पंचकेदार में मद्महेश्वर का नंबर दूसरा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस विश्व प्रसिद्ध द्वितीय केदार की यात्रा करते हैं। इन दिनों श्रद्धालुओं के लिए मद्महेश्वर की यात्रा आस्था के साथ ही कठिन परीक्षा भी बनी हुई है। ऐसा इसलिए क्योंकि धाम के प्रमुख आधार शिविर बनातोली में मोरखंडा नदी पर निर्माणाधीन झूला पुल पिछले तीन सालों से अधूरा पड़ा है। ऐसे में स्थानीय ग्रामणों के साथ ही हजारों श्रद्धालुओं को भी लकड़ी के अस्थायी पुल और ट्रॉली की रस्सी के सहारे नदी पार करने को मजबूर होना पड़ता है।
बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ते ही लकड़ी की अस्थायी पुलिया बह जाती है, जिसके बाद ट्रॉली ही आवाजाही का एकमात्र साधन बची रहती है। हर दिन लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर यहां से यात्रा करनी पड़ रही है और किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका भी बनी रहती है।
इस साल भी सावन में बाबा मद्महेश्वर के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ के कारण ट्रॉली से नदी पार करने के लिए दोनों ओर लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं। कई-कई घंटे इंतजार के बाद लोगों की बारी आती है। उफनती नदी के ऊपर रस्सी के सहारे ट्रॉली से सफर करना रोमांच कम, जान के लिए खतरा ज्यादा है।
ग्रामीणों का कहना है कि साल 2013 की आपदा के बाद इस जगह पर स्थायी झूला पुल की जरूरत महसूस की गई थी। पुल का निर्माण शुरू होने पर सुरक्षित आवागमन की उम्मीद भी जगी थी, लेकिन सालों बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। हर साल मानसून में अस्थायी लकड़ी का पुल बह जाने से ग्रामीणों, स्कूली बच्चों और तीर्थयात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि सरकार धार्मिक पर्यटन और चारधाम यात्रा को विश्वस्तरीय बनाने के दावे करती है, लेकिन मद्महेश्वर जैसे प्रमुख तीर्थ मार्ग पर आज भी मूलभूत सुविधाओं का भारी अभाव साफ दिखाई देता है। श्रद्धालू कहते हैं, अगर झूला पुल समय पर बन गया होता तो न स्थानीय लोगों को परेशानी उठानी पड़ती और न ही श्रद्धालुओं को जान जोखिम में डालकर यात्रा करनी पड़ती।
बदरी-केदार मंदिर समिति के पूर्व सदस्य शिव सिंह रावत सहित मद्महेश्वर घाटी के जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने झूला पुल का निर्माण जल्द पूरा करने की मांग की है। उनका कहना है कि मद्महेश्वर यात्रा क्षेत्र की आर्थिकी का महत्वपूर्ण आधार है और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। अधूरा पुल न सिर्फ स्थानीय लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा है, बल्कि क्षेत्र की पर्यटन और तीर्थाटन की छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर झूला पुल का निर्माण जल्द पूरा नहीं कराया गया तो वे जनआंदोलन शुरू करने को विवश होंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से निर्माण कार्य को युद्धस्तर पर पूरा कर मद्महेश्वर यात्रा मार्ग को सुरक्षित बनाने की मांग की है।
