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पश्चिम बंगाल SIR विवाद: चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से मांगे ज्यादा अपीलीय ट्रिब्यूनल, 38.3 लाख अपीलों में से 37 लाख अभी भी लंबित

Bengal Voter List Revision Appellate Tribunal: पश्चिम बंगाल में स्पेशल समरी रिवीजन (SIR) से जुड़ी 38.3 लाख अपीलों के निपटारे के लिए चुनाव आयोग ने SC से राज्य की सभी 42 लोकसभा सीटों पर अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाने का प्रस्ताव दिया।

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Bengal SIR: चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से मांगे ज्यादा ट्रिब्यूनल, हर लोकसभा सीट पर एक ट्रिब्यूनल बनाने का प्रस्ताव

Bengal SIR Supreme Court ECI Proposal: पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग ने अपीलों के जल्द निपटारे के लिए अधिक अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाने का प्रस्ताव दिया है। कोर्ट में दिए गए हलफनामे में आयोग ने कहा है कि राज्य में मौजूदा ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ाकर पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों के बराबर की जा सकती है। आयोग के मुताबिक इससे लंबित अपीलों का तेजी से निपटारा हो सकेगा।

38.3 लाख अपीलें, 37 लाख से ज्यादा अभी लंबित

ECI के मुताबिक SIR से जुड़े मामलों में कुल करीब 38.3 लाख अपीलें दाखिल हुई हैं। आयोग के हलफनामे में 16 सितंबर तक 1,26,194 अपीलों के निपटारे की बात कही गई है। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में अपीलें अभी भी लंबित हैं। इससे पहले दाखिल हलफनामे में 38,20,683 अपीलों में से 1,02,231 के निपटारे और 37,18,452 के लंबित होने का आंकड़ा दिया गया था।

22.2 लाख अपीलें हटाई गईं मतदाताओं की

आयोग ने अब अपीलों का एक महत्वपूर्ण ब्योरा भी सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा है। करीब 22.21 लाख अपीलें ऐसे लोगों ने दाखिल की हैं, जिनके नाम SIR प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट से हटाए गए थे।

आयोग के मुताबिक SIR के दौरान करीब 27.16 लाख नाम हटाए गए थे। ऐसे में हटाए गए मतदाताओं में करीब 82 फीसदी ने अपने नाम दोबारा वोटर लिस्ट में शामिल कराने के लिए अपील की है।

16.1 लाख अपीलें नाम शामिल किए जाने के खिलाफ

आयोग के आंकड़ों के मुताबिक कुल अपीलों में करीब 16.10 लाख अपीलें ऐसे मतदाताओं के नाम शामिल किए जाने के खिलाफ हैं। यानी इन अपीलों में किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में शामिल किए जाने को चुनौती दी गई है। आयोग ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि इन अपीलों को किस-किस ने दाखिल किया।

1,13,943 लोगों के नाम फिर वोटर लिस्ट में जुड़े

ट्रिब्यूनल से अब तक निपटाए गए मामलों में 1,13,943 लोगों को दोबारा वोटर लिस्ट में शामिल करने का फैसला हुआ है। 1,26,194 तय किए गए मामलों में यह संख्या करीब 93 फीसदी बैठती है।

वहीं 8,649 मामलों में अपील खारिज हुई। हालांकि चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने यह भी कहा है कि अभी जिन मामलों का निपटारा हुआ है, उन्हें सभी लंबित मामलों का प्रतिनिधि आंकड़ा नहीं माना जा सकता, क्योंकि दस्तावेजी सबूत रखने वाले मामलों को पहले निपटाया गया हो सकता है।

आयोग ने कहा- सिर्फ 'डिलीशन' का आंकड़ा दिखाना सही नहीं

ECI ने सुप्रीम कोर्ट में उन दावों पर भी जवाब दिया है, जिनमें SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

आयोग का कहना है कि सिर्फ हटाए गए नामों की संख्या को आधार बनाकर निष्कर्ष निकालना सही नहीं है। SIR प्रक्रिया में Absent, Shifted, Dead और Duplicate यानी अनुपस्थित, स्थान बदल चुके, मृत और डुप्लीकेट मतदाता प्रविष्टियों को भी ध्यान में रखा गया था।

चुनाव नतीजों पर असर के दावे को EC ने नकारा

चुनाव आयोग ने यह दावा भी खारिज किया है कि SIR के दौरान हुई deletions की वजह से पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे प्रभावित हुए।

आयोग ने TMC सांसद डेरेक ओ'ब्रायन की ओर से उठाए गए उस तर्क का भी विरोध किया है जिसमें उन विधानसभा सीटों का हवाला दिया गया था जहां जीत का अंतर और हटाए गए मतदाताओं की संख्या आपस में करीब थी।

