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Global Investing का फॉर्मूला; देविना मेहरा ने बताया भारत से बाहर निवेश क्यों जरूरी?

अगर आपके पोर्टफोलियो में ऐसे फंड या स्टॉक्स का एक्सपोजर नहीं हैं, जो भारत से बाहर के हैं, तो यह चिंता की बात हो सकती है। क्योंकि, पोर्टफोलियो के लिए ग्लोबल एक्सपोजर बेहद जरूरी है।

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ग्लोबल निवेश से खुलेंगे बेहतर अवसर

Global Investing : भारतीय निवेशकों के लिए शेयर बाजार और फिक्स्ड डिपॉजिट सबसे पसंदीदा निवेश विकल्पों में शामिल हैं। लेकिन, क्या सिर्फ भारत में निवेश करना ही पर्याप्त है? First Global की फाउंडर और दिग्गज निवेशक देविना मेहरा के मुताबिक, पोर्टफोलियो में ग्लोबल इन्वेस्टिंग को जगह देना सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि लंबी अवधि की वेल्थ प्लानिंग का जरूरी हिस्सा है।

करेंसी रिस्क को समझें

मेहरा का कहना है कि विदेश में निवेश का फैसला सिर्फ इसलिए नहीं होना चाहिए कि पिछले कुछ दिनों में भारतीय शेयर बाजार ने फिक्स्ड डिपॉजिट जितना भी रिटर्न नहीं दिया। यह किसी खास बाजार के कमजोर या मजबूत प्रदर्शन पर आधारित फैसला नहीं है। इसके पीछे दो बड़े कारण हैं। पहला, करेंसी रिस्क और दूसरा कंसंट्रेशन रिस्क।

पूरा पैसा एक ही बाजार में क्यों?

मेहरा लंबे समय से इस बात पर जोर देती रही हैं कि किसी भी निवेशक के पोर्टफोलियो का सबसे बड़ा हिस्सा सिर्फ एक देश में होना जोखिम बढ़ाता है। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से आगे बढ़ रहा है। लेकिन, ग्लोबल इक्विटी मार्केट में भारत की हिस्सेदारी अब भी बहुत छोटी है। ऐसे में सिर्फ भारत की कंपनियों में अपनी पूरी संपत्ति लगाना एक निवेशक के तौर पर आपको एक ही अर्थव्यवस्था, एक ही बाजार और एक ही करेंसी पर निर्भर बना देता है।

वित्तीय संकट से सीखा सबक

मेहरा दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के 1997 के वित्तीय संकट का उदाहरण देते हुए बताती हैं कि मजबूत ग्रोथ वाली अर्थव्यवस्थाओं के बाजार भी बेहद तेज गिरावट का सामना कर सकते हैं। यानी किसी देश की ग्रोथ स्टोरी अच्छी होना इस बात की गारंटी नहीं है कि वहां का शेयर बाजार हमेशा अच्छा प्रदर्शन करेगा। भारत के मामले में भी पिछले कुछ दिनों में यही देखने को मिल रहा है।

रुपये की कमजोरी भी बड़ा जोखिम

ग्लोबल निवेश के पीछे दूसरा बड़ा कारण रुपये और डॉलर का अंतर है। मेहरा ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि, जब उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी, तब डॉलर करीब ₹12 का था। बाद के वर्षों में यह स्तर काफी ऊपर चला गया। इसका मतलब यह है कि अगर किसी परिवार के भविष्य के खर्च डॉलर में हैं, जैसे विदेश में पढ़ाई, यात्रा या विदेश में रहने वाले बच्चों की जरूरतें, तो सिर्फ रुपये में संपत्ति रखना जोखिम पैदा कर सकता है।

डाइवर्सिफिकेशन जरूरी

विदेशी एसेट्स में निवेश ऐसे निवेशकों के लिए करेंसी डाइवर्सिफिकेशन का काम कर सकता है, जिन्हें रुपये के रिस्क से सीधा असर पड़ता है। हालांकि, डॉलर आधारित निवेश में भी बाजार और करेंसी दोनों तरह के जोखिम होते हैं। मेहरा के मुताबिक ग्लोबल निवेश को पूरा पोर्टफोलियो बदलने के तौर पर नहीं देखना चाहिए। निवेशक अपनी जरूरत, उम्र, जोखिम लेने की क्षमता और निवेश की अवधि के हिसाब से धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय निवेश बढ़ा सकते हैं। इसे एक जरूरी डाइवर्सिफिकेशन के तौर पर देखना चाहिए।

कितना पैसा विदेश में लगाएं?

कई निवेश विशेषज्ञ लंबी अवधि में 30-40% तक ग्लोबल एक्सपोजर की बात करते हैं, लेकिन यह हर निवेशक के लिए एक जैसा सही अनुपात नहीं हो सकता। भारत का निवासी व्यक्ति मौजूदा नियमों के तहत लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम यानी (LRS) जरिये हर वित्त वर्ष में USD 250,000 तक विदेश भेज सकता है। इस सीमा के भीतर अनुमत करेंट और कैपिटल अकाउंट ट्रांजैक्शन किए जा सकते हैं।

पैसे को बाहर जाने दें

मेहरा की बात का सबसे अहम हिस्सा यही है कि ग्लोबल निवेश का मतलब भारतीय बाजार से दूरी बनाना नहीं है। भारत की ग्रोथ स्टोरी अब भी मजबूत है। लेकिन, एक मजबूत भारतीय पोर्टफोलियो के साथ अमेरिका और दूसरे बड़े बाजारों में निवेश करने से अलग-अलग अर्थव्यवस्थाओं, सेक्टरों और करेंसी में एक्सपोजर मिल सकता है। लंबी अवधि में असली लक्ष्य किसी एक बाजार को चुनना नहीं, बल्कि ऐसा पोर्टफोलियो बनाना है, जो किसी एक देश, एक करेंसी या एक आर्थिक चक्र पर पूरी तरह निर्भर न हो।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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