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अगले साल आने वाली है मेक इन इंडिया 'Bullet Train', जानें लेटेस्ट अपडेट

भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन 2027 के अंत तक शुरू हो सकती है। मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर पर चलने वाली इस स्वदेशी बुलेट ट्रेन की स्पीड 280 किमी/घंटा तक होगी। यह यात्रा समय घटाने के साथ ही आत्मनिर्भरता भी बढ़ाएगी।

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वंदे भारत बुलेट ट्रेन अगले साल दौड़ेगी ट्रैक पर

अहमदाबाद और मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन (Bullet Train) का प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहा है। साल 2030 तक इस पूरे रूट पर बुलेट ट्रेन चलाए जाने की योजना है। लेकिन इस बीच एक बड़ी खबर ये है कि भारत अपनी बुलेट ट्रेन बना रहा है। अब जापान से आने वाली शिंकेनसेन तकनीक का इंतजार की जरूरत नहीं। बल्कि भारत अब दुनिया की हाईस्पीड ट्रेनों को टक्कर देने के लिए अपनी 'बुलेट ट्रेन' बना रहा है। हालांकि, इसकी स्पीड शिंकेनसेन और चीन की बुलेट ट्रेन से कुछ कम जरूर होगी, लेकिन यह पूरी तरह से 'स्वदेशी' होगी। यह हाईस्पीड ट्रेन सुरक्षित होगी और भारत को इसकी टेक्नोलॉजी के लिए दुनिया के आगे हाथ भी नहीं फैलाने होंगे। सभी ठीक रहा तो भविष्य में इस ट्रेन को अन्य देशों के लिए निर्यात भी किया जा सकता है।

देश की पहली पूरी तरह स्वदेशी बुलेट ट्रेन अगल साल यानी 2027 तक शुरू हो सकती है। यह ऐतिहासिक पहल मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के जरिए साकार होगी, जो 508 किलोमीटर लंबा भारत का पहला बुलेट ट्रेन कॉरिडोर होगा और अभी निर्माणाधीन है।

कौन बना रहा भारत की पहली 'बुलेट ट्रेन'

अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना में जापान की शिंकनसेन तकनीक का सहारा लिया गया था, लेकिन आने वाली ‘वंदे बुलेट’ (B28) ट्रेन इस दिशा में एक बड़ा बदलाव लाएगी। यह ट्रेन पूरी तरह भारत में डिजाइन है और इसका निर्माण भी पूरी तरह से भारत में ही हो रहा है। इसका निर्माण चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी BEML के सहयोग से किया जा रहा है।

भारतीय परिस्थितियों के लिए तैयार होगी स्वदेशी 'बुलेट ट्रेन'

साल 2024 में BEML को 866 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट मिलने के बाद इस परियोजना पर तेजी से काम शुरू हुआ। खास बात यह है कि यह ट्रेन भारतीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। चाहे भीषण गर्मी हो, धूल भरे इलाके हों या भारी बारिश के हालात, यह ट्रेन -5°C से 50° सेल्सियस तक के तापमान में सुचारू रूप से फर्राटा मारेगी।

स्वदेशी 'बुलेट ट्रेन' की स्पीड कितनी होगी?

अगर अपनी स्वदेशी बुलेट ट्रेन की बात की जाए तो इसकी अधिकतम स्पीड 280 किमी प्रति घंटा तक होगी। हालांकि, इसकी नॉर्मल परिचालन स्पीड को थोड़ा कम रखा जाएगा। यह जापानी की 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली शिंकनसेन से थोड़ा कम जरूर है, लेकिन भारत की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार इस स्पीड को संतुलित माना जा रहा है। यह चीन की 400 किमी रफ्तार वाली बुलेट ट्रेन से काफी कम स्पीड में चलेगी।

2027 में चलने लगेगी स्वदेशी 'बुलेट ट्रेन'

जानकारी के मुताबिक इसी साल (2026) के अंत या 2027 की शुरुआत तक स्वदेशी 'बुलेट ट्रेन' का प्रोटोटाइप तैयार हो सकता है। इसके बाद ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया चलेगी। माना जा रहा है कि अगस्त 2027 तक गुजरात में सूरत-वापी सेक्शन पर स्वदेशी 'बुलेट ट्रेन' की शुरुआत होने की भी संभावना है।

यह परियोजना सिर्फ तेज रफ्तार का प्रतीक नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। इससे देश में हाई-स्पीड रेल टेक्नोलॉजी, सिग्नलिंग सिस्टम (ETCS लेवल-2) और निर्माण क्षमता का भी विकास होगा। सरकार आगे इसके 16 और स्वदेशी ट्रेनसेट खरीदने की योजना बना रही है।

इन रूट पर भी विकसित होगा बुलेट ट्रेन नेटवर्क

केंद्र सरकार ने अहमदाबाद-मुंबई के अलावा दिल्ली-वाराणसी और मुंबई-पुणे जैसे सात नए हाई-स्पीड कॉरिडोर का प्रस्ताव भी रखा है। अगर यह योजनाएं सफल रहती हैं, तो अगले दशक में भारत में बुलेट ट्रेन नेटवर्क का व्यापक विस्तार देखने को मिल सकता है।

बुलेट ट्रेन के शुरू होने के बाद मुंबई से अहमदाबाद की दूरी मात्र 2-3 घंटे में तय हो जाएगी। यह न सिर्फ यात्रा के समय को कम करेगा, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर रेल तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और मजबूत बनाएगा।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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