EC ने कहा कि केवल जीत के अंतर और deletions की संख्या की तुलना करके चुनाव परिणाम पर SIR के प्रभाव का निष्कर्ष निकालना “flawed and speculative yardstick” यानी त्रुटिपूर्ण और अनुमान आधारित पैमाना है।

EC ने कहा- आंकड़ों को चुनिंदा तरीके से इस्तेमाल किया गया

आयोग का तर्क है कि केवल उन विधानसभा सीटों को चुनना जहां deleted voters की संख्या जीत के अंतर से ज्यादा थी, पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। आयोग ने अपने जवाब में ऐसे निर्वाचन क्षेत्रों का भी उल्लेख किया है जहां जीत का अंतर deletions से कम होने के बावजूद संबंधित उम्मीदवार चुनाव जीते।

आयोग ने इसी आधार पर SIR के कारण चुनाव परिणाम प्रभावित होने के दावे को चुनौती दी है।

लेकिन आंकड़े दिखाते हैं बड़ी संख्या में अपील अभी बाकी

इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ा सवाल लंबित अपीलों का है। करीब 38.3 लाख अपीलों में से अब तक लगभग 1.26 लाख का ही निपटारा हुआ है। यानी बड़ी संख्या में मामले अभी ट्रिब्यूनलों के सामने लंबित हैं।

इसी वजह से चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से 19 मौजूदा अपीलीय ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ाकर 42 करने, यानी प्रत्येक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के लिए एक ट्रिब्यूनल बनाने पर विचार करने का अनुरोध किया है।

सुप्रीम कोर्ट में अब ट्रिब्यूनल बढ़ाने का प्रस्ताव अहम मुद्दा

SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई में अब एक तरफ आयोग की ओर से अपीलों के निपटारे का डेटा रखा गया है, वहीं दूसरी तरफ बड़ी संख्या में मामलों के लंबित रहने का सवाल भी सामने है।

आयोग का कहना है कि ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ाने से लंबित अपीलों के निपटारे की प्रक्रिया तेज की जा सकेगी। वहीं उपलब्ध आंकड़ों से यह साफ है कि नाम हटाए गए मतदाताओं की ओर से दाखिल अपीलों की संख्या 22 लाख से ज्यादा है और बड़ी संख्या में मामले अभी भी लंबित हैं।

ECI ने 4 हारी हुई सीटों का भी दिया उदाहरण

चुनाव आयोग ने कहा कि अगर सिर्फ हटाए गए नामों और चुनावी मार्जिन की तुलना की जाए, तो कई सीटों पर हटाए गए नाम जीत के अंतर से भी कम थे।

ECI ने चार ऐसी सीटों का उदाहरण दिया, जहां TMC उम्मीदवार चुनाव हार गए थे।

1. इनमें दिनहाटा में हार का अंतर 17,447 वोट था, जबकि adjudication के तहत 17,274 नाम हटे।

2. खरग्राम (SC) में हार का अंतर 9,333 वोट और हटाए गए नाम 4,258 थे।

3. बाली में हार का अंतर 11,997 और हटाए गए नाम 11,386 थे।

4. वहीं हावड़ा उत्तर में हार का अंतर 11,250 और हटाए गए नाम 11,179 थे। यानी इन चारों सीटों पर adjudication के तहत हटाए गए नाम हार के मार्जिन से कम थे।

TMC की जीती 21 सीटों का भी ECI ने दिया उदाहरण

इसके साथ ही ECI ने कहा कि 21 विधानसभा सीटें ऐसी थीं, जहां हटाए गए नामों की संख्या TMC उम्मीदवारों की जीत के अंतर से ज्यादा थी। आयोग ने अपने जवाब में इन सीटों के आंकड़े भी दिए हैं। इनमें सिताई, कुमारगंज, हरिरामपुर, रतुआ, मोथाबाड़ी, समसेरगंज, सूती, रघुनाथगंज, लालगोला, पलाशीपाड़ा, कालीगंज, अमडांगा, कमरहाटी, मध्यमग्राम, पाथरप्रतिमा, रायदीघी, मंदिरबाजार, हावड़ा दक्षिण, खड़गपुर, खंडघोष और बर्दवान शामिल हैं।

उदाहरण के तौर पर, सिताई में TMC की जीत का अंतर 2,721 वोट था, जबकि 20,213 नाम हटे। समसेरगंज में जीत का अंतर 7,587 और हटाए गए नाम 74,775 थे। लालगोला में 18,960 वोट की जीत के मुकाबले 55,420 नाम हटे। अमडांगा में 2,995 वोट की जीत के मुकाबले 15,387 नाम हटे।

यही आंकड़ा चुनाव आयोग ने यह तर्क देने के लिए रखा है कि केवल “हटाए गए नाम बनाम जीत का मार्जिन” को आधार बनाकर चुनाव परिणाम पर SIR के प्रभाव का निष्कर्ष निकालना सही तरीका नहीं है।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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