Ajmer Civic Polls: राजस्थान में नगर निगम चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद अब अजमेर में मेयर की कुर्सी को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के बाद कांग्रेस ने अपने नवनिर्वाचित पार्षदों को हॉर्स ट्रेडिंग से बचाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस पार्षदों को कांग्रेस शासित प्रदेश कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु शिफ्ट किया जा रहा है। हॉर्स ट्रेडिंग और क्रॉस वोटिंग की आशंका के बीच कांग्रेस की तरफ से यह कदम उठाया गया है।
80 वार्डों में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी
अजमेर नगर निगम में कुल 80 वार्ड हैं। चुनाव परिणाम में Congress को 37 सीटें मिली हैं, जबकि भाजपा ने 32 वार्डों में जीत दर्ज की है। इसके अलावा 11 निर्दलीय पार्षद भी इस चुनाव में जीते हैं। किसी भी दल के पास बोर्ड गठन के लिए जरूरी 41 सीटों का आंकड़ा नहीं है। ऐसे में मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम हो गई है। कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए इन पार्षदों का समर्थन जरूरी होगा।
मेयर चुनाव से पहले बढ़ी हलचल
मेयर चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने पार्षदों को एकजुट रखने के लिए उन्हें एक साथ रखने का फैसला किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कांग्रेस के नवनिर्वाचित पार्षदों को निगरानी वाले कैंप में रखा गया है, क्योंकि पार्टी को क्रॉस वोटिंग की आशंका है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कांग्रेस ने पांच निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का भी दावा किया है। हालांकि, निर्दलीय पार्षदों के समर्थन को लेकर राजनीतिक स्थिति अभी पूरी तरह से साफ नहीं है। बता दें कि अजमेर में मेयर का चुनाव 21 सितंबर को होना है।
अजमेर नगर निगम में अब मुकाबला सिर्फ सबसे ज्यादा पार्षद होने तक सीमित नहीं है। बोर्ड गठन के लिए दोनों प्रमुख दलों को निर्दलीय पार्षदों का समर्थन जुटाना होगा। ऐसे में आने वाले दिनों में पार्षदों की राजनीतिक स्थिति और मेयर चुनाव से पहले होने वाली गतिविधियों पर करीबी नजर रहेगी।
