Gurugram Faridabad RRTS Route: गुरुग्राम से फरीदाबाद और आगे नोएडा तक प्रस्तावित नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर का रूट एक बार फिर समीक्षा के दायरे में है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) ने मौजूदा अलाइनमेंट पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि यदि एलिवेटेड रेल लाइन सेक्टर-29 से गुजरी तो उसकी कीमती जमीन और लीजर वैली पार्क को नुकसान हो सकता है। इसी को लेकर रूट में बदलाव की मांग की गई है।
राजीव चौक से शुरुआत या अंडरग्राउंड
16 दिसंबर को हुई बैठक में HSVP ने सुझाव दिया कि कॉरिडोर की शुरुआत राजीव चौक से की जाए या फिर IFFCO चौक से सेक्टर-53 की ओर जाने वाला हिस्सा भूमिगत बनाया जाए। HSVP का कहना है कि मौजूदा योजना में दो बड़े व्यावसायिक प्लॉट और हरित क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं, जो शहर के लिए अहम हैं।
NCRTC ने रखे वैकल्पिक अलाइनमेंट
नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने HSVP की आपत्तियों के बाद DPR में संशोधन किया है। हालांकि नए अलाइनमेंट से सेक्टर-29 की अधिकतर जमीन बच जाती है, फिर भी दो-तीन भूखंड प्रभावित हो रहे हैं। इसे देखते हुए NCRTC ने एक वैकल्पिक प्रस्ताव रखा है, जिसमें RRTS को गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड और बीआर अंबेडकर मार्ग से ले जाने की बात कही गई है। इससे ताऊ देवी लाल बायोडायवर्सिटी पार्क पूरी तरह बच जाएगा, लेकिन कॉरिडोर की लंबाई करीब 2.7 किलोमीटर बढ़ जाएगी। एक अन्य विकल्प में सेक्टर-29 रोड, जिमखाना क्लब के पीछे से होते हुए सेक्टर-53 तक कॉरिडोर को अंडरग्राउंड ले जाने का प्रस्ताव है। इससे HSVP की जमीन और हरित क्षेत्र सुरक्षित रहेंगे, लेकिन इससे परियोजना लागत में करीब 1,322 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है। इसी लागत बनाम पर्यावरण संतुलन पर मंथन जारी है।
15 हजार करोड़ की परियोजना, छह स्टेशन प्रस्तावित
करीब 61.5 किलोमीटर लंबे गुरुग्राम-फरीदाबाद-नोएडा RRTS कॉरिडोर की अनुमानित लागत 15,000 करोड़ रुपये है। ड्राफ्ट रिपोर्ट के अनुसार यह लाइन IFFCO चौक से शुरू होकर सेक्टर-54, फरीदाबाद के बाटा चौक और सेक्टर 85-86 से होते हुए नोएडा सेक्टर 142/168 तक जाएगी और आगे सूरजपुर के रास्ते जेवर एयरपोर्ट से जुड़ेगी। यह हरियाणा से गुजरने वाला तीसरा RRTS कॉरिडोर होगा।
अंतिम फैसला अभी बाकी
हरियाणा मास रैपिड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (HMRTC) के मुताबिक, ड्राफ्ट DPR अभी विचाराधीन है और सभी हितधारकों से फीडबैक लिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जमीन, लागत और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाते हुए शहर और यात्रियों के हित में सबसे बेहतर रूट चुना जाएगा।
