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22 KM का सफर, 167 KM/HR की रफ्तार... नेपाल में क्यों मची इतनी भयानक तबाही? वैज्ञानिक रिपोर्ट ने खोले चौंकाने वाले राज

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ को लेकर नई वैज्ञानिक रिपोर्ट ने शुरुआती आकलन को बदल दिया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक तबाही की मुख्य वजह GLOF यानी ग्लेशियल झील के फटने से आई बाढ़ नहीं, बल्कि करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई से आया आइस-रॉक एवलॉन्च था। बर्फ, चट्टान और मलबे का यह सैलाब करीब 22 किलोमीटर तक 167 किमी प्रति घंटे की औसत रफ्तार से पहुंचा। रिपोर्ट ने हिमालय में बढ़ते ग्लेशियल और जलवायु जोखिम को लेकर भी चिंता बढ़ाई है।

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नेपाल एनवायरनमेंट सोसाइटी ने नेपाल बाढ़ को लेकर अहम खुलासे किए हैं। AI IMAGE

Nepal Flash Flood: नेपाल बाढ़ की वजह से आई त्रासदी ने दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। खबर लिखे जाने तक 903 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। वहीं, 4,247 लोग अभी लापता हैं। इस बीच बाढ़ को लेकर अब नई वैज्ञानिक रिपोर्ट सामने आई है।

शुरुआती तौर पर इस आपदा को ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन नेपाल के वैज्ञानिकों की शुरुआती रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बाढ़ की मुख्य वजह ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड नहीं, बल्कि बर्फ और चट्टानों का विशाल सैलाब यानी आइस-रॉक एवलॉन्च था।

5200 मीटर की ऊंचाई से टूटा बर्फ-चट्टानों का पहाड़

नेपाल एनवायरनमेंट सोसाइटी की ओर से कराई गई शुरुआती जांच के मुताबिक, लांगटांग-लिरुंग क्षेत्र में करीब 5,200 मीटर की ऊंचाई से बर्फ, चट्टान और मलबे का विशाल हिस्सा नीचे खिसका। यह मलबा ल्हेंडे नदी में जा गिरा और इसके बाद तेज बहाव भोटेकोशी होते हुए त्रिशूली नदी तक पहुंचा। इससे रास्ते में भारी मात्रा में मलबे से भरी विनाशकारी बाढ़ पैदा हुई।

वैज्ञानिकों के मुताबिक यह घटना 26 अगस्त की सुबह करीब 8:37 बजे शुरू हुई। करीब 5,200 मीटर से गिरा मलबा लगभग 2,930 मीटर की ऊंचाई पर ल्हेंडे नदी तक पहुंचा। इस दौरान करीब 2,270 मीटर की ऊंचाई का अंतर बेहद कम समय में तय हुआ।

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नेपाल में आई बाढ़ की तस्वीर। AP

चट्टानों की रफ्तार थी 167 किमी प्रति घंटा

रिपोर्ट में इस घटना की रफ्तार को बेहद खतरनाक बताया गया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक बर्फ और चट्टानों का यह मलबा सिर्फ सात मिनट से कुछ ज्यादा समय में करीब 22 किलोमीटर तक पहुंच गया। इसकी औसत रफ्तार करीब 167 किलोमीटर प्रति घंटा आंकी गई है।

GLOF की थ्योरी को क्यों खारिज किया गया?

बाढ़ के शुरुआती आकलन में इसे GLOF यानी ग्लेशियल झील के अचानक फटने से आई बाढ़ माना जा रहा था। लेकिन वैज्ञानिकों ने कई सैटेलाइट तस्वीरों, हाइड्रोलॉजिकल और मौसम संबंधी आंकड़ों तथा इलाके की भौगोलिक स्थिति का अध्ययन किया। रिपोर्ट के मुताबिक, इलाके में ग्लेशियल झीलें मौजूद थीं, लेकिन उनके फटने यानी GLOF होने का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला। सैटेलाइट तस्वीरों में इसके बजाय ग्लेशियर और उसके नीचे मौजूद चट्टानी हिस्से के टूटने के संकेत मिले।

बाढ़ से पहले नदी का जलस्तर क्यों घट गया था?

वैज्ञानिकों के लिए एक और महत्वपूर्ण सुराग बाढ़ से कुछ घंटे पहले नदियों के जलस्तर में आई गिरावट थी। रिपोर्ट के अनुसार रासुवागढ़ी और स्याफ्रुबेसी क्षेत्रों में नदी का जलस्तर और बहाव बाढ़ आने से पहले कम हुआ था। इससे वैज्ञानिकों को आशंका है कि कहीं ऊपर की ओर ल्हेंडे नदी में अस्थायी रूप से कोई रुकावट बनी हो। हालांकि, रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि इस संभावित नदी अवरोध के आकार और उसके बनने की पूरी प्रक्रिया को समझने के लिए आगे फील्ड जांच जरूरी है।

GLOF और ग्लेशियल मास वेस्टिंग में क्या अंतर?

ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड में ग्लेशियल झील में जमा पानी अचानक बाहर निकलता है और तेज रफ्तार से नीचे की ओर बहता है। इसके विपरीत ग्लेशियल मास वेस्टिंग में बर्फ, चट्टान, मिट्टी और मलबा गुरुत्वाकर्षण के कारण पहाड़ से नीचे की ओर खिसकता या टूटकर गिरता है। आइस-रॉक एवलॉन्च इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।

हालांकि दोनों घटनाएं अलग हैं, लेकिन दोनों का संबंध गर्म होते हिमालय से हो सकता है। ग्लेशियरों का पिघलना, उनका पीछे हटना और ऊंचाई वाले इलाकों में चट्टानों की अस्थिरता ऐसे खतरों को बढ़ा सकती है। वैज्ञानिकों ने भी भविष्य में हिमालयी क्षेत्र में इस तरह की फ्लैश फ्लड की आशंका बढ़ने की चेतावनी दी है।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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