Noida News: दिल्ली से सटे हाईटेक सिटी नोएडा की पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने फर्जी एयरलाइंस टिकट बुकिंग और ट्रैवल सपोर्ट के नाम पर अमेरिका और यूरोप के नागरिकों को अपना शिकार बनाने वाले गिरोह के 13 सदस्यों को धर-दबोचा है। यह शातिर गिरोह अब तक विदेशी नागरिकों से करीब 10 करोड़ रुपये (10.50 लाख अमेरिकी डॉलर) की मोटी रकम ऐंठ चुका है। पुलिस ने इस हाईटेक कार्रवाई में आरोपियों के ठिकाने से भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं, जिनमें 13 लैपटॉप, 16 मोबाइल फोन और ठगी में इस्तेमाल होने वाले कई अन्य गैजेट्स शामिल हैं।
दो युवतियों समेत 13 आरोपी गिरफ्तार
पकड़े गए आरोपी बेहद शातिर और तकनीकी रूप से एक्सपर्ट हैं। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान पुलिस ने इस प्रकार की है। रवि खुराना, दीपक कुमार, शोभित दीक्षित, दिलीप पाण्डेय, शुभम चौधरी, साहिब चौहान, रित्विक राय, हिमांशु मलिक, प्रत्यक्ष शर्मा, जितेश कामरा, देव अग्रवाल, आरती और स्वाती रागौर।
Google और Facebook जरिए बिछाते थे जाल
पुलिस की प्राथमिक जांच में इस गिरोह के काम करने के अनोखे और बेहद संगठित तरीके का खुलासा हुआ है। यह गिरोह सीधे किसी को कॉल नहीं करता था, बल्कि शिकार खुद इनके पास चलकर आता था। आरोपी सबसे पहले गूगल और फेसबुक पर बड़ी एयरलाइन कंपनियों और फर्जी ट्रैवल एजेंसियों के नाम से सस्ते टिकट बुकिंग के लुभावने 'पेड विज्ञापन' चलाते थे। जब अमेरिका या यूरोप का कोई नागरिक इन विज्ञापनों को देखकर दिए गए टोल-फ्री नंबरों पर संपर्क करता था, तो वह कॉल सीधे आरोपियों के लैपटॉप में इंस्टॉल 'डायलर सॉफ्टवेयर' पर ट्रांसफर हो जाती थी।
खुद को नामी एयरलाइन कंपनी का प्रतिनिधि बताकर ये ठग विदेशी ग्राहकों को बेहद कम दाम में फ्लाइट टिकट और बेहतरीन ट्रैवल सपोर्ट देने का लालच देते थे और बातचीत के दौरान उनके क्रेडिट कार्ड, भुगतान विवरण और अन्य गोपनीय जानकारियां हासिल कर लेते थे।
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महीनों बाद की बुकिंग और 'डॉलर' में पेमेंट
पूछताछ में यह बात सामने आई है कि आरोपी अंतरराष्ट्रीय पेमेंट गेटवे का इस्तेमाल करते थे और पूरा भुगतान भारतीय रुपयों के बजाय अमेरिकी डॉलर में लेते थे। ठगी को छुपाने के लिए ये लोग जानबूझकर यात्रियों का टिकट कई महीने बाद की तारीख का बुक करते थे या उन्हें फर्जी टिकट थमा देते थे।
चूंकि यात्रा में लंबा समय होता था, इसलिए पीड़ितों को काफी देर बाद अहसास होता था कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। जब तक पीड़ित को भनक लगती, तब तक आरोपी अपने मोबाइल नंबर, आईपी एड्रेस, सिस्टम और डिजिटल संसाधन बदलकर गायब हो चुके होते थे।
विदेशी एक्सेंट में बात करके फंसाते थे
जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि गिरफ्तार किए गए सभी 13 आरोपी न सिर्फ हाइली एजुकेटेड हैं बल्कि वे अमेरिकी और यूरोपीय अंग्रेजी लहजे में बात करने में माहिर हैं। इसी वजह से विदेशी नागरिक आसानी से झांसे में आ जाते थे। नोएडा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, बरामद किए गए लैपटॉप और मोबाइल फोन से भारी मात्रा में विदेशी नागरिकों का डेटा और कॉलिंग लॉग्स मिले हैं। इन उपकरणों को फॉरेंसिक लैब भेजा जा रहा है। पुलिस अब अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों के साथ भी समन्वय स्थापित करने की तैयारी कर रही है ताकि इस रैकेट के विदेशी कनेक्शन और बैंक खातों की पूरी कुंडली खंगाली जा सके।
