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रांची में कार का पीछा कर तोड़े शीशे, 10 मिनट में पहुंची पुलिस; अब 30 हजार के 'सेटलमेंट' पर छिड़ा सियासी घमासान

रांची-टाटा NH-33 पर स्कॉर्पियो सवारों ने महिलाओं की कार का पीछा कर शीशे तोड़े। पुलिस की 10 मिनट की मुस्तैदी और आपसी समझौते के बाद जहां मामला शांत हुआ, वहीं बाबूलाल मरांडी और परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ के बीच इस पर भारी सियासी घमासान छिड़ गया है।

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झारखंड में हाईवे पर 'गुंडागर्दी' का वीडियो वायरल

Photo : Times Now Digital

Jharkhand: रांची-टाटा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-33) पर बुधवार को दिनदहाड़े फिल्मी अंदाज में रोड रेज का एक हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। मामूली टक्कर के बाद बुंडू सूर्य मंदिर से ही एक डिजायर कार का पीछा कर रहे स्कॉर्पियो सवार युवकों ने तैमारा मोड़ के पास जबरन वाहन रुकवाया और कार के आगे के शीशे और दरवाजों को पूरी तरह तोड़ डाला। कार में महिलाएं सवार थीं। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद झारखंड की राजनीति में भूचाल आ गया है। सत्तापक्ष जहां पुलिस की फुर्ती की तारीफ कर रहा है, वहीं विपक्ष ने पुलिस पर 'दलाली' और अवैध सेटलमेंट का बेहद गंभीर आरोप लगाया है।

10 मिनट में पहुंची पुलिस, महिला पक्ष ने FIR से किया इनकार

रांची पुलिस के अनुसार, दोपहर 12:39 बजे डायल-112 पर सूचना मिली कि काले रंग की स्कॉर्पियो एक डिजायर कार का पीछा कर रही है। तत्काल एक्शन लेते हुए मोटरसाइकिल दस्ता महज 6 मिनट और गश्ती दल करीब 10 मिनट में घटनास्थल पर पहुंच गया। डिजायर चालक रणवीर ने बताया कि मामूली टक्कर के बाद स्कॉर्पियो सवार आरोपियों ने उनका पीछा किया।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए स्कॉर्पियो चालक राजकुमार महतो (19) और जोएब रजा (18) को हिरासत में लेकर पूछताछ की। हालांकि, बाद में दोनों पक्षों ने लिखित समझौता प्रस्तुत कर दिया। पीड़ित महिला पक्ष ने FIR दर्ज कराने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि आरोपी कम उम्र के हैं और कानूनी विवाद से उनका खुद का करियर और छवि प्रभावित होगी।

परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ ने थपथपाई पुलिस की पीठ

झारखंड के परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि यह घोर अभद्रता है और बिल्कुल बर्दाश्त करने योग्य नहीं है। महिलाओं या किसी भी व्यक्ति के साथ ऐसा बर्ताव करने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने रांची पुलिस की तारीफ करते हुए लिखा, "अभी जैसी जानकारी प्राप्त हुई है, उसके अनुसार पुलिस ने सिर्फ 10 मिनट में रिस्पॉन्स देकर अपनी मुस्तैदी साबित की है। दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से विवाद सुलझा लिया है। कानून अपना काम कर रहा है। किसी भी तरह की अफवाह या गलत विमर्श बनाने से पहले जमीनी हकीकत को देखना जरूरी है।"

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी का तीखा हमला: '30,000 में हुआ सौदा'

दूसरी तरफ, सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार और कानून व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को घेरते हुए कहा कि जहां सीएम दिल्ली में निवेशकों को बुला रहे हैं, वहां राज्य में महिलाओं की सुरक्षा का यह हाल है। झारखंड बीजेपी ने बाबूलाल मरांडी के एक सोशल मीडिया पोस्ट के हवाले से पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए पोस्ट किया:

"रांची के दशम फॉल क्षेत्र से लेकर हाईवे तक महिलाओं की गाड़ी का पीछा करने की घटना से पूरा देश स्तब्ध है। अब जानकारी सामने आ रही है कि इस मामले का 30,000 में सेटलमेंट करा दिया गया। झामुमो ने खुद सोशल मीडिया पर समझौते का दावा किया है, जबकि रांची पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति में पैसे के लेन-देन का कोई जिक्र नहीं है। आखिर पुलिस ने इसे जनता से क्यों छिपाया? क्या पीड़ितों को मजबूर किया गया या पैसे लेकर आरोपियों को छोड़ा गया? कोई भी अपराध स्टेट के अगेंस्ट होता है, पुलिस दलाली बंद करे और राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) इस पर संज्ञान ले।"

अब इस मामले पर दोनों पक्ष आमने सामने हैं। झामुमो नेता ने पुलिस की तत्परता की सराहना करते हुए लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने अपील कर रहे है, तो दूसरी ओर, भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने इस घटना को लेकर पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया कि पुलिस ने मामले का 30,000 लेकर अवैध समझौता कराया। पुलिस के मुताबिक तो मामला रफा-दफा हो गया है लेकिन बहरहाल, इस समझौते के पीछे के लेनदेन के आरोपों ने सूबे की कानून-व्यवस्था पर एक नया सियासी विवाद खड़ा कर दिया है।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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