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संभल हिंसा में दो लोगों की मौत, उपद्रवियों ने घरों में भी की पत्थरबाजी, गाड़ियां भी फूंकी

Sambhal Violence News: संभल एसपी ने बताया कि जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हिंसा में दो युवकों की मौत हो गई है। पत्थरबाजी की घटना में कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। उपद्रवियों ने 5 से 6 वाहनों में भी आग लगा दी।

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संभल हिंसा में दो लोगों की मौत।

Photo : ANI

Sambhal Violence News: उत्तर प्रदेश के संभल में जामा मस्जिद सर्वे के विरोध में भड़की हिंसा में दो लोगों की मौत हो गई है। संभल एसपी ने फोन पर इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि प्रदर्शन के दौरान दो युवकों की मौत हो चुकी है। बता दें, संभल में हिंसा उस वक्त भड़की जब कोर्ट के आदेश पर सर्वे के लिए पहुंची टीम का स्थानीय लोगों ने विरोध किया। स्थानीय लोगों ने पुलिस और सर्वे टीम को घेर लिया और पत्थरबाजी की, जिसके बाद पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया, लेकिन देखते ही देखते वहां हजारों लोग इकट्ठा हो गए और विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया।

वहीं, मंडल आयुक्त अनंजय कुमार सिंह ने बताया, आज कोर्ट के आदेश से 7 बजे से 11 बजे तक सर्वे किया जाना था। शांतिपूर्ण तरीके से सर्वे चल रहा था इसी दौरान कुछ लोग एकत्रित होकर जामा मस्जिद के बाहर नारेबाजी करने लगे। वहां पुलिस की पर्याप्त सुरक्षा मौजूद थी, हालांकि कुछ समय बाद वे पथराव करने लगे। उन्होंने बताया कि पहचान की जा रही है कि इसमें कौन लोग शामिल थे। घटना में हमारे जवान भी घायल हुए हैं। पुलिस ने बल प्रयोग करके भीड़ को तितर-बितर किया। सर्वे की टीम अपना काम करके रवाना हो चुकी है। फिलहाल स्थिति शांतिपूर्ण है और सब कुछ ठीक चल रहा है।

लोगों ने घरों में भी फेंके पत्थर

संभल में पत्थरबाजी के दौरान उपद्रवियों ने कई घरों को भी निशाना बनाया है। ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिसमें घरों में भी तोड़फोड़ की गई। न्यूज एजेंसी एएनआई पर जारी वीडियो में एक घर के अंदर खिड़की कांच टूटा मिला है, वहीं सामान भी तितर-बितर है। उपद्रवियों ने कई गाड़ियों में भी आग लगा दी।

क्या है मामला

दरअसल, हिंदू पक्ष की ओर से जामा मस्जिद को अदालत में हरिहर मंदिर का दावा किए जाने के बाद कोर्ट ने सर्वे के आदेश दिए थे। मस्जिद में 19 नवंबर की रात को सर्वे हुआ था और रविवार को फिर सर्वे करने के लिए टीम मस्जिद पहुंची थी। इस सर्वे के लिए मस्जिद कमेटी ने भी अपनी सहमति दी है और दोनों पक्ष की मौजूदगी में मस्जिद का सर्वे किया जा रहा है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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