शहर

DUSU चुनाव में कन्हैया की रणनीति पर फिरा पानी, NSUI के लिए मुसीबत बने बागी; उम्मीदवारों के चयन पर उठे सवाल

DUSU Election Result 2026 : डूसू चुनावों में एनएसयूआई के चारों पदों में से कोई भी पद न जीत पाने से कांग्रेस के छात्र संगठन में टिकट वितरण को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। एनएसयूआई के बागी उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने भारी अंतर से जीत दर्ज की, जबकि एक अन्य ने कड़ी चुनौती पेश की। अब कन्हैया कुमार के टिकट वितरण पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

Image

डूसू चुनाव में उपाध्यक्ष पद पर दीपांशु शौकीन की जीत

DUSU Election Result 2026 : दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव के परिणाम शनिवार को घोषित कर दिए गए। इस चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और कांग्रेस समर्थित नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के बीच कांटे की टक्कर थी, लेकिन रिजल्ट आने पर एबीवीपी भारी साबित हुई। ABVP ने चार पदों में से तीन पदों पर जीत का परचम लहराया, जबकि उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन ने बड़े अंतर से विजय हासिल की। दीपांशु शौकीन वही कैंडिडेट थे, जिन्हें एनएसयूआई ने टिकट तो दिया, लेकिन बाद में नामांकन वापस लेने का दबाव बनाया। उसके बाद उन्होंने बागी के तौर चुनाव लड़ने की ठानी और स्टूडेंट से समर्थन मांगा। अब पार्टी विंग की हार पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। चारों पदों पर जीत नहीं मिलने पर कन्हैया कुमार की रणनीति के तहत टिकट वितरण की चर्चाएं तेज हैं।

दरअसल, उपाध्यक्ष का पद जीतने वाले निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने एनएसयूआई के टिकट की मांग की थी और संगठन ने शुरू में उन्हें उम्मीदवार भी बनाया था, लेकिन बाद में उनसे नामांकन वापस लेने को कहा गया। उन्हें 30,615 मत प्राप्त हुए, जो एबीवीपी के इशु मौर्य को मिले 16,910 वोटों से लगभग दोगुने हैं। जबकि एनएसयूआई के आधिकारिक उम्मीदवार वीर चतरथ - जो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष चतरथ के बेटे हैं - 4,313 वोटों के साथ काफी पीछे तीसरे स्थान पर रहे।

विशेष यादव का कटा टिकट

एनएसयूआई टिकट के एक और दावेदार विशेष यादव को पहले संयुक्त सचिव का टिकट देने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया गया। इसके बाद उन्होंने समाजवादी छात्र सभा के समर्थन से चुनाव लड़ा और 15,778 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे। एबीवीपी के लक्ष्य राज सिंह ने 16,615 वोट हासिल किए और उनसे आगे रहे। इस पद के लिए एनएसयूआई के गोपाल चौधरी को 15,206 वोट मिले। कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार के करीबी सूत्रों ने हालांकि इन बातों को खारिज कर दिया कि शौकीन के साथ अहंकार की लड़ाई की वजह से उन्हें टिकट नहीं मिला। उन्होंने दावा किया कि एनएसयूआई ने शौकीन को अध्यक्ष पद के लिए प्रस्ताव दिया था, लेकिन वे उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने पर अड़े रहे।

सूत्रों का आरोप है कि जाट समुदाय से आने वाले शौकीन, एबीवीपी के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार यश डबास (जो उसी समुदाय से हैं) के खिलाफ चुनाव लड़ने से हिचकिचा रहे थे और दावा किया गया कि दोनों के बीच कोई समझौता था। उन्होंने कहा कि एनएसयूआई अध्यक्ष पद का मुकाबला छोड़ने को तैयार नहीं थी और इसके बजाय उसने आदिवासी उम्मीदवार विजय शंकर मीणा को मैदान में उतारा। कुमार को जुलाई 2023 में एनएसयूआई के लिए ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी का प्रभारी नियुक्त किया गया था। उनके कार्यकाल में यह पहली बार नहीं है जब किसी नाराज उम्मीदवार ने एनएसयूआई के आधिकारिक उम्मीदवार को हराया हो या उनसे कहीं बेहतर प्रदर्शन किया हो।

पंजाब विश्वविद्यालय में 2024 में टिकट बंटवारे को लेकर हुए विवाद के बाद एनएसयूआई के बागी अनुराग दलाल ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। एनएसयूआई के आधिकारिक उम्मीदवार राहुल नैन को सिर्फ 501 वोट मिले और वह छठे स्थान पर रहे।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

और पढ़ें
End of Article