उत्तर प्रदेश की राजधानी और नवाबों की नगरी लखनऊ में लगातार ट्रैफिक बढ़ता जा रहा है। जैसे-जैसे शहर का विकास हो रहा है, वैसे-वैसे यहां पर और ज्यादा सड़कों और पुलों की आवश्यकता भी बढ़ती जा रही है। बढ़ती जनसंख्या का दबाव सड़कों पर जाम के रूप में साफ देखा जा सकता है। इसी जाम से शहर को मुक्त करने के लिए उत्तर प्रदेश स्टेट ब्रिज कॉर्पोरेशन और लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने शहर में गोमती नदी पर दो नए पुल बना रहे हैं। इन पुल के बन जाने से शहर के पांच लाख लोगों को फायदा होगा।
पहला ब्रिज खद्रा में पहले से मौजूद कॉन्क्रीट ब्रिज के पास बनाया जा रहा है। इसके बनने से लखनऊ और सीतापुर रोड पर आने-जाने वाले भारी वाहनों को बड़ी राहत मिलेगी। अभी इस ब्रिज का 12 फीसद काम ही हुआ है और इस पुल का काम जून 2027 तक पूरा किया जाना है। यह चार लेन का पुल कुल 180 मीटर लंबा है, इसके अलावा 326 मीटर की अप्रोच रोड भी बनाई जाएगी। इस पुल के लिए 92.89 करोड़ का बजट अप्रूव किया गया है।
इसके अलावा मेहदी घाट के पास एक अन्य चार लेन के कॉन्क्रीट पुल का काम किया जा रहा है। इस पुल का निर्माण ग्रीन कॉरिडोर स्कीम के तहत हो रहा है। यह नया पुल दशकों पुराने पांटून पुल की जगह लेगा और फैजुल्लागंज व दौलतगंज के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर करेगा।
इस दूसरे ब्रिज के लिए 53.98 करोड़ रुपये पास हुए हैं। इस पुल की लंबाई 3.3.38 मीटर होगी और उम्मीद की जा रही है कि इस पुल के बन जाने से 12 किमी की दूरी को 15 मिनट में पूरा कर लिया जाएगा। अभी इस पुल का काम 5 फीसद ही हुआ है और इस साल यानी दिसंब तक इसका काम 50 फीसद पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
मेहंदी घाट पुल का काम पूरा हो जाने से दाउदनगर, बलराम गाजीपुर, अल्लुनगर-डिगुरिया, प्रीति नगर, केशवनगर और फैजुल्लागंज की तरफ LDA की अन्य कॉलोनियों के निवासियों को फायदा होगा। इसके अलावा दौलतगंज की तरफ ठाकुरगंज, बालागंज, आजाद नगर, गौघाट और हुसैनाबाद के निवासियों को भी इस पुल का लाभ मिलेगा।
इन दोनों पुलों के बन जाने से दिल्ली, बरेली, सीतापुर, हरदोई की तरफ से राष्ट्रीय राजमार्ग पर आने-जाने वाले वाहनों को भी लाभ मिलेगा। इन पुलों के बन जाने से शहर के अंदर मोबिलिटी बेहतर होगी, सफर में समय कम लगेगा। इन दोनों ही ब्रिज प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने की जिम्मेदारी राज्य के इंजीनियरों पर है।
