श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बुधवार को कहा कि उनका प्रशासन केंद्र शासित प्रदेश के हर नागरिक के लिए शांति, समानता और आशापूर्ण ज़िंदगी सुनिश्चित करने के मकसद से आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने और इसके दोषियों को सज़ा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। वह आतंकवादियों द्वारा मारे गए नागरिकों के 37 परिजनों को नियुक्ति पत्र सौंपने के बाद एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उपराज्यपाल ने यहां कहा कि हम आतंकी नेटवर्क को खत्म करने, इसके दोषियों और मददगारों को सज़ा दिलाने तथा इस केंद्र शासित प्रदेश के हर नागरिक के लिए शांति, समानता और आशापूर्ण ज़िंदगी सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2019 में भेदभाव का साया हट गया तथा सामाजिक न्याय एवं समावेशी विकास के एक नए युग की शुरुआत हुई।
सिन्हा ने कहा कि आज जम्मू-कश्मीर नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और चहुंमुखी विकास से शांति और समृद्धि आ रही है। भेदभाव और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली व्यवस्था को खत्म करके, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह साफ कर दिया कि जम्मू-कश्मीर में समृद्धि के दीये सिर्फ कुछ खास महलों में ही नहीं, बल्कि गरीबों की झोपड़ियों में भी जलेंगे।
अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद बदले हालात
उन्होंने कहा कि आतंक प्रभावित जिन परिवारों को नियुक्ति पत्र मिल रहे हैं, वे 2019 में इसी दिन अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद आए इस नए आदेश से लाभ पाने वालों में शामिल हैं। उनके मामलों पर, जिनमें दशकों से देरी हो रही थी, आखिरकार कार्रवाई हुई है। यह नुकसान की क्षतिपूर्ति नहीं है, क्योंकि कोई भी पैसा, नौकरी या कागज़ किसी अपने की जगह नहीं ले सकता। लेकिन यह इस बात का भरोसा है कि देश उनके साथ खड़ा है और हम उनकी ज़िंदगी को फिर से बनाने और सम्मान बहाल करने में मदद करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
सिन्हा ने कहा कि अनुच्छेद 370 और 35ए की वजह से आतंक का समर्थक तंत्र बेखौफ होकर काम कर रहा था और उनका मकसद समाज को बांटना, डर फैलाना और उम्मीदों एवं सपनों को चकनाचूर करना था। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद, पड़ोसी देश और घाटी में सक्रिय आतंकी समर्थक तंत्र की कोशिशों को नाकाम कर दिया गया। जम्मू-कश्मीर के लोगों ने हिंसा के बजाय शांति, गलत सोच के बजाय शिक्षा, निर्भरता के बजाय रोज़गार और निराशा के बजाय सम्मान को चुना है।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को डर-मुक्त भविष्य मिलना चाहिए और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हम मिलकर ऐसा ही भविष्य बना रहे हैं। उपराज्यपाल ने कहा कि शिक्षा और रोज़गार से सशक्त युवा अलगाववाद और आतंकवाद से लड़ने में सक्षम होते हैं। आतंकवाद के पीड़ितों को न्याय दिलाने का काम तेज़ी और ईमानदारी से हो रहा है क्योंकि यह एक राष्ट्रीय ज़िम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि किसी भी शिकायत को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है और किसी भी परिवार को अनदेखा नहीं किया जाएगा क्योंकि न्याय में देरी से काफ़ी तकलीफ़ हुई है। उन्होंने कहा कि अब आतंकवाद के पीड़ितों के परिवारों को समय पर मानवीय, संवेदनशील और लगातार न्याय मिल रहा है। सिन्हा ने कहा कि पांच अगस्त 2019 के बाद, ’’हमने काफी हद तक आतंक समर्थक तंत्र को खत्म किया है, कानून-व्यवस्था को मजबूत किया है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन ने समान अधिकार बहाल किए हैं और ऐसे मौके पैदा किए हैं जिनसे परिवार आत्मविश्वास के साथ अपनी ज़िंदगी फिर से शुरू कर सकें। उन्होंने कहा, ’’आज जम्मू-कश्मीर में जो बदलाव दिख रहा है, वह पांच अगस्त 2019 के ऐतिहासिक बदलावों की वजह से है। उस दिन केंद्र-शासित प्रदेश के लिए एक संवैधानिक सुधार और नई शुरुआत हुई थी।
