भोपाल

भोपाल के कोकता में लोगों ने किया चक्काजाम, 25 दिनों से पानी की दिक्कत झेल रहे हैं निवासी

भोपाल के बायपास पर स्थित कोकता क्षेत्र में पानी की कमी के खिलाफ स्थानीय निवासियों ने चक्काजाम किया। उनका आरोप है कि कोकता मल्टी में पिछले 25 दिनों से पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है।

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पानी की सप्लाई में दिक्कतों के चलते लोगों ने किया चक्काजाम (प्रतिकात्मक फोटो)

Bhopal News: शनिवार को भोपाल के बायपास स्थित कोकता इलाके में पानी की समस्या को लेकर स्थानीय निवासियों ने चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें पिछले 25 दिनों से पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। चक्काजाम कर रही महिलाओं ने बताया कि उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों से कई बार संपर्क किया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद निवासियों ने चक्का जाम का फैसला किया। सुबह साढ़े 9 बजे चक्काजाम शुरू हुआ, जो दोपहर 12.30 बजे तक चलता रहा। चक्काजाम में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।

पानी के अलावा भी हैं समस्याएं

कोकता मल्टी में निगम की टंकी से पानी का प्रेशर पर्याप्त नहीं है, जिससे निवासियों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बात केवल इतनी नहीं है, कोकता मल्टी में फ्लैट आवंटन के समय निगम द्वारा सीसीटीवी कैमरे और अन्य बुनियादी सुविधाओं का वादा किया गया था, लेकिन ये वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। सुरक्षा के भी पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। सुरक्षा के उपायों की कमी भी लोगों की नाराजगी का एक बड़ा कारण है। इस स्थिति के चलते, स्थानीय निवासियों को अपनी समस्याओं को उजागर करने के लिए सड़क पर उतरना पड़ा।

समझा बुझाकर खत्म कराया गया जाम

करीब तीन घंटे तक 100 से अधिक लोग अपनी मांगों को लेकर सड़क पर डटे रहे। हालात को संभालने के लिए नगर निगम और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों को आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद ही प्रदर्शन कर रहे लोग शांत हुए और सड़क से हटे।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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