Jharkhand Protest: जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने सरकार के साथ वार्ता के प्रस्ताव पर फिलहाल कोई फैसला नहीं लिया है। झारखंड सरकार ने बुधवार को प्रदर्शनकारी छात्रों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए मुख्यमंत्री आवास पर आमंत्रित किया है। ऐसे में छात्रों ने प्रस्ताव पर जवाब देने के लिए पहले दो घंटे का समय मांगा था, लेकिन तय समय पर जवाब नहीं पाए।
प्रदर्शनकारी छात्र कब देंगे जवाब?
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों में शामिल रविंद्र पासवान ने समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में कहा, ''एसडीओ के माध्यम से सरकार का संदेश मिला कि वह हमारे प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत करना चाहती है। हालांकि, आज तिरंगा यात्रा और बारिश की वजह से सभी छात्र देर से वापस लौटे, इसीलिए आज बातचीत संभव नहीं हो सकी।
उन्होंने बताया कि प्रतिनिधिमंडल में विशेषज्ञों का चयन करना है। इस संबंध में एसडीओ को सूचित कर दिया गया है कि बुधवार सुबह 10 बजे तक प्रतिनिधिमंडल को अंतिम रूप देकर सरकार को इसकी जानकारी दे दी जाएगी। उन्होंने कहा कि विपक्ष के कई नेता उनसे मिलने पहुंचे, लेकिन मुख्यमंत्री ने किसी मंत्री को भेजने के बजाय केवल एसडीओ के माध्यम से संदेश भिजवाया।''
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: हेमंत सोरेन ने आंदोलनकारी छात्रों को बातचीत के लिए बुलाया CM आवास, अभ्यर्थियों ने रखी ये शर्त, समय भी मांगा
रविंद्र पासवान ने कहा, ''मुख्यमंत्री को नैतिकता के आधार पर कम से कम एक मंत्री के द्वारा हमारा हालचाल पूछें और वार्ता की बात रखें, लेकिन एसडीओ के माध्यम से संदेश भेजा है। फिर भी हम इस पर विचार करके कल 10 बजे तक स्पष्ट कर देंगे।''
CCTV निगरानी में हो वार्ता
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार के साथ सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में या मीडिया की मौजूदगी में वार्ता होनी चाहिए, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे। हालांकि, जगह अभी तय नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को बुलाया गया है, लेकिन हम लोग तय करेंगे कि कितने लोग वार्ता के लिए जाएंगे।
छात्रों की क्या है मांग?
सनद रहे कि आंदोलनकारी 14वीं जेपीएससी परीक्षा रद्द करने, आयोग तथा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग में सुधार लागू करने की 25 जुलाई से मांग कर रहे हैं। वे परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच सीबीआई या राज्य से बाहर के हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों के स्वतंत्र पैनल से कराने की भी मांग कर रहे हैं।
