ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना भारत में कई लोगों के लिए रोजमर्रा की प्रक्रिया है। ड्राइविंग सीखिए, टेस्ट दीजिए और लाइसेंस मिल जाता है लेकिन नॉर्वे में रहने वाले एक भारतीय युवक के लिए ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करना इतना आसान नहीं था। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना अनुभव शेयर करते हुए बताया कि उन्हें लाइसेंस पाने में करीब दो साल लग गए और इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 6 लाख रुपये खर्च हो गए।
सोशल मीडिया पर शेयर किया अपना अनुभव
नॉर्वे में DL पाने के अपने अनभुवों को विनोद नाम के युवक ने सोशल साइट एक्स पर @turiyatman नाम के हैंडल से शेयर किया। उन्होंने बताया कि साल 2011 में नॉर्वे आने के बाद उन्हें वहां ड्राइविंग की जरूरत महसूस हुई। नॉर्वे में बर्फीले मौसम, पहाड़ी रास्तों और लंबी दूरियों की वजह से कार से ही सफर करना पड़ता है। शुरुआत में उन्होंने अपने एक पड़ोसी से ड्राइविंग सीखनी शुरू की लेकिन सिर्फ कार चलाना सीख लेना ही लाइसेंस पाने के लिए काफी नहीं था।
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सिर्फ ड्राइविंग ही नहीं, कई तरह की ट्रेनिंग
विनोद के मुताबिक, नॉर्वे में ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया में कई तरह के कोर्स और टेस्ट शामिल होते हैं। उन्हें थ्योरी टेस्ट के साथ सुरक्षा से जुड़ी ट्रेनिंग और काफी प्रैक्टिस करनी पड़ी। खास बात यह थी कि उन्हें अलग-अलग परिस्थितियों में गाड़ी चलाने का प्रैक्टिस करना पड़ा। जिसमें बर्फ से ढकी सड़कें, पहाड़ी रास्ते, सुरंगें, हाईवे और छोटी सड़कें शामिल थीं। इसके अलावा, जिस व्यक्ति से कोई ड्राइविंग सीख रहा है, उसके पास कम से कम पांच साल का ड्राइविंग अनुभव होना जरूरी बताया गया।
पहली कोशिश में हो गए फेल
इतनी तैयारी के बावजूद विनोद पहली बार ड्राइविंग टेस्ट पास नहीं कर पाए। इसके बाद उन्होंने करीब दो महीने और अभ्यास किया। दूसरी कोशिश में आखिरकार उन्हें सफलता मिली। इस तरह लाइसेंस हासिल करने में उन्हें लगभग दो साल लग गए। विनोद ने बताया कि साल 2011 में इस पूरी प्रक्रिया में करीब 6 लाख रुपये खर्च हुए थे। उनका कहना है कि आज के समय में यह खर्च और ज्यादा हो सकता है और यह खर्चा करीब 10 लाख रुपए तक भी हो सकता है।
भारत से की तुलना
अपने अनुभव के जरिए विनोद ने नॉर्वे की ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया की तुलना भारत से भी की। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने दावा किया कि भारत में कुछ जगहों पर लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया काफी आसान हो सकती है। कई लोगों ने यह भी कहा कि ड्राइविंग लाइसेंस का मकसद सिर्फ कागज हासिल करना नहीं, बल्कि सुरक्षित तरीके से गाड़ी चलाना सीखना होना चाहिए।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। टाइम्स नाउ नवभारत किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।
