Tata Sons Chairman Salary : टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 158.66 करोड़ रुपये का पारिश्रमिक (सैलरी और अन्य भुगतान) मिला है। कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, यह अब तक का उनका सबसे अधिक सालाना पारिश्रमिक है। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में उन्हें 155.81 करोड़ रुपये मिले थे। यानी इस बार उनकी कुल कमाई में करीब 2.85 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
अब तक का सबसे बड़ा पे पैकेज
टाटा संस ने वर्ष 2022 से अपने टॉप अधिकारियों के पारिश्रमिक का सार्वजनिक खुलासा करना शुरू किया है। तब से लेकर अब तक यह चंद्रशेखरन का सबसे अधिक सालाना भुगतान है। पिछले पांच वर्षों में उन्होंने कंपनी से कुल 671.4 करोड़ रुपये का पारिश्रमिक प्राप्त किया है। इससे साफ है कि टाटा समूह में उनकी भूमिका लगातार मजबूत होती गई है और कंपनी के प्रदर्शन के आधार पर उन्हें बड़ा भुगतान मिलता रहा है।
वेतन और कमीशन में मिला भुगतान
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक सालाना रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में मिले कुल 158.66 करोड़ रुपये में से 17.97 करोड़ रुपये वेतन, भत्ते और अन्य लाभ के रूप में मिले। वहीं 140.69 करोड़ रुपये उन्हें कंपनी के मुनाफे से जुड़े कमीशन के तौर पर दिए गए। खास बात यह है कि कमीशन की यह राशि पिछले वित्त वर्ष के बराबर रही, जबकि कुल पारिश्रमिक में मामूली बढ़ोतरी वेतन और अन्य लाभों की वजह से हुई।
देश के सबसे अधिक वेतन पाने वाले कॉरपोरेट लीडर्स में शामिल
इतनी बड़ी कमाई के साथ एन चंद्रशेखरन भारत के सबसे अधिक वेतन पाने वाले कॉरपोरेट अधिकारियों में शामिल हो गए हैं। हालांकि इस लिस्ट में उनसे आगे भी कुछ बड़े नाम हैं। उदाहरण के लिए, एचसीएल टेक के सीईओ सी. विजयकुमार को वित्त वर्ष 2025-26 में 176 करोड़ रुपये का पारिश्रमिक मिला। वहीं पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के सीईओ संदीप कालरा ने वित्त वर्ष 2024-25 में 148 करोड़ रुपये कमाए थे। इसके अलावा हीरो मोटोकॉर्प के कार्यकारी चेयरमैन पवन मुंजाल को 2025-26 में 122 करोड़ रुपये का पारिश्रमिक मिला।
सीएफओ सौरभ अग्रवाल रहे दूसरे सबसे अधिक वेतन पाने वाले अधिकारी
टाटा संस के मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) और कार्यकारी निदेशक सौरभ अग्रवाल कंपनी में दूसरे सबसे अधिक पारिश्रमिक पाने वाले अधिकारी रहे। उन्हें वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 33.69 करोड़ रुपये मिले। इसमें 26 करोड़ रुपये मुनाफे से जुड़ा कमीशन शामिल है। इससे पता चलता है कि कंपनी अपने शीर्ष प्रबंधन को प्रदर्शन के आधार पर आकर्षक भुगतान करती है।
अन्य बोर्ड सदस्यों ने नहीं लिया पारिश्रमिक
कंपनी की सालाना रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बोर्ड के अन्य सात सदस्यों को बैठक में शामिल होने के लिए मिलने वाले शुल्क (सिटिंग फीस) के अलावा कोई अलग पारिश्रमिक नहीं दिया गया। वहीं निदेशक वेणु श्रीनिवासन ने इस बार भी कोई कमीशन नहीं लिया। उन्होंने टाटा संस के बोर्ड में शामिल होने के बाद से चली आ रही परंपरा को जारी रखते हुए अतिरिक्त भुगतान लेने से इनकार किया।
शेयरधारकों के लिए बड़े लाभांश की सिफारिश
टाटा संस के निदेशक मंडल ने कंपनी के शेयरधारकों के लिए प्रति शेयर 1,10,717 रुपये के लाभांश (डिविडेंड) की सिफारिश की है। हालांकि इस प्रस्ताव को अभी शेयरधारकों की मंजूरी मिलनी बाकी है। मंजूरी मिलने के बाद पात्र निवेशकों को यह लाभांश दिया जाएगा।
क्या है इसका मतलब?
टाटा संस भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक है और उसकी कई प्रमुख लिस्टेड कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी है। कंपनी के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन का असर टॉप अधिकारियों के पारिश्रमिक पर भी दिखाई देता है। एन. चंद्रशेखरन का रिकॉर्ड 158.66 करोड़ रुपये का पारिश्रमिक इस बात का संकेत है कि कंपनी प्रदर्शन आधारित भुगतान व्यवस्था को प्राथमिकता देती है। वहीं, बड़े लाभांश की सिफारिश यह भी दिखाती है कि कंपनी अपने शेयरधारकों को बेहतर रिटर्न देने की स्थिति में है।
