एमपी सीएम मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश लीडरशिप समिट से शासन में कुशलता और दक्षता आयेगी। यह मंत्रि-परिषद की नेतृत्व क्षमता को विकसित करने वाला कार्यक्रम है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में मध्यप्रदेश लीडरशिप समिट में मंत्रि-परिषद के दो दिवसीय प्रशिक्षण और ओरिएंटेशन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताई प्रशिक्षण की जरूरत
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य की मंत्रि-परिषद के निर्णय से प्रदेश की पूरी जनता प्रभावित होती है। इसलिए मंत्रि-परिषद के सदस्यों का समय-समय पर प्रशिक्षण आवश्यक है। प्रशिक्षण से शासन की बारीकियां सीखने का अवसर मिलेगा जिससे प्रशासन का काम और व्यवस्थित होगा और इसका सीधा लाभ मंत्रि-परिषद के निर्णयों के माध्यम से प्रदेश की जनता को मिलेगा।
'सीखने का मिलेगा अवसर'
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण से मंत्रि-परिषद के सदस्यों को भारत सरकार के मंत्रालयों और राज्य सरकार के विभागों के साथ तालमेल और समन्वय को सीखने का अवसर मिलेगा। वरिष्ठ जन-प्रतिनिधि और नीति आयोग के विशेषज्ञों के विचारों से मंत्रि-परिषद का आत्मविश्वास बढ़ेगा। इससे न सिर्फ शासन में बल्कि व्यक्तिगत जीवन को भी अनुशासित और सफल बनाने में मदद मिलेगी।
4 फरवरी को समिट का दूसरा दिन
लीडरशिप समिट के दूसरे दिन 4 फरवरी को सुबह 10 बजे से शाम 7:30 बजे तक विभिन्न सत्रों का आयोजन होगा। इनमें “विधायी कार्य-प्रणाली’’, “अवसर एवं चुनौतियां’’, “आकांक्षाएं एवं संकल्प-भारत सरकार की अहम पहल’’ एवं “प्रौद्योगिकी एवं सुशासन’’ विषय पर सत्रों का आयोजन होगा। इन सत्रों को विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, पंचायत एवं ग्रामीण विकास व श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, श्वेता सिंह, डॉ. विनय सहस्रबुद्धे, नगरीय आवास एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय संबोधित करेंगे।
