Faridabad News: फरीदाबाद की फॉरेस्ट लैंड से काट लिए 500 पेड़, अब कंपनी को चुकाने होंगे दस करोड़ रुपए

NGT Faridabad: एनजीटी ने कार्रवाई करते हुए पेड़ काटने पर एक कंपनी पर 10 करोड़ का जुर्माना लगा दिया है। कंपनी पर आरोप है कि उसने 500 पेड़ काट दिए हैं। अब कंपनी को जुर्माना देने के साथ-साथ काटे गए पेड़ों के दस गुना पेड़ कंपनी को लगाने होंगे। कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए जुर्माना लगाया है।

टाइम्स नाउ नवभारत

Updated Nov 19, 2022 | 07:57 PM IST

Faridabad News        500

फरीदाबाद में संरक्षित वनभूमि के 500 पेड़ काटने पर एनजीटी ने लगाया 10 करोड़ का जुर्माना

मुख्य बातें
  • प्रत्येक पेड़ पर एनजीटी ने लिया 2 लाख रुपए का जुर्माना
  • संरक्षित वनभूमि पर कंपनी को लगाना होगा दस गुना पेड़
  • सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए एनजीटी ने लगाया जुर्माना
NGT Action: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने फरीदाबाद में पांच एकड़ संरक्षित वन भूमि पर अवैध रूप से 500 से अधिक पेड़ों को काटने पर एक कंपनी पर कार्रवाई की है। कंपनी पर 10 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया गया है। एनजीटी ने इस सप्ताह की शुरुआत में पारित आदेश में कहा कि, उसने इस तरह के उल्लंघन के लिए प्रत्येक पेड़ का मूल्य 2 लाख रुपये लेते हुए मुआवजा तय किया है। एनजीटी के अनुसार, पेड़ों की कटाई और अन्य गतिविधियों नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में हैं। संरक्षित वनभूमि पर फिर से कंपनी की ओर से दस गुना पेड़ लगवाया जाएगा।
एनजीटी ने आदेश में कहा है कि पेड़ों की अवैध कटाई के लिए जुर्माना वसूला जाएगा। यह स्पष्ट है कि करीब 500 पेड़ काटे गए हैं। वन भूमि को फिर से हरा-भरा करने के लिए मुआवजा तो देना ही होगा साथ में कंपनी को तीन महीने के भीतर वन मंडल अधिकारी के परामर्श से दस गुना तक वनीकरण करना होगा। बता दें कि एनजीटी कंपनी की ओर से की गई लापरवाही से काफी नाराज है और कार्रवाई करने के मूड में है।

वन विभाग ने पहले भी दर्ज कराई है एफआईआर
मिली जानकारी के अनुसार फरीदाबाद के सराय ख्वाजा गांव में पेड़ों की कटाई के खिलाफ हैदराबाद की डेवलपर कंपनी के खिलाफ फरीदाबाद के एक निवासी ने याचिका दायर की थी। आवेदक ने कहा था कि एनजीटी के पहले के आदेश का उल्लंघन करते हुए पेड़ों को 'जंगल' मान लिया गया था और अपेक्षित मंजूरी के बिना पेड़ों को काटा गया। य़ाचिका में कहा गया है कि जनवरी 2020 में वन विभाग की ओर से एक प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई थी, लेकिन पेड़ों की कटाई जारी रही। अप्रैल 2022 में एनजीटी ने डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (फरीदाबाद), डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (फरीदाबाद) और स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी थी। 14 नवंबर के बाद रिपोर्ट मिलने पर कार्रवाई की गई है।

अनेक प्रकार के पेड़ों की हुई कटाई

एनजीटी के आदेश के अनुसार, विचाराधीन भूमि कृषि योग्य पहाड़ी क्षेत्र नहीं है। यह पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम की सामान्य धारा के तहत विभागीय वन अधिकारी की अनुमति के बिना पेड़ों की कटाई प्रतिबंधित है। विचाराधीन भूमि पर बिना अनुमति लिए वृक्षों की कटाई की गई। वन विभाग ने 10.01.2020 को सूरज कुंड पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराया था। फरीदाबाद के रेंज वन अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार मौके पर काटे गए पेड़ों की कुल संख्या में छोटे आकार के विविध प्रजातियों के 448 पेड़, विविध प्रजातियों के 43 पेड़ और एक सफेदा पेड़ शामिल हैं। एनजीटी ने काटे गए पेड़ों के क्षेत्र में विकास कार्यों पर प्रतिबंध लगा दिया है।
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