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मिल में चीनी 30% सस्ती हुई, लेकिन दुकानों पर ₹70/किलो खरीदने को मजबूर लोग, आखिर क्यों?

त्योहारों का सीजन शुरू हो गय है। इस बीच महंगी चीनी लोगों को बजट बढ़ाने का काम कर रही है। सरकार की लाख कोशिश के बावजूद चीनी की खुदरा कीमत कम नहीं हो रही है।

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चीनी की कीमत

रिटेल मार्केट में चीनी की कीमत कम होने का नाम नहीं ले रही है। दुकानों से लेकर क्विक कॉमर्स पर चीनी की कीमत 70 रुपये प्रति किलो के पार बनी हुई है। वहीं, सरकार के विभिन्न उपायों से सोमवार को मिल पर चीनी की कीमतें लगभग 30 प्रतिशत गिरकर 47 रुपये प्रति किलोग्राम रह गईं। मिल पर चीनी की कीमतें 18 अगस्त को 67 रुपये प्रति किलोग्राम के उच्चतम स्तर पर थीं। आखिर क्यों मिल पर चीनी सस्ती होने के बावजूद दुकानों पर लोगों को राहत नहीं मिल रही है? अगर आप भी इस सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं तो चलिए बताते हैं।

इसलिए रिटेल मार्केट में राहत नहीं

उद्योग सूत्रों का कहना है कि जहां मिल दरों में गिरावट का असर थोक बाजार में लगभग तुरंत दिखता है, वहीं खुदरा कीमतों में बदलाव में समय लगता है। सूत्रों ने बताया कि जिन खुदरा विक्रेताओं ने पहले ऊंची दरों पर स्टॉक खरीदा था, वे नुकसान में इसे बेचना नहीं चाहते और जब तक उनका मौजूदा स्टॉक खत्म नहीं हो जाता, वे उसे पुरानी दरों पर ही बेचते रहेंगे। आमतौर पर एक खुदरा विक्रेता के पास चीनी के 10-15 बैग होते हैं, जिनमें से हर एक का वजन 50 किलोग्राम होता है। जब कम दर पर नया स्टॉक खरीदा जाएगा, तभी खुदरा कीमतों में उसी हिसाब से बदलाव होगा।

10 दिन का समय लगता है बदलाव में

चीनी उद्योग के एक सूत्र ने कहा कि खुदरा कीमतों में बदलाव दिखने में कम से कम 10 दिन लगते हैं। चीनी की मिल कीमतों में गिरावट सरकार के उस फैसले के बाद आई है जिसमें उन मिलों को निर्यात के लिए रिफाइंड की गई चीनी को घरेलू बाजार में बेचने की इजाजत दी गई है। अनुमान है कि अगले दो माह में लगभग 3-3.5 लाख टन रिफाइंड चीनी घरेलू बाजार में आएगी।

इसके अलावा, बड़े पैमाने पर चीनी इस्तेमाल करने वाले (थोक उपभोक्ता) जिन्होंने 15 दिन से ज्यादा समय से स्टॉक रखा हुआ था, उन्होंने सरकार के नए नियमों का पालन करने के लिए अपना स्टॉक कम कर दिया है। एक सितंबर से, महीने में 10 टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करने वाले थोक उपभोक्ताओं को लगातार 15 दिन से ज्यादा समय तक स्टॉक रखने की इजाजत नहीं होगी।

हर मिल द्वारा थोक उपभोक्ताओं को बेची जाने वाली मासिक मात्रा - चाहे सीधे हो या डीलर के ज़रिये - की अब जांच की जाएगी।

खुदरा और थोक की कीमत में अंतर आम बात

चीनी उद्योग के सूत्रों ने बताया कि एक्स-मिल और थोक कीमतों के बीच 2-3 रुपये प्रति किलोग्राम का अंतर, और मिल और खुदरा कीमतों के बीच 7-8 रुपये प्रति किलोग्राम का अंतर होना आम बात है। आयात खोलने के अलावा, सरकार ने थोक ग्राहकों और डीलर के लिए स्टॉक रखने के नियमों को सख्त कर दिया है और पहले ही चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी थी।

केंद्र सरकार ने कीमतों को 'बढ़ाने’ के लिए मिलों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक है - जबकि विपणन वर्ष 2025-26 (अक्टूबर-सितंबर) के लिए उत्पादन का अनुमान पहले के 343 लाख टन से घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया है। सालाना घरेलू मांग लगभग 280-285 लाख टन आंकी गई है।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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