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QR कोड के कोनों पर क्यों बने होते हैं ये तीन डिब्बे?

आज डिजिटल पेमेंट से लेकर लिंक खोलने तक हम रोजाना QR कोड का इस्तेमाल करते हैं। इसके तीन कोनों पर बने डिब्बों को 'फाइंडर पैटर्न्स' कहते हैं, जो स्कैनर को सही दिशा बताकर किसी भी एंगल से तेजी से स्कैन करने में मदद करते हैं।

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QR Code Secret

आज के डिजिटल दौर में डिजिटल पेमेंट करने से लेकर किसी वेबसाइट की लिंक खोलने तक, हम रोजाना दर्जनों बार QR कोड को स्कैन करते हैं। चाहे किराना दुकान हो या कोई बड़ा शॉपिंग मॉल, सफेद बैकग्राउंड पर बने काले बिंदु (Dots) और उनके तीन कोनों पर नजर आने वाले बड़े डिब्बे (Squares) अब हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हर क्यूआर कोड के तीन कोनों पर ये डिब्बे क्यों बनाए जाते हैं, और चौथा कोना खाली क्यों छोड़ दिया जाता है? दरअसल, इन तीन डिब्बों को तकनीकी भाषा में "Position Detection Patterns" या "Finder Patterns" कहा जाता है। इनका मुख्य काम स्कैनर (जैसे आपका स्मार्टफोन कैमरा या स्कैनर मशीन) को यह बताना होता है कि QR कोड किस दिशा में स्थित है और इसे कहां से पढ़ना शुरू करना है।

कैसे काम करती है यह पोजीशन डिटेक्शन तकनीक?

जब आप अपने फोन के कैमरे से किसी QR कोड को स्कैन करते हैं, तो फोन का सेंसर सबसे पहले इन्हीं तीन बड़े डिब्बों को पहचानता है। ये डिब्बे स्कैनर को कोड की सटीक लोकेशन, एंगल और दूरी की जानकारी देते हैं। इन तीन डिब्बों की वजह से आपका स्मार्टफोन QR कोड को किसी भी दिशा चाहे सीधा हो, उल्टा हो या तिरछा 360 डिग्री में आसानी से स्कैन कर लेता है। अगर ये डिब्बे न हों, तो कैमरे को यह समझ ही नहीं आएगा कि कोड का ऊपरी हिस्सा कौन सा है और निचला हिस्सा कौन सा, जिससे स्कैनिंग में काफी समय लगेगा या एरर आने लगेगा।

चौथे कोने को खाली क्यों रखा जाता है?

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि जब तीन कोनों में डिब्बे हैं, तो चौथे कोने को खाली क्यों छोड़ा गया या वहां चौथा डिब्बा क्यों नहीं बनाया गया? इसका सीधा जवाब है डायरेक्शन यानी दिशा का सही संतुलन। अगर चारों कोनों पर एक जैसे डिब्बे बना दिए जाएं, तो स्कैनर मशीन यह तय नहीं कर पाएगी कि कोड किस तरफ से सीधा है और किस तरफ से उल्टा। तीन डिब्बे होने की वजह से स्कैनर को एक त्रिकोण (Triangle) जैसा रेफरेंस पॉइंट मिलता है, जिससे वह पलक झपकते ही कोड के ओरिएंटेशन को समझ जाता है और चौथा खाली कोना उसे कोड का सही संरेखण (Alignment) तय करने में मदद करता है।

बारकोड से कितना अलग और सुरक्षित है QR कोड?

QR कोड (Quick Response Code) का आविष्कार वर्ष 1994 में जापान की 'डेन्सो वेव' (Denso Wave) नाम की कंपनी के इंजीनियर मासाहिरो हारा ने किया था। इससे पहले केवल पारंपरिक बारकोड (Barcodes) का इस्तेमाल होता था, जिसमें सीधी काली-सफेद पट्टियां होती थीं। बारकोड में सिर्फ एक दिशा (1D) में सीमित जानकारी ही स्टोर की जा सकती थी और अगर बारकोड थोड़ा सा भी खराब हो जाता था, तो वह स्कैन नहीं होता था। इसके विपरीत, QR कोड में दो दिशाओं (2D - हॉरिजॉन्टल और वर्टिकल) में डेटा स्टोर होता है। इन तीन डिब्बों और एडवांस एरर-करेक्शन तकनीक के कारण यदि QR कोड थोड़ा गंदा, मुड़ा हुआ या 30% तक क्षतिग्रस्त (Damaged) भी हो जाए, तब भी यह आसानी से स्कैन हो जाता है। यही वजह है कि आज तेज और सुरक्षित डिजिटल ट्रांजेक्शन के लिए QR कोड दुनिया भर में पहली पसंद बना हुआ है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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