स्पाइसजेट और अजय सिंह की 144 करोड़ रुपए जमा करने के लिए और समय देने की मांग दिल्ली हाईकोर्ट ने नहीं मानी। कोर्ट ने नई अर्जी पर न तो नोटिस जारी किया और न ही जमा रकम के लिए कोई अतिरिक्त समय दिया।
दिल्ली हाईकोर्ट में आज स्पाइसजेट लिमिटेड और उसके चेयरमैन अजय सिंह की ओर से नई अर्जी दाखिल कर ₹50 करोड़ और ₹94 करोड़, यानी कुल ₹144 करोड़ जमा करने के लिए और समय मांगा गया था। यह रकम कोर्ट के पहले के आदेशों के तहत आर्बिट्रल अवॉर्ड के मुताबिक जमा की जानी है। जिसपर सुनवाई करते हुए जस्टिस सुब्रह्मण्यम प्रसाद की अध्यक्षता वाली बेंच ने अर्जी पर फिलहाल कोई राहत नहीं दी। कोर्ट ने काल एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड और कलानिथि मारन को कानून के तहत उपलब्ध कार्रवाई करने की छूट दी है। कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसी कोई कार्रवाई की जाती है तो वह उस पर उचित फैसला लेगा। इसके बाद कोर्ट ने स्पाइसजेट की इस नई अर्जी को सितंबर 2026 में पहले से लंबित अर्जी के साथ लगाने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट भी दे चुका है आदेश
यह पूरा मामला उस आर्बिट्रल अवॉर्ड से जुड़ा है, जो काल एयरवेज और कलानिथि मारन के पक्ष में आया था। स्पाइसजेट और अजय सिंह ने इस अवॉर्ड को चुनौती देते हुए आर्बिट्रेशन एंड कॉन्सिलिएशन एक्ट की धारा 34 के तहत याचिका दाखिल कर रखी है। वहीं दूसरी तरफ अवॉर्ड की रकम की वसूली के लिए एग्जीक्यूशन प्रोसीडिंग भी चल रही है। इस मामले में 19 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस निर्देश में दखल देने से इनकार कर दिया था, जिसमें आर्बिट्रल रकम जमा करने को कहा गया था।
हाईकोर्ट ने जुलाई में क्या कहा था?
दिल्ली हाईकोर्ट ने 13 जुलाई 2026 के अपने आदेश में स्पाइसजेट और अजय सिंह को अपनी bona fide यानी कोर्ट के निर्देशों का पालन करने की गंभीरता दिखाने के लिए 45 दिनों के भीतर ₹50 करोड़ जमा करने का निर्देश दिया था। बाकी रकम जमा करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया था। साथ ही कोर्ट ने आर्बिट्रल अवॉर्ड को चुनौती देने वाली धारा 34 की याचिका पर कार्यवाही को नवंबर 2026 तक टाल दिया था।
काल एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड और कलानिथि मारन की ओर से सीनियर एडवोकेट जयंत मेहता, करंजवाला एंड कंपनी की सीनियर पार्टनर नंदिनी गोरे, एसोसिएट पार्टनर सोनिया निगम, एडवोकेट अकरश शर्मा और एडवोकेट वेदांत चौधरी पेश हुए। वहीं, स्पाइसजेट लिमिटेड और अजय सिंह की ओर से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी और एडवोकेट के.आर. ससीप्रभु ने पैरवी की।
