यक्ष कवरेज करते रहे हैं। यही कारण है कि उनकी रिपोर्टिंग में जमीनी सच्चाई और तथ्य हमेशा साफ़ झलकते हैं। टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ने से पहले अनुज मिश्रा देश के कई बड़े टेलीविज़न न्यूज़ चैनलों के साथ काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने अपनी पत्रकारिता और एडिटोरियल स्किल्स से अलग पहचान बनाई। अनुज ने न केवल देश-विदेश की बड़ी खबरों को जनता तक पहुँचाया है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति और सत्ता गलियारों से जुड़े घटनाक्रमों पर भी पैनी नज़र रखी है। उनकी पत्रकारिता शैली तथ्यपरक, इन्वेस्टिगेटिव और जमीनी हकीकत पर आधारित मानी जाती है। उन्होंने आतंकवाद, संगठित अपराध, ड्रग्स सिंडिकेट, हाई-प्रोफाइल जांच और सियासी घटनाक्रमों पर कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स की हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।

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