Noida News: अपने घर या दफ्तर में आप बड़े आराम से समय बिताते हैं। क्योंकि वहां पर आपकी जरूरत की हर चीज आपकी पहुंच में होती है। घर या दफ्तर से बाहर निकलते ही कई चीजों के लिए समझौता करना पड़ता है। लेकिन एक चीज जिस पर आप समझौता नहीं करते और करना भी नहीं चाहिए वह है शौच। जी हां, जब भी टॉयलेट यानी नेचर कॉल आए, तुरंत निपट लेना चाहिए। फिर आप उसके लिए पैसा भी चुकाने को तैयार होते हैं। शहरों में जगह-जगह सार्वजनिक शौचालय बने होते हैं, जो आपके 1-2 रुपये तक लेकर 'लघु शंका' मिटाने की सुविधा देते हैं। नोएडा अथॉरिटी (Noida Authority) ने इन्हीं सार्वजनिक शौचालयों से कमाई का प्लान तैयार किया है। चलिए जानते हैं, कैसे आपका नेचर कॉल, अथॉरिटी के लिए कमाऊ पूत बनेगा और उसे करोड़ों रुपये की आमदनी होगी।
नोएडा प्राधिकरण को अगले 10 साल में शौचालयों (Public Toilets Noida) से 90 करोड़ रुपये की कमाई होगी। इस लिहाज से देखा जाए तो प्राधिकरण को सिर्फ शौचालय से ही हर साल करीब 9 करोड़ रुपये की आमदनी होगी। इतनी बड़ी राशि PH-1 यानी 150 सार्वजनिक शौचालयों से आएगी। हालांकि प्राधिकरण ने शहर में 256 शौचालय बनवाए हैं और अभी 150 शौचालयों के लिए प्राधिकरण ने एजेंसी का चुनाव किया है।
क्या काम करेगी ये एजेंसी
जिन 150 शौचालयों की जिम्मेदारी प्राधिकरण ने अलग-अलग एजेंसियों को दी है। उनमें एजेंसियां रखरखाव और संचालन का काम देखेंगी। एजेंसियां 10 साल तक यह काम करेंगी। चुनी गई एजेंसियां 10 साल तक इन शौचालयों के रखरखाव के साथ ही वहां विज्ञापन भी लगाएंगी, उन्हें विज्ञापन राइट्स दिए जाएंगे और उससे एजेंसियों की कमाई होगी। वह इस शौचालयों में मरम्मत का काम और गार्ड की तैनाती भी करेंगी। यह एजेंसियां विज्ञापन का एक हिस्सा प्राधिकरण को देंगी, जिससे प्राधिकरण को 90 करोड़ की कमाई होगी।
10 दिन में खुल जाएंगे बंद पड़े शौचालय
जनरल मैनेजर एसपी सिंह ने दावा किया है कि प्राधिकरण क्षेत्र में बंद पड़े सभी सार्वजनिक शौचालयों को अगले 10 दिनों के अंदर खोल दिया जाएगा। इस तरह से अभी 150 शौचालयों को खोले जाने का रास्ता साफ हो गया है, जबकि अन्य 106 पर अभी ताला लटका हुआ ही रहेगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि इन 106 सार्वजनिक शौचालयों के लिए एजेंसी का चयन अभी तक नहीं हो पाया है।
BOT शौचालयों की भी जिम्मेदारी दी जाएगी
शौचालयों के खुलते ही उनमें सभी तरह की सुविधाएं दी जाएंगी। जनरल मैनेजर ने बताया कि सार्वजनिक शौचालय के अलावा पहले से ही BOT (बिल्ड, ऑपरेट, ट्रांस्फर) आधार पर भी शौचालय बने हुए हैं। इनके रखरखाव की जिम्मेदारी भी एजेंसी करेगी। इसके बदले एजेंसी को इन शौचालयों में विज्ञापन लगाने का अधिकार दिया जाएगा।
गंदगी मिलने पर जुर्माने का भी प्रावधान
ऐसा नहीं है कि प्राधिकरण ने एक बार एजेंसी का चयन कर लिया और 10 साल में 90 करोड़ रुपये लेकर सब कुछ उस एजेंसी के भरोसे छोड़ दें। अगर सार्वजनिक शौचालय से गंदगी की शिकायत मिलती है तो प्राधिकरण की तरफ से कंपनी पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा और एक्शन भी लिया जा सकता है। इस व्यवस्था से प्राधिकरण पर वित्तीय बोझ भी नहीं पड़ेगा और शहर में साफ-सफाई की स्थिति में भी सुधार होगा। इससे लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
