Bawal Rewari News: रेवाड़ी के बावल औद्योगिक क्षेत्र से कल यानी गुरुवार देर रात भीषण आग की खबर सामने आई। सेक्टर-3 स्थित स्मार्ट स्पेस सॉल्यूशंस में रात करीब 9 बजे अचानक आग लग गई और देखते ही देखते पूरी यूनिट लपटों में घिर गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कर्मचारियों की शुरुआती कोशिशें भी इसे रोक नहीं पाईं।
रात करीब साढ़े 10 बजे आग की लपटें बगल की गुरुकृपा फुटवियर यूनिट तक पहुंच गईं। यहां चप्पल कटाई का काम होता है और बड़ी मात्रा में प्लास्टिक व रबर जैसी ज्वलनशील सामग्री रखी थी। इसके बाद दोनों कंपनियों से ऊंची लपटें और काले धुएं का गुबार उठने लगा।
देर रात तक आग बुझाने में जुटे दमकल कर्मी
आग की सूचना मिलते ही बावल, रेवाड़ी और धारूहेड़ा से दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। आग की भयावहता को देखते हुए राजस्थान के भिवाड़ी से भी फायर टेंडर बुलाए गए। देर रात तक एक दर्जन से ज्यादा दमकल वाहन आग बुझाने में जुटे रहे। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक रात करीब डेढ़ बजे तक दोनों इमारतों से लपटें उठ रही थीं। आग पर पूरी तरह काबू पाने में कई घंटे लगे।
नाइट शिफ्ट नहीं होने से टला बड़ा हादसा
इस हादसे में राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि दोनों कंपनियों में उस समय नाइट शिफ्ट नहीं थी। स्मार्ट स्पेस सॉल्यूशंस में सिक्योरिटी गार्ड और 2-3 कर्मचारी मौजूद थे, जिन्हें समय रहते बाहर निकाल लिया गया। फिलहाल किसी जनहानि की कोई सूचना नहीं है।
आग से दोनों कंपनियों में करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, वास्तविक नुकसान का आकलन आग पूरी तरह बुझने और जांच के बाद ही हो पाएगा।
औद्योगिक सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
आग लगने की सटीक वजह अभी साफ नहीं है। शुरुआती तौर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है, लेकिन इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
बावल-धारूहेड़ा औद्योगिक बेल्ट में पहले भी कई बड़े हादसे हो चुके हैं। मार्च 2024 में धारूहेड़ा की लाइफलॉन्ग फैक्टरी में बॉयलर ब्लास्ट के बाद 40 से ज्यादा कर्मचारी घायल हुए थे और बाद में मृतकों की संख्या 14 पहुंच गई थी।
मई 2026 में बावल की GLS स्पेशियलिटी केमिकल्स यूनिट में भीषण आग के बाद तीन मौतों की पुष्टि हुई थी। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने इन औद्योगिक हादसों के बाद फायर सेफ्टी और श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की थी।
अब सेक्टर-3 की यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि औद्योगिक इकाइयों में फायर सेफ्टी के इंतजाम कितने प्रभावी हैं और हादसे के बाद प्रशासन की कार्रवाई किस स्तर तक पहुंचती है।
