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क्यों आई IT स्टॉक्स में तबाही, क्या है Anthropic AI का नया टूल जिसने अमेरिका से भारत तक दहशत फैलाई?

IT Stocks में भारी तबाही देखने को मिली है। मंगलवार को अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों में आईटी कंपनियों में 300 अरब डॉलर से ज्यादा की बिकवाली हुई है। वहीं, बुधवार को यही पैटर्न भारतीय बाजार में जारी है, जिससे Nifty IT 5% गिर चुका है। क्यो आई ये तबाही जानें।

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क्यों बढ़ा आईटी कंपनियों के लिए खतरा

Why IT Stocks Down Today: भारत सहित दुनियाभर के शेयर बाजारों में IT Stocks में भारी बिकवाली हो रही है। मंगलवार को अमेरिका और यूरोप के बाजारों में आई भारी बिकवाली से एक ही दिन में करीब 300 अरब डॉलर यानी करीब 2.70 लाख करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू साफ हो गई। इसका असर भारतीय बाजार पर भी दिखा और Nifty IT इंडेक्स में 5% से ज्यादा की तेज गिरावट आई।

कितना गिरा NIFTY IT?

निफ्टी आईटी में फिलहाल ताबाही जैसी स्थिति बनी हुई है। TCS, Infosys, HCL Tech, Wipro और Tech Mahindra जैसे दिग्गज शेयर दबाव में हैं। पूरा इंडेक्स 5.89 फीसदी तक गिर चुका है। एक दिन में ही निफ्टी आईटी के मार्केट कैप में करीब 90 हजार करोड़ रुपये की कमी आई है।

शेयरगिरावट (₹)% गिरावट
Infosys-773.94-6.92%
Coforge-129.52-6.29%
Persistent Systems-153.16-6.24%
LTIMindtree-121.24-6.08%
Mphasis-65.62-5.67%
TCS-452.96-5.53%
Tech Mahindra-206.64-5.27%
HCL Tech-224.27-4.99%
Wipro-97.97-3.97%
OFSS-23.36-3.54%

क्यों आई भारी गिरावट?

Bloomberg और WSJ की रिपोर्ट के मुताबिक IT Stocks में गिरावट की सबसे बड़ी वजह Anthropic के नए AI टूल हैं। इन रिपोर्ट्स में बताया गया है कि निवेशकों को डर है कि तेजी से विकसित हो रहे AI टूल पारंपरिक सॉफ्टवेयर और IT कंपनियों के बिजनेस मॉडल को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर IT कंपनियों के मार्केट कैप में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

गिरावट की शुरुआत कहां से हुई

बिकवाली की शुरुआत अमेरिका से हुई, जहां निवेशकों ने सॉफ्टवेयर और डेटा सर्विस कंपनियों के शेयरों में तेज बिकवाली शुरू कर दी। इसकी वजह बनी AI कंपनी Anthropic की नई घोषणा, जिसमें उसने अपने AI असिस्टेंट में ऐसे टूल जोड़े जो लीगल रिसर्च, कॉन्ट्रैक्ट ड्राफ्टिंग और डेटा एनालिसिस जैसे काम अपने आप कर सकते हैं। निवेशकों को डर है कि अगर AI ऐसे जटिल काम खुद करने लगेगा तो कई पारंपरिक सॉफ्टवेयर कंपनियों का बिजनेस मॉडल खतरे में पड़ सकता है।

अमेरिकी बाजार में कितना बड़ा असर

मंगलवार को अमेरिकी बाजारों में सॉफ्टवेयर और डेटा सर्विस कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। कई बड़ी कंपनियों के शेयर 10–20% तक गिर गए और सॉफ्टवेयर सेक्टर को ट्रैक करने वाले ETF भी कई दिनों की लगातार गिरावट में चले गए। सिर्फ एक दिन में करीब 300 अरब डॉलर की मार्केट वैल्यू साफ हो गई, जो बताती है कि डर कितना गहरा था।

कंपनीटिकरगिरावट (%)
LegalZoomLZ-19.68%
Thomson ReutersTRI-15.83%
Expedia GroupEXPE-15.26%
London Stock Exchange GroupLSEG-12.80%
EPAM SystemsEPAM-12.87%
EquifaxEFX-12.11%
IntuitINTU-10.89%
PayPalPYPL-20.31%
AdobeADBE-7.31%
SalesforceCRM-6.85%

