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क्रूड ऑयल में फिर मचेगा हाहाकार! होर्मुज में टैक्स वसूलेगा अमेरिका? ट्रंप के अल्टीमेटम से हड़कंप

होर्मुज को लेकर फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान के होर्मुज बंद करने के ऐलान बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टोल वसूली का ऐलान किया है।

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होर्मुज जलडमरूमध्य

होर्मुज का जिन्न फिर बाहर आ गया है। ईरान ने घोषणा की है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर बंद कर रहा है, क्योंकि इजरयल ने लेबनान पर हमला कर संघर्ष-विराम का उल्लंघन किया है। वहीं, दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को धमकी दी कि अगर 60 दिनों के अंदर ईरान के साथ कोई पक्का समझौता नहीं हुआ, तो वे होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी टोल लागू कर देंगे। कैंप डेविड में वीकेंड बिता रहे ट्रंप ने इस बात पर जो दिया कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के शुरुआती समझौते में इस अहम जलमार्ग से 60 दिनों तक बिना टोल के आने-जाने की बात कही गई है।

ईरान के साथ हुए समझौते (मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग) में होर्मुज जलडमरूमध्य में टोल के मुद्दे को जिस तरह से निपटाया गया है, उसे लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति को देश के भीतर काफी आलोचना का सामना करना पड़ा है। यह समझौता सिर्फ 60 दिनों तक बिना टोल के आने-जाने की सुविधा देता है और भविष्य में फीस लगाने की संभावना को खत्म नहीं करता है। जानकारों का कहना है कि जिस तरह के हालात फिर बन रहे हैं, वह होर्मुज संकट को बढ़ा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो कच्चे तेल की कीमत में फिर बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। इसका असर पूरी दुनिया पर होगा। दुनियाभर में महंगाई बढ़ेगी।

ग्लोबल ऑयल सप्लाई की लाइफलाइन है होर्मुज

होर्मुज जलडमरूमध्य ग्लोबल ऑयल सप्लाई की लाइफलाइन है। दुनिया का लगभग 25% कच्चा तेल (Crude Oil) इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, यूएई, इराक, कुवैत और कतर जैसे बड़े तेल उत्पादक देश इसी रूट के जरिए अपना तेल दुनिया भर में भेजते हैं। अगर यह रास्ता फिर बंद होता है तो पूरी दुनिया में तेल और गैस की की भारी किल्लत हो जाएगी। इससे कीमतें फिर उछलेंगी।

ट्रंप के बयान से कच्चे तेल में उछाल संभव

जानकारों का कहना है कि ट्रंप द्वारा होर्मुज टोल टैक्स वसूली के बयान से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है। आने वाले दिनों में अगर ईरान और अमेरिका में शांति समझौते का हल नहीं निकला तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें आसानी से $95 से $105 प्रति बैरल या उससे भी ऊपर जा सकती हैं। होर्मुज में तनाब बढ़ने से समुद्री जहाजों का बीमा और माल ढुलाई का खर्च (Freight Charges) कई गुना बढ़ जाएगा, जिससे हर चीज महंगी हो जाएगी।

भारत के लिए क्यों बड़ा सिरदर्द?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, और इसमें से एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी होर्मुज के रास्ते से होकर भारत के बंदरगाहों तक पहुंचता है। कच्चा तेल महंगा होने से भारत में पेट्रोल-डीजल का आयात बिल बढ़ेगा। तेल खरीदने के लिए भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने होंगे, जिससे डॉलर की मांग बढ़ेगी और भारतीय रुपया और कमजोर हो सकता है।

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