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Silver Crash Explained: औंधे मुंह गिरे दाम, 24 घंटे में 1 लाख सस्ती हुई चांदी, गिरावट के ये 5 कारण?

महज 24 घंटे के भीतर चांदी के दाम में करीब 1 लाख की गिरावट आ चुकी है। गुरुवार को वायदा कारोबार में चांदी का भाव 4.20 लाख प्रति किलो तक पहुंच गया। वहीं, शुक्रवार को 15 फीसदी से ज्यादा की गिरावट के साथ MCX पर चांदी के फ्यूचर कॉन्ट्रॅक्ट्स का भाव 3.39 लाख प्रति किलो हो गया है।

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चांदी में भारी गिरावट

Why Silver Price Crash Today: शुक्रवार को चांदी के दाम में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। इंट्रा डे कारोबार में ही चांदी का भाव 50,076 रुपये तक घट गया है। शुक्रवार को MCX पर 5 मार्च की एक्सपायरी वाले सिल्वर के फ्यूचर कॉन्ट्रॅक्ट्स का कारोबार 383,898 रुपये प्रति किलो पर शुरू हुआ। कारोबार की शुरुआत में चांदी में हल्की रिकवरी देखने को मिली और भाव 389,986 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया। हालांकि, इसके बाद दोपहर बार अचानक भारी बिकवाली शुरू हुई और भाव करीब 15% गिरावट के साथ 339,910 रुपये प्रति किलो तक गिर गए। कमोडिटी मार्केट के साथ गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में भी भारी गिरावट आई है।

24 घंटे में आई तबाही

गुरुवार को MCX पर 5 मार्च के सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट का भाव 4.20 लाख रुपये प्रतिकिलो तक पहुंच गया था। इस तरह महज 24 घंटे के भीतर सिल्वर के दाम में 1 लाख रुपये के करीब गिरावट आ चुकी है। इससे पहले गुरुवार को भारतीय बाजार के बंद होने के बाद Comex पर चांदी के फ्यूचर में 12% के करीब गिरावट देखने को मिली थी।

Silver Price crash

Silver Price crash

गिरावट की 5 वजह?

महज 24 घंटे के भीतर चांदी के दाम में तेज भूचाल आ गया है। फ्यूचर और स्पॉट दोनों ही मामलों में चांदी फ्री फॉल मोड में गिर रही है। चांदी आई इस गिरावट से निवेशकों और ट्रेडर्स में हड़कंप मच गया है। केडिया एडवाइजरी ने अपनी एक रिपोर्ट में इस गिरावट के पीछे की कई वजह बताई हैं। केडिया एडवाइजरी के अजय केडिया के मुताबिक गिरावट के पीछे बड़ी वजह मुनाफावसूली है।

  1. रिकॉर्ड हाई के बाद मुनाफावसूली ने पलटा ट्रेंड : पिछले कुछ सत्रों में चांदी ने तेज रैली दिखाई थी और गोल्ड-सिल्वर रेश्यो के हिसाब से चांदी का भाव ओवरबॉट जोन में पहुंच गए थे। 4.20 लाख रुपये के स्तर के आसपास पहुंचते ही बड़े खिलाड़ियों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। ऊंचे स्तरों पर पुष्ट खरीद नहीं मिलने से गिरावट और तेज हो गई।
  2. लॉन्ग अनवाइंडिंग से बढ़ा दबाव : MCX डेटा के मुताबिक चांदी में Long Unwinding देखने को मिला। यानी कीमत गिरने के साथ ओपन इंटरेस्ट भी घटा। इसका साफ मतलब है कि जिन ट्रेडर्स ने ऊंचे स्तर पर लॉन्ग पोजीशन बनाई थी, वे तेजी से बाहर निकले। लॉन्ग अनवाइंडिंग अक्सर तेज और अचानक गिरावट को जन्म देती है।
  3. ग्लोबल संकेत कमजोर: अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर इंडेक्स में मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया। चांदी, जो इंडस्ट्रियल मेटल भी है, ग्लोबल ग्रोथ को लेकर चिंता बढ़ते ही ज्यादा संवेदनशील हो जाती है। जैसे ही रिस्क-ऑफ मूड आया, सिल्वर में बिकवाली तेज हो गई।
  4. मार्जिन कॉल और स्टॉप लॉस ट्रिगर: तेज गिरावट के दौरान कई पोजीशनों पर स्टॉप लॉस ट्रिगर हुए। इसके साथ ही मार्जिन कॉल के दबाव में मजबूरी की बिकवाली भी सामने आई। इसने गिरावट को और गहरा कर दिया, खासकर इंट्राडे और हाई-लीवरेज पोजीशनों में।
  5. तकनीकी स्तर टूटते ही आई स्लाइड: तकनीकी चार्ट पर 3.80 लाख और 3.65 लाख रुपये प्रति किलो के अहम सपोर्ट टूटते ही सेलिंग का दबाव बढ़ गया। सपोर्ट ब्रेकडाउन के बाद एल्गो और शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग सिस्टम्स ने भी बिकवाली के संकेत दिए, जिससे भाव सीधे 3.40 लाख के पास आ गए।
  6. यूएस फेड चेयर की नियुक्ति: ग्लोबल बुलियन मार्केट में तनाव के बड़े कारणों में अमेरकी केंद्रीय बैंक यूएस फेड के चेयरपर्सन की नियुक्ति भी है। माना जा रहा है कि ट्रंप पूर्व फेड चेयर रह चुके केविन वार्श को नियुक्त करने जा रहे हैं, जो हॉकिश पॉलिसी के पक्षधर हैं, जिसकी वजह से गोल्ड-सिल्वर में बिकवाली हावी है।

आगे क्या करें निवेशक

चांदी में आई यह बड़ी गिरावट किसी एक वजह से नहीं, बल्कि मुनाफावसूली, लॉन्ग अनवाइंडिंग, कमजोर ग्लोबल संकेत और तकनीकी ब्रेकडाउन का नतीजा है। रिकॉर्ड तेजी के बाद ऐसा करेक्शन बाजार की स्वाभाविक प्रक्रिया माना जा रहा है, लेकिन अस्थिरता फिलहाल ऊंची रह सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक इतनी तेज गिरावट के बाद शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। लंबी अवधि के निवेशक जल्दबाजी में नए दांव लगाने से बचें और पहले भाव के स्थिर होने का इंतजार करें। ट्रेडर्स के लिए रिस्क मैनेजमेंट और सख्त स्टॉप लॉस बेहद जरूरी है।

डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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