आखिर Anthropic ने ऐसा क्या लॉन्च किया

Anthropic ने अपने AI प्लेटफॉर्म में ऐसे प्लगइन्स जोड़े हैं जो उद्योग-विशेष कामों को ऑटोमेट कर सकते हैं। मिसाल के तौर पर उसका नया लीगल टूल कॉन्ट्रैक्ट पढ़ सकता है, क्लॉज समझ सकता है और लीगल नोट्स तैयार कर सकता है। भविष्य में ऐसे ही टूल फाइनेंस, कस्टमर सर्विस, डेटा एनालिटिक्स और एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर के क्षेत्रों में भी आ सकते हैं। यही वह बिंदु है जहां निवेशक घबरा गए हैं, क्योंकि यह सीधे सॉफ्टवेयर कंपनियों के बिजनेस मॉडल को चुनौती देता दिख रहा है।

निवेशकों को किस बात का डर?

सॉफ्टवेयर कंपनियों का पूरा बिजनेस इस बात पर टिका है कि कंपनियों को उनके सॉफ्टवेयर और सिस्टम की जरूरत पड़ती है। लेकिन अगर AI इतनी तेजी से विकसित होता है कि कंपनियां खुद अपने टूल्स और एप्लिकेशन बना सकें, तो महंगे सॉफ्टवेयर लाइसेंस और सिस्टम पर खर्च कम हो सकता है। यही वजह है कि निवेशक उन कंपनियों से पैसा निकाल रहे हैं जिनका बिजनेस AI से प्रभावित हो सकता है।

Anthropic AI Impact

Anthropic AI Impact

भारतीय IT शेयर क्यों गिरे

भारतीय IT कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा अमेरिका और यूरोप से आता है। अगर वहां की कंपनियां खर्च कम करती हैं या सॉफ्टवेयर निवेश घटाती हैं तो भारतीय IT कंपनियों की ग्रोथ पर असर पड़ सकता है। इसी डर से विदेशी निवेशकों ने भारतीय IT शेयरों में भी बिकवाली शुरू कर दी और Nifty IT इंडेक्स दबाव में आ गया।

क्या सच मेंखतरे में है IT कंपनियों का बिजनेस

जाहिर है इस सवाल का कोई स्पष्ट जवाब नहीं हो सकता है। क्योंकि, सॉफ्टवेयर कंपनियों का कहना है कि केवल कोड लिखना ही उनका काम नहीं है। वे डेटा सिक्योरिटी, सिस्टम इंटीग्रेशन, क्लाउड मैनेजमेंट और एंटरप्राइज सॉल्यूशंस भी देती हैं, जिन्हें बदलना इतना आसान नहीं होगा। कई विशेषज्ञों का मानना है कि AI सॉफ्टवेयर कंपनियों का दुश्मन नहीं बल्कि सहयोगी भी बन सकता है, क्योंकि इससे प्रोडक्टिविटी बढ़ सकती है।

बाजार की दूसरी बड़ी चिंता

AI इन्फ्रास्ट्रक्चर पर कंपनियां अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं। लेकिन निवेशकों को अभी साफ नहीं दिख रहा कि यह खर्च कब और कैसे मुनाफे में बदलेगा। हाल ही में बड़ी टेक कंपनियों के नतीजों में क्लाउड ग्रोथ थोड़ी धीमी दिखी, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।

अब कहां है बाजार की नजर?

  • क्या कंपनियां AI टूल्स से खर्च बचा रही हैं या बिजनेस बढ़ा रही हैं।
  • सॉफ्टवेयर कंपनियां AI को अपने बिजनेस में कितनी तेजी से शामिल कर पाती हैं।
  • IT कंपनियों के ऑर्डर बुक और गाइडेंस पर क्या असर पड़ता है।
  • अगर कंपनियां AI को अवसर में बदल पाती हैं तो गिरावट रुक सकती है, वरना अस्थिरता जारी रह सकती है।

निवेशकों के लिए क्या संकेत

फिलहाल बाजार का रुख साफ है कि निवेशक उन कंपनियों से दूरी बना रहे हैं जिन्हें AI से खतरा दिख रहा है। लेकिन इतिहास बताता है कि हर नई तकनीक पहले डर पैदा करती है, फिर नए अवसर भी देती है। ऐसे में लंबी अवधि के निवेशक गिरावट को अवसर की तरह भी देख सकते हैं, जबकि अल्पकाल में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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