Delhi Dehradun Expressway को लेकर इन दिनों कई खबरें आ रही हैं। 14 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सड़क परियोजना का उद्घाटन किया था। लेकिन हाल ही में मुजफ्फरनगर जिले में शामली के पास एक्सप्रेसवे पर बड़े-बड़े गड्ढे देखे गए। हालांकि, वीडियो वायरल होने के बाद NHAI ने आनन-फानन में गड्ढे भर दिए। इसके बाद प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई। इसके बाद एक्सप्रेसवे की खामियों को लेकर कई दावे किए गए, लेकिन ज्यादातर दावे फर्जी ही साबित हुए। इसी तरह एक दावा यह भी किया गया कि Delhi-Dehradun Economic Corridor के गणेशपुर-देहरादून सेक्शन पर लैंडस्लाइड हो गया है। चलिए जानते हैं इस दावे की सच्चाई -
क्या वायरल दावा सही है?
दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे के गणेशपुर-देहरादून सेक्शन पर भूस्खलन का दावा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल पोस्ट में जो तस्वीर दिखाई जा रही है वह इसी एक्सप्रेसवे के गणेशपुर देहरादून सेक्शन की ही है। यानी जिस जगह को लेकर दावा किया जा रहा है, वह बिल्कुल सही है। तस्वीर में मलबा गिरा हुआ दिख रहा है, जो बिल्कुल सही है। ऐसे में एक्सप्रेसवे को लेकर कई लोग प्रश्न उठा रहे हैं।
NHAI ने बताई वायरल दावे की सच्चाई
इस तस्वीर के वायरल होने के बाद NHAI ने इस दावे को भ्रामक बताते हुए स्थिति को साफ किया है। NHAI का कहना है कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रही गतिविधि किसी दुर्घटना या भूस्खलन की नहीं, बल्कि पूर्व-निर्धारित इंजीनियरिंग कार्य की है। यानी तस्वीर बिल्कुल सही है, स्थान भी सही है, लेकिन NHAI यहां पहले से तय कार्य कर रहा है, जिसे लैंडस्लाइड बताकर अफवाह फैलाई जा रही है।
दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे पर क्या काम किया जा रहा है?
NHAI के मुताबिक, वीडियो में जिस स्थान को भूस्खलन बताया जा रहा है, वहां स्लोप स्टेबिलाइजेशन (Slope Stabilization) का काम 22 मई 2026 से नियोजित रूप से चल रहा है। इस कार्य का उद्देश्य पहाड़ी ढलानों को ज्यादा सुरक्षित बनाना, भविष्य में चट्टानों के खिसकने की आशंका को कम करना और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
रूट डायवर्ट कर पुराने मार्ग से गुजारी जा रही गाडियां
NHAI ने बताया कि इस कार्य के मद्देनजर 21 मई 2026 को ही सार्वजनिक ट्रैफिक एडवाइजरी जारी कर दी गई थी। इसके तहत 22 मई से अस्थायी रूप से यातायात डायवर्ट किया गया। सुरक्षा कारणों से देहरादून की ओर जाने वाले वाहनों को लगभग एक किलोमीटर पहले पुराने मार्ग से गुजारा जा रहा है।
NHAI ने दावे को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया
NHAI ने यह भी साफ किया कि वायरल वीडियो में दिखाई गई मिट्टी और पत्थरों की आवाजाही नियंत्रित एवं नियोजित निर्माण गतिविधि का हिस्सा है। इसका परियोजना की संरचनात्मक मजबूती या गुणवत्ता से कोई संबंध नहीं है। इसलिए इसे भूस्खलन या एक्सप्रेसवे की विफलता के रूप में प्रस्तुत करना तथ्यात्मक रूप से गलत है।
NHAI ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे किसी भी वीडियो या दावे पर भरोसा करने से पहले उसकी आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि कर लें। NHAI ने कहा कि अधूरी या भ्रामक जानकारी शेयर करने से भ्रम की स्थिति पैदा होती है, इसलिए सिर्फ सत्यापित जानकारी ही प्रसारित की जानी चाहिए।
