Delhi Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने से हुए भीषण हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 7 हो गई है। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सोमवार को एक और शव बरामद हुआ है। इसस पहले देर रात मलबे से एक शव बरामद किया गया था। बताया जा रहा है कि आज पूरे दिन रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहेगा। एनडीआरएफ (NDRF), दिल्ली फायर सर्विस और दिल्ली पुलिस की टीमें युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। इस बीच, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता घटनास्थल पर पहुंची और स्थिति का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, उन्हें आज ही सस्पेंड किया जाएगा।
घटनास्थल पर पहुंची सीएम रेखा गुप्ता
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि PG, नर्सिंग होम, स्कूल समेत सार्वजनिक इस्तेमाल वाली सभी इमारतों का समय-समय पर स्ट्रक्चरल ऑडिट और सेफ्टी सर्टिफिकेशन अनिवार्य किया जाएगा। बिना सुरक्षा प्रमाणन के किसी बिल्डिंग में सार्वजनिक गतिविधि की अनुमति नहीं होगी।
सीएम ने कहा कि सत्य निकेतन हादसे से निकाले गए लोगों के लिए कॉलेज हॉस्टल में रहने की व्यवस्था की गई है। सरकार प्रभावित छात्रों और उनके परिजनों की हरसंभव मदद कर रही है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि लापरवाही या निगरानी में चूक के लिए जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों पर आज ही सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
मलबे से निकाले जा रहे शव, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
राहत एवं बचाव टीमों के अनुसार, भारी कंक्रीट और स्लैब के कारण मलबा हटाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। देर रात चलाए गए तलाशी अभियान में एक और व्यक्ति का शव निकाला गया, जिसके बाद मृतकों का आंकड़ा 6 पर पहुंच गया। मलबे के नीचे कोई और व्यक्ति न दबा हो, यह सुनिश्चित करने के लिए विशेष उपकरणों और डॉग स्क्वॉड की मदद ली जा रही है। हादसे के बाद आसपास के पूरे इलाके की घेराबंदी कर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
6 में से 4 शवों की पहचान हुई
मलबे से मिले शवों में से अब तक चार मृतकों की पहचान AIIMS में की जा चुकी है। इनमें मध्य प्रदेश निवासी अर्पित, पवन, अभिषेक और वाराणसी निवासी युवराज शामिल हैं। वहीं, मलबे से निकाले गए दो अन्य शवों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। अधिकारियों द्वारा उनकी शिनाख्त के प्रयास जारी हैं।
अवैध निर्माण पर पूर्व मुख्य सचिव ने उठाए सवाल
दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव ओमेश सहगल ने इस घटना को एक बड़ा चेतावनी संकेत करार देते हुए कहा कि इसे अलग-थलग घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली के कई इलाकों में हर पांच में से एक इमारत अनधिकृत है, जहां या तो बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण हुआ है, बाद में अतिरिक्त मंजिलें बना ली गईं या फिर निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने सुझाव दिया कि जो इलाके पहले से ही अत्यधिक भीड़भाड़ वाले और ओवर-कंस्ट्रक्टेड हैं, वहां नए निर्माण और नक्शों की मंजूरी पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए और मौजूदा ढांचों की सुरक्षा ऑडिट होनी चाहिए।
छात्रों की सुरक्षा पर गरमाई सियासत
हादसे के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता कुमारी सैलजा ने छात्रों की सुरक्षा को लेकर बीजेपी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों को बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ दिल्ली भेजते हैं और ऐसे में उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है, यह तय होना चाहिए। वहीं, एनएसयूआई के अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने मौके पर पहुंचकर आरोप लगाया कि यदि मेडिकल टीमें, दमकल और प्रशासन समय पर पूरी तैयारी के साथ पहुंचते तो शायद और जिंदगियां बचाई जा सकती थीं। दिल्ली भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष रजत चौधरी ने स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि यह समय राजनीति करने का नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों के साथ खड़े होने और फंसे लोगों को तेजी से बचाने का है। उन्होंने सभी दलों से संवेदनशीलता बरतने की अपील की।
