Delhi Meerut Expressway पर सफर करने वाले लाखों वाहन चालकों के लिए 15 अगस्त से ट्रैफिक नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अगर आप अभी से इन नियमों को नहीं जानेंगे तो 15 अगस्त के बाद आपको दिक्कत हो सकती है और भारी-भरकम चालान भी आपको भरना पड़ सकता है। इसलिए इन नियमों को अभी से ही अच्छे से जान लें। दरअसल NHAI पहले चरण में अक्षरधाम से सराय काले खां तक देश का पहला वेरिएबल स्पीड लिमिट सिस्टम लागू करने जा रहा है। इसके तहत दिन के अलग-अलग समय में ट्रैफिक की स्थिति के अनुसार कारों और भारी वाहनों की अधिकतम स्पीड लिमिट बदलेगी। अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य ट्रैफिक जाम कम करना और सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण पाना है।
नई व्यवस्था के तहत रात 12 बजे से सुबह 7 बजे तक कारों की अधिकतम स्पीड 65 किमी प्रति घंटा और भारी वाहनों की 50 किमी प्रति घंटा होगी। जबकि सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक कारों के लिए यह सीमा 55 किमी प्रति घंटा और भारी वाहनों के लिए 45 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई है। वहीं शाम 5 बजे से रात 12 बजे तक कारें अधिकतम 60 किमी प्रति घंटा और भारी वाहन 40 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकेंगे। अगर आपको स्पीड से जुड़े यह नियम याद नहीं रहते तो कोई बात नहीं, यहां बड़े-बड़े डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड लगाए गए हैं। भ्रम से बचने के लिए एक्सप्रेसवे पर लगे पुराने स्पीड साइनबोर्ड को ढक दिया गया है।
तीन महीने तक आकलन किया जाएगा
इस परियोजना पर काम कर रहे IIT रुड़की के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर सतीश चंद्र का कहना है कि यह देश में अपनी तरह का पहला प्रयोग है। उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों के 24 घंटे के ट्रैफिक डेटा का अध्ययन करने के बाद इन गति सीमाओं को तय किया गया है। अगले तीन महीने तक इसके प्रभाव का आकलन किया जाएगा, ताकि यह देखा जा सके कि इससे ट्रैफिक और सड़क सुरक्षा में कितना सुधार हुआ।
इस अध्ययन में सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI) ने एक्सप्रेसवे पर स्पेशल सेंसर लगाए हैं, जो वाहनों की आवाजाही का डेटा रिकॉर्ड कर रहे हैं। इसी वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर समयानुसार गति सीमा तय की गई है।
दिल्ली पुलिस ट्रैफिक पर नजर रखेगी
परियोजना को लागू करने वाली एजेंसी NHAI है, जबकि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस इसकी निगरानी करेगी। अधिकारियों के अनुसार, एक्सप्रेसवे के दिल्ली हिस्से में अक्षरधाम मंदिर और पांडव नगर फुटओवर ब्रिज के पास डिजिटल वेरिएबल स्पीड लिमिट डिस्प्ले बोर्ड लगाए गए हैं। इन बोर्डों पर समय के अनुसार लागू गति सीमा दिखाई जाएगी।
इसके अलावा पूरे कॉरिडोर पर स्पीड डिटेक्शन कैमरे भी लगाए जाएंगे। ये कैमरे उस समय प्रदर्शित स्पीड लिमिट के अनुसार अपने आप ओवरस्पीडिंग वाहनों की पहचान करेंगे और नियम उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। अधिकारियों का मानना है कि अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा, तो भविष्य में इसे अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर भी लागू किया जा सकता है।
