लखनऊ

Tunday Kabab Lucknow: स्वाद ही नहीं अपनी अनोखी कहानी के लिए भी मशहूर हैं लखनऊ के टुंडे कबाब, रोचक है इतिहास

  • Agency by: Times Now Digital
  • Updated Sep 8, 2022, 12:50 PM IST

Tunday Kabab Story: लखनऊ अपने खान-पान के लिए विश्व भर में विख्यात है। बात जब लखनऊ के खाने की हो तो टुंडे कबाब का नाम सबसे पहले लिया जाता है। लखनऊ के टुंडे कबाब का अपना एक अनोखा इतिहास है। इस कबाब की कहानी नवाब से जुड़ी है।

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Tunday Kabab Lucknow: स्वाद ही नहीं अपनी अनोखी कहानी के लिए भी मशहूर हैं लखनऊ के टुंडे कबाब, रोचक है इतिहास

Lucknow News: राजधानी लखनऊ का टुंडे कबाब पूरी विश्वभर में अपने अनोखे स्वाद के प्रख्यात है। सालों से टुंडे कबाब के स्वाद की बादशाहत आज के दौर में भी बरकरार है। टुंडे कबाब के अनोखे स्वाद के आगे देशभर के बड़े- बड़े फाइव स्टार होटल्स के शेफ भी फीके पड़ जाते हैं। मुगलिया जायके के कबाब का स्वाद चखने के लिए बॉलीवुड के अभिनेता समेत नामी- गिरामी शख्सियत यहां आ चुकी हैं। बता दें कि इस टुंडे कबाब के पीछे की कहानी भी बेहद दिलचस्प है।

जानकारों की मानें तो इस कबाब की शुरुआत 1905 में बिना दांतों वाले एक नवाब के लिए की गई थी। हाजी मुराद अली ने चौक के अकबरी गेट के निकट सबसे पहले एक छोटी सी दुकान से दिलकश कबाब का सफर शुरू किया था। इसके बाद कबाब का रुआब कभी कम नहीं हुआ।

टुंडे नाम पड़ने के पीछे है ये कहानी

बता दें कि हाजी मुराद अली पतंग उड़ाने के बेहद शौकीन हुआ करते थे। पतंग उड़ाने के दौरान उनका एक हाथ बुरी तरह घायल हो गया था। कुछ वक्त बाद उन्हें अपने हाथ को कटवाना पड़ा था। हाथ कट जाने के बाद हाजी मुराद अली अपनी इस कबाब की दुकान पर बैठने लगे थे। जो भी इस दुकान पर कबाब खाने आया करता वह उन्हें एक हाथ न होने की वजह से 'टुंडा' कहकर बुलाता था। टुंडे का मतलब होता है जिसका एक हाथ ही न हो। बस यहीं से टुंडे कबाब को नई पहचान मिलनी शुरू हुई। यहां से टुंडे कबाब का अनोखा सफर शुरू हो गया जो आज पूरी दुनिया भर में प्रसिद्ध है। टुंडे के गलावटी कबाब को खाने के लिए न सिर्फ इंडिया बल्कि विदेशों तक के लोग यहां पर आते हैं।

जानिए क्यों खास है टुंडे कबाब

Tundey ke Kabab

लखनऊ के नवाब से जुड़ी है कबाब की कहानी

बता दें कि टुंडे कबाब की शुरुआत करने वाले हाजी मुराद अली ने कभी भी किसी को कबाब में इस्तेमाल होने वाले अनोखे मसालों के बारे में नहीं बताया। वर्तमान में हमेशा टुंडे कबाब से जुड़े अलग-अलग लोगों को अलग-अलग दुकानों पर भेज कर इन मसालों को मंगवाया जाता है। ताकि किसी को भी यह जानकारी न हो सके कि ये टुंडे कबाब के लोग हैं और टुंडे कबाब का मसाला लेकर जा रहे हैं। जो यहां के कबाब में स्वाद है वह कहीं भी और पूरी दुनिया भर में किसी भी होटल या रेस्टोरेंट के कबाब में नहीं मिलता है।

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